sanchay dukhdayi
sanchay dukhdayi

एक कंजूस अमीर ने जीवन भर कंजूसी करके पांच लाख स्वर्ण मुद्राएं इकट्टा कर लीं। इस जोड़े हुए धन की बदौलत वह बाकी सारी जिंदगी बिना कोई काम किए चैन से जीने का सपना देखने लग गया। एक दिन यमदूत ने उसके दरवाजे पर दस्तक दे दी। उसने यमदूत से कुछ समय देने की प्रार्थना की परंतु यमदूत टस से मस नहीं हुआ। वह गिड़गिड़ाकर बोला कि, ‘मुझे तीन दिन की जिंदगी दे दो, मैं तुम्हें अपना आधा धन दे दूँगा’ पर यमदूत ने उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया।

उस अमीर ने फिर विनती की मैं आपसे एक दिन की जिंदगी की भीख माँगता हूँ। इसके बदले तुम मेरी वर्षों की मेहनत से जोड़ा गया पूरा धन ले लो। यमदूत फिर भी कठोर बना रहा। आखिर उसे यमदूत से सिर्फ इतनी मोहलत मिली कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश लिखकर छोड़ सके। संदेश में लिखा- श्जिस किसी को भी यह संदेश मिले, उससे मैं सिर्फ इतना कहूँगा कि वह जीवनभर सिर्फ संपत्ति जोड़ने की फिराक में न रहे, बल्कि जिंदगी का एक – एक पल पूरी तरह से जिए। मेरी पांच लाख स्वर्ण मुद्राएं भी मेरे लिए एक घंटे का समय नहीं खरीद सकीं।

सारः अपने सुख और शांति की कीमत पर धन का संचय व्यर्थ है।

ये कहानी ‘इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंIndradhanushi Prerak Prasang (इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग)