sabase bada puny ka kaam
sabase bada puny ka kaam

भगवान के प्रति अथाह श्रद्धा रखने वाला एक बाद एक व्यक्ति गंगा किनारे नियम से पूजा करता था। कितनी भी विघ्न-बाधाएं आएं वह अपना नियम कभी नहीं भूलता था। इसके बाद भी उसके मन में बेचैनी-सी रहती थी। एक दिन आंधी-तूफान में भी ईश्वर की आराधना करता रहा। परंतु उस दिन भी उसके मन को शांति नहीं मिली। इसी तरह कुछ दिन बीत गये।

एक दिन वह अपने समयानुसार पूजा करने जा रहा था तो-देखा कि एक बच्चा खेल-खेल में नदी के अंदर जा रहा है। अचानक एक तेज लहर आई और उसे बहाकर ले गई। वह चिल्ला-चिल्लाकर हाथ-पैर मारने लगा। यह देखते ही वह भक्त भी तुरंत पानी में कूद गया।

काफी मशक्कत के बाद आखिरकार वह बच्चें को सकुशल बाहर निकाल लाया। उसने देखा कि उसकी पूजा का समय बीत चुका था पर उसे इस बात की हैरानी हो रही थी कि पूजा का समय निकलने पर भी आज उसको मन विचलित नहीं है। उसने इस पर विचार किया फिर इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि संकटग्रस्त व्यक्ति की मदद करना ही भक्ति व पुण्य है।

ये कहानी ‘ अनमोल प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंAnmol Prerak Prasang(अनमोल प्रेरक प्रसंग)