Hindi Story: “आकाश .. आकाश …!,कहां हो तुम?”
जोर से दहाड़ते हुए विनायक बाबू घर के अंदर घुसे।
उनकी आवाज सुनकर उनकी छोटी बहू रचना दौड़ते हुए बाहर निकली और उसके साथ साथ घर के सारे लोग भी।
आकाश अपने कमरे में बैठ कर पढ़ रहा था।
वह भी अपने कमरे से बाहर निकल आया ।
“क्या हुआ बाबू जी?” डरते हुए आकाश की मां रचना ने पूछा ।
“छोटी बहू देखो तुम्हारा बेटा गुलछर्रे उड़ा रहा है सिन्हा जी की बेटी के साथ अपना चक्कर चला रहा है!
यह स्कूल पढ़ने जाता है या प्रेम पत्र लिखने..?
देखो,उन्होंने हाथ बढ़ाकर आकाश के पिता की ओर चिट्ठी बढ़ाते हुए कहा.., यह उसके स्कूल की टीचर ने मुझे लाकर दिया है ..इसे पढ़ो!”
आकाश के बाबूजी ने दिवाकर बाबू के हाथ से चिट्ठी ले लिया और पढ़ने लगे।
उन्होंने गुस्से से आकाश की तरफ देखा और कहा
“आकाश तुम स्कूल पढ़ने जाते हो या प्रेम पत्र लिखने?”
आकाश ने शर्म से अपना सिर झुका लिया।
रचना की आंखों में आंसू आ गए । चारों तरफ परिवार के लोगों से घिरे हुए थे।
रचना शर्म से गड़ी जा रही थी। वह आकाश का हाथ पकड़कर अपने कमरे में ले आई और कहा
” बेटा, प्लीज मेरी इज्जत के लिए, इस परिवार की इज्जत के लिए इस लड़की को भूल जाओ।
जो भी तुम्हारा प्रेम वेम है उसे छोड़ दो..!”
“पर माँ,मेरी बात तो सुनो!”
“नहीं मैं कुछ भी नहीं सुनुंगी।बस उसे भूल जा।मैं हाथ ज़ोड़ती हूँ तेरी!”रचना जी ने आकाश के आगे हाथ जोड़ते हुए कहा।
आकाश रोआंसा हो गया।
उसने रचना से कहा
“माँ,ठीक है अब मैं उसे हमेशा के लिए भूल जाऊंगा।”
उधर अभिनव सिन्हा जी के घर में भी महाभारत मचा हुआ था।
सिन्हा जी अपनी बेटी मानसी को डाँट रहे थे।
बहुत ही सख्ताई से डांटते हुए उन्होंने मानसी से कहा
“मानसी, अगर दुबारा वर्मा जी के बेटे के साथ मैंने कुछ भी सुन या देख लिया तो बस समझ लेना… वो दिन तुम्हारा स्कूल का आखिरी दिन होगा!
एकदम उस लड़के से दूर रहोगी तुम!”
मानसी डर गई।
आकाश और मानसी दोनों स्टैंडर्ड नौवीं की स्टूडेंट्स थे।
साथ साथ पढ़ते हुए कब दोनों एक दूसरे से प्यार कर बैठे ,दोनों को पता ही नहीं चला।
दूसरे दिन स्कूल की ट्रिप थी।
मानसी और आकाश दोंनो ही एक दूसरे से कतरा रहे थे।
दोनों एक अपराधी की तरह एक दूसरे को देखते फिर नजरें हटा लेते।
आकाश और मानसी अचानक ही सामने पड़ गए तो दोनों ही घबरा गए।
दोनों की आंखों में आंसू आ गए।
मानसी ने भरे गले से कहा
“आकाश अब हम नहीं मिल सकते। मेरे पापा ने सख्त मनाही की है.. तुमसे मिलने को।”
“हाँ मानसी,मेरी माँ ने भी मुझे अपनी कसम दे दी है।”
मानसी-“अब हमारा साथ यहीं तक था..आकाश!”यह कहकर वह रोने लगी।
आकाश ने दोनों हाथों से उसके चेहरे को अपनी हथेली में ले लिया और उसकी आंखों से बहते हुए आंसू को पर अपना अधर रख दिया और कहा
“अब कभी भी मेरे लिए मत रोना!,यह मेरा पहला प्यार हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा।”
कुछ दिनों बाद मानसी के पिता और शहर को छोड़कर हमेशा के लिए चले गए।
आकाश और मानसी दोनों की राहें हमेशा के लिए जुदा हो गई ।
कई सालों बाद आकाश एक अच्छी कंपनी में मैनेजर था ।
उसकी शादी के लिए अच्छे अच्छे रिश्ते भी आ रहे थे पर उससे इन सब में कोई रुचि नहीं थी।
उसका पहला प्यार तो कब का खो चुका था।
एक दिन उसकी मां रचना में फोन कर आकाश से कहा
” आकाश, क्या तुझे कोई लड़की पसंद है?”
नहीं मां मुझे कोई लड़की पसंद नहीं है।”
रचना जी-” ठीक है फिर। अब तो मेरी पसंद से शादी करेगा।
मैंने तुम्हारी शादी तय कर दी है।”
आकाश–” पर माँ,!”
“अब पर वर कुछ नहीं।अब मेरे लिए कर ले बेटा शादी।”
आकाश की शादी हो गई।
दुल्हन सुर्ख जोड़े में सुहाग सेज पर बैठी आकाश का इंतजार कर रही थी।
जैसे आकाश कमरे में आया ।उसने दुल्हन से कहा
” मानसी, तुम्हारा नाम भी मानसी है और किसी और का नाम भी मानसी ही था जिसे मैं आज तक नहीं भूल पाया हूं।मैं उससे बहुत प्यार करता था।पर…!,
वह थोड़ा रुक कर बोला
मुझे तुम थोड़ा समय दो एक दूसरे को समझने के लिए।”
नई दुल्हन ने अपना घुंघट उठाकर देखा ,सामने आकाश खड़ा था.. उसका पहला प्यार !
मानसी की आंखों में आंसू आ गए।
उसने कहा
” आकाश, तुम्हारा पहला चुंबन आज भी मेरे गालों में मौजूद है!”
आकाश ने मानसी को गले से लगा लिया।दोनों एक दूसरे में खो गए।
