Summary: सान्वी की जीत: सपनों को सच करने वाली प्रेरक कहानी
गली की टेलर कहे जाने के बावजूद सान्वी ने अपनी मेहनत और डिज़ाइनिंग से बड़ा नाम कमाया। उसकी जीत सबको सपनों की ताक़त का अहसास कराती है।
Hindi Sad Story: सान्वी अपने कमरे में घंटों से बंद थी। माँ की आवाज़ पर उसे याद आया कि कब का खाने के लिए बुलाया गया था। दरवाज़ा खोलकर वह जैसे ही हॉल की ओर बढ़ी, सामने माँ को थाली लेकर आते देखा। वह मुस्कुरा दी। दोनों माँ-बेटी साथ बैठकर कमरे में खाना खाने लगीं। सान्वी का कमरा रंग-बिरंगे कपड़ों से भरा हुआ था। कहीं किसी शादी की साड़ी, तो कहीं छोटे बच्चों के कपड़ों की कतरनें। सान्वी पिछले सात साल से घर पर ही तरह-तरह की मशीनों, धागों ,फैशन डिजाइनिंग की बारीकियों और अनुभव की मदद से डिज़ाइनर कपड़े तैयार करती और उन्हें अलग-अलग मार्केट में भिजवाती थी। शुरुआती दिन कठिन थे—कभी मशीन खराब हो जाती, कभी ग्राहक पैसे नहीं देता।
लेकिन हिम्मत और मेहनत के बल पर उसने आज अच्छा-खासा कारोबार खड़ा कर लिया था।
माँ, जो असल में उसकी मासी थीं, उसका सबसे बड़ा सहारा थीं। जब पूरा परिवार उससे मुंह मोड़ चुका था, तब सिर्फ मासी ने उसका हाथ थामा था। दरअसल, सान्वी का भाई और माँ चाहते थे कि वह आईपीएस की तैयारी करे, ताकि परिवार का समाज में नाम हो। लेकिन सान्वी को बचपन से ही सिलाई-कढ़ाई का शौक था।
यही जुनून उसे फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई तक ले गया। लेकिन जब घरवालों को यह खबर मिली, तो उन्होंने उसे कहा , गली मोहल्ले वाली टेलर बनना चाहती हो। लेकिन उसने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उसने अपनी कला को पहचान दिलाई और आज बड़े-बड़े लोग उसके डिज़ाइन्स पहनने लगे।
समय ने करवट बदली। उसी भाई की शादी के कपड़ों का कपड़ों का कॉन्ट्रैक्ट सान्वी को मिला। यह वही मौका था जिसका इंतज़ार उसे बरसों से था। उसने ठान लिया था कि इस बार सिर्फ कपड़े ही नहीं देगी, बल्कि दिल की बात भी कहेगी।
माँ के घर में मेहमान आ चुके थे और आज सान्वी भी कपड़ों के पैकेज के साथ वहां पहुँची।

भाई ने झिझकते हुए उससे कपड़े लिए, लेकिन कुछ कह न पाया। तभी एक मेहमान ने उसकी ड्रेस की तारीफ़ करते हुए कहा, बहुत ही उम्दा काम है, आजकल बड़े-बड़े ब्रांड्स भी इतनी अच्छी फिनिशिंग नहीं दे पाते।
भाई और माँ का चेहरा झुक गया। उसी पल सान्वी ने गहरी सांस लेकर सबके सामने कहा सालों पहले जब मैंने फैशन डिजाइनिंग का सपना देखा था, तो मुझे ताने मिले, डाँट पड़ी और रिश्ते तोड़ लिए गए। लेकिन आज अगर मैं यहाँ खड़ी हूँ, तो सिर्फ अपने हुनर और अपनी मासी माँ की वजह से। आप सब मुझे गली की टेलर समझते थे, लेकिन वही गली अब मेरी पहचान है।

किसी का सपना छोटा-बड़ा नहीं होता। सपना तो सपना होता है वो चाहे आईपीएस बनने का हो या डिज़ाइनर बनने का। परिवार का फर्ज़ अपने बच्चों को दबाना नहीं, बल्कि उनका साथ देना होता है। अगर उस समय आप मेरा हाथ पकड़ते, तो शायद यह सफलता आपकी भी होती।
आप सभी से बस, मेरी यही गुज़ारिश है कि अपने बच्चों को सपनों की उड़ान भरने दें, उनका साथ दें।
सान्वी की आँखों में चमक थी , उसकी माँ की आँखें नम हो गईं और भाई का सिर शर्म से झुक गया। कुछ ही देर बाद वे उसके पास आए और पहली बार दिल से बोले, सान्वी, हमें माफ़ कर दो… हम सच में गलत थे। आज तुमने साबित कर दिया कि अपने सपनों के लिए खड़ा होना ही सबसे बड़ी जीत है।
उस दिन पहली बार घरवालों ने सान्वी को गर्व से गले लगाया। मासी माँ की आँखें ख़ुशी से छलक उठीं।
