Short Story: बात उन दिनों की है जब मैं 7 से 8 साल की थी। स्कूल में अपना चप्पल भूल जाने की वजह से मैं घर के आस—पास खाली पैर घूम रही थी। उसी दिन रात को करीब 8 बजे मुझे सांप ने काट लिया। मेरा पैर काला पड़ने लगा। बुआ ने ब्लेड से ही चीरा लगाकर सारा विष तो निकाल दिया लेकिन मुझे नींद बहुत तेज आ रही थी।
उस समय मेरे पापा ने बिना देर लगाई मुझे अपने कंधे पर झाड़—फूक कराने पुजारी के पास ले गए। जब मैं वापस घर आई तो सभी भाई—बहन ने मिलकर मुझे पूरी रात जगा कर रखा। सुबह जब सबको इस वाकया का पता चला तो मजाक में पापा को बड़े चाचा जी ने कहा की बेटी थी मर भी जाती तो कोई बात नहीं। बेकार बचा लिया तुमने इसको, मेरे पापा ने कहा बेटी नहीं बेटा है यह चांद तोड़कर भी ला सकती है।
मुझे तो बहुत ही अच्छा लगा कि इसी बहाने कंधे की सवारी की हमने, वरना उससे पहले पापा से तो बहुत डरते थे हम सभी भाई बहन।
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