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 या फिर कारण बताते हैं कि मेरी टहनियां पक्षियों को, बंदरों को ठहरने का सहारा देतीं हैं। सच बताऊं तो मुझे उस समय गुस्सा तोो इतना आता है कि दुर्वासा ऋषि को भी कभी क्या गुस्सा आया होगा।  पर मैं क्रोध का घूँट पी कर रह जाता हूं। मेरी जो भी गुण गाथा है वह सिर्फ धर्म ग्रंथों तक ही सीमित रह गई है। लोगों ने मुझे अब तक बड़े कष्ट दिए जैसे, दातून के रूप में मेरी असंख्य उँगलियाँ तोड़कर , तो कभी मेरी खाल उधेड़ कर तो या कभी बाजू मरोड़कर पर मैंने कभी किसी से कुछ नहीं कहा। उल्टा मैं तो हमेशा अपने इस भव्यता के साथ , अपने हजारों हाथों के साथ आकाश से बातें करता रहा और लोगो की भलाई के लिए हमेशा तत्पर रहा। यदि आप मेरे अस्तित्व, मेरे रूह की बात करते हैं तो मैं अपने जिस्म , अपने दिल से पूरी तरह भारतीय हूं। मैं एक भारतीय मूल का सदाबहार वृक्ष हूं जो अब हर देश में पाया जा सकता है। माना कि मैं कड़वा हूं लेकिन सच तो कभी मीठा हुआ ही नहीं। मेरा सच भी तो ये ही है कि भले ही मुझे गावों का डॉक्टर या वैद्य कहें, पर लोग छोटी से छोटी बीमारियों के लिए भागते डॉक्टर के ही पास हैं। आज के मुकाबले पुराने समय में लोग बाग मेरे औषधीय गुणों को ज्यादा जानते थे इसलिए मैंने हमेशा अपने आपको सदैव जीवन से जुड़ा माना। एक पुरानी कहावत भी है कि ,”एक नीम और सौ हकीम”। किस प्रोडक्ट में मेरा प्रयोग नहीं होता चाहे वह हर्बल  ओर्गानिक पेस्टिसाइड हों , साबुन हों या एंटीसेप्टिक क्रीम या दातुन या फिर मधुमेह नाशक चूर्ण और कॉस्मेटिक्स आदि पर सारा क्रेडिट कंपनी वालों को देकर  मेरे गौरव को सिरे से नकार दिया जाता है। मैं नहीं कह रहा हूं कि मेरे गुणों का ढोल बजाओ। एक बड़ी ही मजेदार बात है ना कि आजकल बच्चा हो या बूढ़ा सब दातों की परेशानियों से पस्त हैं।  जिसे देखो वह दातों के डॉक्टर को दिखाने केेेे लिए भाग रहा होता है। क्योंकि किसी को भी मुझ से बनी  दातुन का महत्व नहीं मालूम। आजकल की पीढ़ी के हिसाब से तो मैं सिर्फ पेड़ की एक छाल हूं जो सबका मुंह कड़वा करता हूं।और तो और आए दिन कितने चर्म रोग बढ़ रहे हैं। अरे मूर्खो कभी मेरी छाल को पानी में घिसकर लगा कर तो देखो ।भूल जाओगे कि कभी किसी प्रकार का कोई त्वचा रोग भी हुआ है। माना कि आजकल आप लोगों से मेहनत नहीं की जाती, तो कोई नहीं ! बाजार से मेरा तेल ही मंगा लो। उसको भी यदि किसी त्वचारोग पर लगाओगे तो बहुत फायदा होगा और यह जो आजकल मच्छर मारने की दवाइयां, मच्छर भगाने की दवाइयां या मच्छरों वाली कॉइल आदि आदि का प्रयोग करते हो ना, उसकी जगह जरा मेरे तेल का दिया तो जला कर देखो! मच्छर ना भाग जाए तो कहना। 

अरे मुझे तो तुम अपना पूर्वज मान कर भूल चुके हो! वैसे गम भी क्या करना! आजकल के बच्चे कौन सा अपने बड़ों का मान रखते हैं या ध्यान रखते हैं, जो तुम मुझे याद रखोगे। फिर भी चलते चलते मैं बता ही देता हूं, खाने से लेकर लगाने और सजाने से लेकर रखने तक में मेरा प्रयोग होता है । मेरी गोलियां खाओगे तो खून साफ होगा और मेरी सूखी पत्तियों को अनाज में रखोगे तो किसी भी प्रकार का कीड़ा नहीं लगेगा।

एक बात बोलूं कड़वी लगेगी। हममम् तो कोई नहीं ! मैं तो हूं ही कड़वा । अब आप ही देख लो , घर मुर्गी दाल बराबर जबकि विदेशों में मुझे एक ऐसे वृक्ष के रूप में जाना जाता है जो मधुमेह, एड्स, कैंसर जैसी तमाम बीमारियों का इलाज कर सकता है I

देखो बड़े बुजुर्गों की बात हमेशा कड़वी ही होती है। मैं अपने मुंह मियां मिट्ठू बनकर आपको अपनी अच्छाइयों से अवगत करा रहा हूं तो सिर्फ इसलिए कि आप मुझसे जितना अधिक स्वास्थ्य लाभ उठा सकते हो उठा लो। देखो वरना बाद में कहोगे,  मैंने बताया नहीं , मैं अकड़ रहा था।

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