सौतन कभी सहेली-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Sautan Kabhi Saheli

Hindi Kahani: “क्या हुआ अचानक गाड़ी क्यों रोक दी…. ?
“ध्यान से सुनो वो मिसिंग कर रही है ,विनय ने रहस्यभरी आवाज़ में कहा |
“आगे जाकर रुक जायेगी पक्का…”
तो…!
सुरीली को विनय की की उँगलियों में होने वाली सरसराहट से अंदाज़ा लग गया, कि फ़िल्म पक्का छूट जायेगी शुरू की..और ऐसा ही हुआ भी ,
थोड़ी ही दूर जाने पर ही विनय की प्रेमिका अपने बिगड़े हुए तेवर के साथ खड़ी जो मिल गयी. थी..
देखा ….मैंनें कहा था न ,मानती हो अब तुम मुझे कि नहीं ,पण्डित के पत्रा में और मेरी जुबान में,विनय कॉलर उचका कर बोले और उसकी ओर तेज़ी से चले गए
मुझे तो पता था कि तुम्हारे हाथ उसे छूने को मचल रहे हैं जाओ अपनी प्राणप्यारी के पास..
.हुँह .
.कहने भर को ही नाम रखा माता-पिता ने हमारा सुरीली ,पर सारे सुर बिगाड़कर रख दिये इनकी प्रेमिका ने…
रुकिये अपनी राम कहानी बताते हैं हम हैं सुरीली,विनय जी की धर्मपत्नी ,पर न तो हमारी ज़िंदगी मे कोई सुर है और न ही विनय जी के ….
सब सुख इनकी प्रेमिका ने
यूँ तो दूर-दूर तक उनकी कोई प्रेमिका का नामोनिशान न था।
पर हमें चक्कर तब आया जब ये शादी के तीन दिन बाद ही नौकरी पर लौट गये,नई नवेली पत्नी के साथ कोई ऐसा कैसे कर सकता है ।
भाभी और सहेलियों ने तो कितना कुछ बताया था कि नई पत्नी का बड़ा खयाल रखा जाता है
हमनें परेशान होकर पूछा तब जेठानी ने बताया कि इनकी प्रेमिका का राज़….
रविवार की छुट्टी का एक दिन भी इनसे चैन से न गुज़ारा जाता ।
शादी में मिले डबलबेड पर न लेटकर ये जब सोफे पर उसकी सीट समझकर सोते तब ही इन्हें गहरी नींद आती
उसकी सोहबत का इतना गहरा असर हुआ था,
उसकी महक इनकी सँजीवनी थी संजीवनी,उससे प्यार न हम कम कर पाए और न बच्चे।
वो गाना है न …
जब जब प्यार पे पहरा हुआ हैं,प्यार और भी गहरा गहरा हुआ है..
हम लोग तो समझौता कर चुके थे ,उससे मिलकर ही इन्हें क़रार मिलता तो आज ये शगुन कैसे खण्डित होता।
नींद तक में तो उसके मॉडल और दिक्कत बड़बड़ाते हैं कुछ नौकरी को , कहो तो उसकी रोटी खाती हो सुन लो…

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गाड़ी स्टार्ट करते हुए .विनय बोले बड़े परेशान हो जाते वो लोग अच्छा किया मैंने उसकी हेल्प कर दी
कुढ़कर भुनभुनाते हुए सुरीली ने कहा ,तुम न सुपरमैन की तरह एक ड्रेस बनवा लो और गले के पीछे एक चादर भी लटका लो ,
जहाँ इसे तकलीफ़ हो झट से पहुँच जाया करो,इसे कहते हैं लागी छूटे न …
अब जल्दी बैठो फ़िल्म शुरू हो गयी होगी…न चाहते हुए भी बाइक पर इनके पीछे बैठ गए ,पर विनय की आदत पर प्यार भी बहुत आया।
मन वापस चाहे-अनचाहे उसी के बारे में सोचने लगा यूँ तो हमारी और उसकी कोई बराबरी न थी ,फिर भी हम दोनों ही इनके जीवन का अटूट हिस्सा बन चुके थे।
इनकी वो प्रेमिका थी ही मुईं इतनी अपडेट ,आये दिन नये नये रँग बिरँगे लिबास और सुरीली आवाज और खूबियों के चर्चे कानों में पड़ते और हम किसी का कुछ न बिगाड़ पाते…
रोज़ ही हमारी आँखों के सामने से उसकी कोई न कोई सखी सहेली फर्राटे से निकल जाती और इनकी प्यार भरी नज़र हमारी बजाय उधर ही हुआ करती..
और ये …हमारे प्रीतम जी इन्हें तो उसकी रग रग की ख़बर थी ,आवाज़ से ही भाँप लेती कि कब तबियत नासाज़ है चुड़ैल की
खूब याद है जब हमारी नई नई शादी हुई थी ,इनके दोस्त के यहाँ दोनोँ खाने पर गये थे,हम उसकी पत्नी के साथ बातों में व्यस्त थे और उसने उन्हें धीरे से बुलाया…
यार मुझसे ज्यादा तो जेन को तेरी याद आ रही थी.ये दोनोँ देर रात तक आये बस जल्दी जल्दी उल्टा सीधा खाकर हम घर पहुँचे थे।
कई बार तो डॉक्टर के यहाँ जाते ,और इलाज छोड़कर उसकी बातें होने लगतीं ,मरीज इलाज की प्रतीक्षा में तिलमिला जाता और इनकी प्रेमिका वहाँ भी इनका स्पर्श सुख प्राप्त करती।
किसी भी ब्याह बरात में हमारी जान इनके कपड़ों की फिक्र में आधी हो जाती ,नालायक अपने इश्क के निशान इनके हाथों और कपड़ों पर बेझिझक छोड़ देती थी।
कभी कभी तो उसकी पुकार पर ये परसी हुई थाली छोड़कर ऐसे भागते जैसे ग्राह से गज को बचाने के लिये भगवान नारायण…
ख़ैर अब तो इस म्यान को दो तलवारों की आदत पड़ चुकी थी,और मनपसंद फ़िल्म भी शुरुआत की निकल चुकी थी….
बच्चे अब किशोरावस्था में आ चुके थे और विनय की प्रेमिकाओं की लिस्ट भी साल दर साल लम्बी होती जा रही थी,
और तो और उसकी बीमारियाँ हमें तो क्या बच्चों को भी रट गयीं थीं।अब बच्चों के साथ
फिर आया वो समय जिसकी किसी ने कल्पना भी न की थी,कोविड का दौर जब रसोई और मेडिकल छोड़कर अधिकतर लोग घर में ही क़ैद होने के लिये मजबूर हो गये..
इस बात का सबसे ज्यादा असर पड़ा विनय पर उनका तो घर में रहना किसी सजा से कम न था,खाने और झल्लाने के सिवा उनके पास कोई काम न बचा था….
यह सब उसी के विरह का साइड इफेक्ट है मैंने मन मे कहा
तभी अचानक पड़ोसी की आवाज़ आई ,और हड़बड़ाये विनय बाहर गये….
कानों में इन्जन स्टार्ट होने के बाद गाड़ी चलने की आवाज़ पड़ी,और विनय के अन्दर आते हुए गुनगुनाने की भी…
एक मारुति इंजीनियर को उसकी प्रेमिका के स्पर्श का सुख महीने भर बाद मिला था।
मम्मी !….
अनुमान लगाइये क्या हुआ…बेटे ने ज़ोर से चीख़ते हुए कहा…
हमनें धड़कते दिल से कहा क्या हुआ बेटे…
पापा ने आज गर्लफ्रैंड मारुति को देखा और उसे अपने हाथों से छुआ भी…
आज तो पक्का उन्हें रोटी हजम हो जायेगी,किशोर बेटे की इस बात पर हमनें उसे घूर कर देखा तो वो सिटपिटाकर चुप हो गया.
उफ़्फ़ इसे कोविड में भी चैन न मिला ,हमनें लम्बी साँस भरकर कहा…
ब्लडप्रेशर निकट न आवे मारुति एट हंड्रेड नाम सुनावे ,
रिट्ज ,डिजायर , वन जे ,वैगन आर, अर्टिगा
पापा का दिल इन्हीं पर फ़िदा…
तो क्या हुआ, पापा को तो चैन मिल गया कहकर नालायक अन्दर भाग गया.