tarakki aise milti hai
tarakki aise milti hai

दो मित्र एक कंपनी में एक ही पद पर काम करते थे। कुछ साल बाद प्रोन्नति का समय आया। उनसे ऊपर सिर्फ एक ही पद था। उनके मालिक ने उनमें से एक को प्रोन्नत करते हुए उस पद पर रख लिया। दूसरे को यह बात नागवार गुजरी। उसने अपने काम से इस्तीफा दे दिया।

मालिक ने कारण पूछा तो उसने कहा कि मैं परिश्रम, निष्ठा, अनुभव और ज्ञान की दृष्टि से कहीं भी उससे कम नहीं हूँ। फिर भी मुझे तरक्की नही मिली। मालिक ने कहा कि यदि तुमने स्वयं को उसमें अपने मित्र से बेहतर साबित कर दिया तो उसकी बजाए तुम्हें पदोन्नत कर दिया जाएगा।

मालिक ने उससे कहा कि वह बाजार जाकर देखे कि क्या कहीं कोई तरबूज बेच रहा है। वह बाजार गया और लौटकर उसने मालिक को बताया कि यहाँ से करीब आधा किलोमीटर दूर फुटपाथ पर एक आदमी तरबूज बेच रहा है। मालिक ने पूछा कि क्या भाव बेच रहा है? वह फिर से बाजार गया और लौटकर तरबूज का भाव बताया। फिर उसने प्रोन्नति पाने वाले मित्र को भी यही कहा कि वह बाहर जाए और देखकर आए कि क्या कहीं कोई तरबूज बेच रहा है।

कुछ देर बाद वह वापस लौटा और मालिक को बताया कि बाहर करीब आधा किलोमीटर दूर एक आदमी तरबूज बेच रहा है। उसने 12 रुपए किलो दाम रखा है, लेकिन दस किलो लेने पर वह सौ रुपए में दे देता है। शिकायत करने वाला मित्र उसकी बात सुनकर समझ गया कि उसके मित्र को क्यों तरक्की दी गई थी।

सारः हमें एक ही बार में अधिक से अधिक संबंधित बातों को जानने में रुचि रखनी चाहिए।

ये कहानी ‘इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंIndradhanushi Prerak Prasang (इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग)