रोज़ की तरह रोहित आफ़िस के लिए निकल चुका था। अभी आधे रास्ते पहुंचा ही था कि तभी सान्वी का फोन आता है। रोहित फोन उठाते ही कहता है, हां बोलो सान्वी कैसी हो,

सान्वी: मैं सोच रही थी, मुझे पिक करते हुए चले जाना?

रोहित: ये भी कोई पूछने की बात है, तुम तो बस हुकुम किया करो, तुम  आजाओ मैं घर के बाहर ही हूं

सान्वी:  तुम्हे कैसे पता कि मुझे तुम्हारे साथ जाना था

रोहित: प्यार करता हूं तुमसे इतना तो जानता ही हूं तुम्हे

गाड़ी में बैठते ही सान्वी कहती है कि अगर तुम मुझे इतना समझते हो, तो क्या हम शादी कर सकते हैं।

रोहित मैंने तुम्हें पहले ही कहा था सान्वी कि हमारा रिश्ता शादी तक नहीं पहुंच पाएगा, फिर तुम बार बार वही बात क्यों करती हो।

अब सान्वी रोहित की बातें सुनकर, हर बार की तरह फिर से निराश हो गई और रोने लगी। अब सान्वी के व्यवहार से परेशान होकर रोहित इस रिश्ते को ही खत्म कर देता है और किसी और लड़की की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाता है।

एक दौर हुआ करता था, जब प्यार और मोहब्बत के लिए लोग अपनी जान कुर्बान करने से भी पीछे नहीं हटते थे। मगर अब मोहब्बत के मायने पूरी तरह से बदल चुके हैं। आजकल हर तरफ प्यार के चर्चे तो हैं। हर कोई प्यार की बात भी करता है और हर किसी की प्यार की अपनी अलग परिभाषा भी है। पर क्या वाकई, प्यार की डगर इतनी आसान है यां प्यार इतना सस्ता है। हम में से बहुत से ऐसे लोग हैं, जो किसी के हंसकर बात करने यां किसी के देखने मात्र को प्यार का नाम दे देते हैं। ये चीजें एटरेक्शन यां आर्कषण तो हो सकती है, लेकिन प्यार नहीं। किसी को देखने से हमें हो सकता है उसका स्टाइल पसंद आया हो, यां उसके लुक्स अच्छे लगे हो, मगर वो प्यार कैसे हो सकता है। क्यों की आप तो जानते ही नहीं कि वो कैसा है यां कैसी है। उसका स्वभाव, उसकी आदतें यां उसकी उलझनें भी। खैर, युवा पीढ़ी तो इसी को प्यार मानती है और उनकी नज़र में फिल्मी लव ही असली लव है और वो उन्हीं तरीकों से जीवन में प्यार पाने की कोशिश भी करते हैं। लेकिन अगर आप भी प्यार के इस दरिया में कूदना चाहते हैं, तो खुद ये कीजिए, ये आसान सवाल

 

क्या मैं तैयार हूं

कई बार हमारे उपर अपनी आकाक्षांओं से कहीं ज्यादा अपने परिवार और अपने आप से जुड़ी जिम्मेदारियों का बोझ होता है। जो जीवन में वक्त की कमी का एक बउ़ा कारण साबित हो सकता है। प्यार शब्द सुनने में बेहद सुहावना है, मगर किसी को अपनी जिंदगी में शामिल करने के बाद ये रास्ता उतना आसान नहीं लगता, जितना हम समझते हैं। कहीं हमारी इच्छाएं होती है, तो कहीं सामने वाले के पास वक्त की कमी। कभी उनकी चाहते हैं, तो कभी हम पर जिम्मेदारियों का बोझ। कहते हैं न कि प्यार पूछकर नहीं होता, लेकिन अगर हम अभी पूर्ण रूप से जीवन में किसी को जगह देने के लिए तैयार नहीं है, तो हमें इस विषय पर एक बार सोचना ज़रूर चाहिए।

 

खालीपन भरने की जल्दी

अधिकतर देखा गया है कि कई लोग ब्रेकअप के बाद खुद को संभाल नहीं पाते है। ऐसे हालात में वो बिना सोचे समझे किसी दूसरे अनचाहे रिश्ते में खुद को बांध लेते हैं। इस रिश्ते को हम प्यार का नाम दे देते हैं। जो सही नहीं है, हमें लगता है कि हमें दोबारा प्यार हो गया, मगर ये सिर्फ एक फिलर है, जिसे हम सो काल्ड प्यार का नाम दे देते हैं। इस प्यार में हमें खुशी से ज्यादा हर पल गम का एहसास होता है यां फिर खुद का ठगा सा महसूस करने लगते हैं। दरअसल, हम दोनों रिश्तों में कंपेरिज़न करने लगते हैं, जो हमारी परेशानी का करण भी साबित होता है।

 

प्यार की मंजिल क्या है

किसी भी रिलेशन में खुद को बांधने से पहले दिल के ससाथ दिमाग का इस्तेमाल करें और सबसे पहले ये तय करें कि इस रिश्ते की मंज़िल क्या है। ज़रूरी नहीं कि हर रिश्ता शादी के बंधन में ही बंधे। इसमें कोई दोराय नहीं कि हमें जीवन में बहुत से लोग पसंद आते हैं, कुछ बेहद अज़ीज  हो जाते हैं, लेकिन हर किसी से शादी कर लेना तो हमारे बस में नहीं, क्यों की शादी के लिए प्यार के साथ साथ बहुत सी बातों का ख्यान रखना पड़ता है। लेकिन अगर कोई ऐसा है आपके जीवन में, जो आपसे शादी की इच्छा जता रहा है और आप भी उसपर आंखे बंद करके विश्वास करने को तैयार है, तो फिर इससे बेहतर कुछ और नहीं हो सकता। 

 

मान सम्मान है

आप भले ही प्रेमी हो यां पति पत्नी, अगर रिश्ते में सम्मान है और रिश्ते में असीम प्यार है, तो कोई भ इस मज़बूत संतम्भ को नहीं हिला सकता। प्यार की गहराई का अंदाज़ा आपके व्यवहार यां आचरण से आसानी से लगाया जा सकता है। अगर आपके अंदर किसी दूसरे शख्स के लिए प्यार नहीं है, इज्जत नहीं है यां फिर आप सिर्फ पैसों के लिए यां सैर सपाटे के लिए उसका इस्तेमाल कर रहे हैं, तो ऐसे रिश्ते को एक अच्छे मोड़ पर एक अच्छे नोट के साथ छोड़ देना ही बेहतर है। 

 

निर्णय लेने से पहले परखें

अगर आप शादी के लिए तैयार हो चुकी है, तो मन में उठ रहे सवालों को एक बार ज़रूर पूछ लें। खुशनुमा रिश्ते ही बुनियाद है सामंजस्य यानि की समानता। इस रिश्ते में कोई उंचा नीचा नहीं होना चाहिए। दोनों के पास स्वतंत्रता होनी ज़रूरी है और दोनों अपने निर्णय लेने के लिए एक दूसरे पर निर्भर नहीं होने चाहिए। विवाह के बाद चाहे नौकरी करने का डिसिज़न हो यां फिर परिवार से अलग रहने की चाहत। इस तरह की बात में दोनों के बीच आपसी सहमति होना बेहद ज़रूरी है।

     

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