कुछ दिन बाद की बात है, नन्ही गोगो शाम के समय घूमने के लिए झूला पार्क गई, तो देखा उसने गुलाब के फूल की पँखुड़ी पर बैठी एक बड़ी-सी दाढ़ीदार मक्खी को। उस अजब-सी मक्खी को देख, नन्ही गोगो को इतनी हैरानी हुई कि मारे अचरज के वह जोर-जोर से हँसने लगी।
तभी वह मक्खी थोड़ी और बड़ी हुई तो नन्ही गोगो चौंकी। वह तो एक बौना था। बहुत छोटा-सा, दाढ़ीदार बौना। उसकी दाढ़ी सफेद और घुटनों तक लंबी थी। उसने लाल रंग की पगड़ी और हरे रंग का लंबा-सा चोगा पहन रखा था। पर कुल मिलाकर था वह सिर्फ अँगूठे के बराबर।
“तुम…तुम कौन हो? तुम्हें देखकर मुझे बड़ी हैरानी हो रही है।” नन्ही गोगो ने कहा।
“मैं…!” कहकर दाढ़ी वाला बौना हँसा। बोला, “मैं हूँ पाशा, जादूगर पाशा।”
नन्ही गोगो ने जादूगर पाशा का नाम पापा से सुना है। उसके बारे में थोड़ा मम्मी ने भी बताया था। बोली, “पर तुम तो जादूगर पाशा जैसे नहीं लगते। तुम तो बौने हो, एकदम छोटे-से बौने, पता नहीं किस दुनिया से आए हो?”
इस पर बौना हँसकर बोला, “हूँ तो मैं जादूगर पाशा ही, पर मैंने अपना रूप बदल लिया है, ताकि उन्हें ही जादू दिखाऊँ जो मेरे जादू की कद्र कर सकें। क्या तुम मेरा जादू देखना चाहोगी गोगो?”
“हाँ-हाँ, क्यों नहीं?” जादू का खेल देखना गोगो को पसंद था। बोली, “ओ जादूगर पाशा, तुम कौन-सा जादू दिखाओगे?”
“मैं दुनिया के सारे जादू दिखा सकता हूँ। दुनिया में मुझसे बड़ा जादूगर आज तक नहीं हुआ। बताओ, तुम क्या देखना चाहती हो?” कहते-कहते जादूगर पाशा थोड़ा बड़ा हो गया। अब वह देखने में किसी छोटे पिल्ले जितना लग रहा था।
गोगो बोली, “तुम पहले बड़े तो हो जाओ। अभी तो मुझे तुम्हें देख-देखकर हँसी आ रही है।”
गोगो का कहना था कि देखते ही देखते जादूगर पाशा खूब बड़ा होकर सामने नजर आने लगा। उसकी लंबी सफेद दाढ़ी जमीन पर लोट रही थी। लाल पगड़ी पेड़ों के शिखरों तक ऊँची थी और हरा चोगा इतना बड़ा लग रहा था, जैसे घास का मैदान हो।
गोगो सोचने लगी, जादूगर पाशा तो वाकई जादूगर है। पर मैं भला कौन-सा खेल दिखाने के लिए कहूँ?
जादूगर बोला, “तुम कहो तो गोगो, मैं तुम्हें दो घंटे में सारी दुनिया की सैर करा लाता हूँ।”
“अरे वाह, सचमुच…! सच्ची-मुच्ची तुम मुझे सारी दुनिया घुमा सकते हो, सिर्फ दो घंटे में?” गोगो ने हैरानी से कहा। उसकी आँखें बुरी तरह फैल गई थीं।
“हाँ-हाँ, क्यों नहीं! बैठो मेरे कंधे पर और चलो मेरे साथ-साथ दुनिया की सैर करने।” कहते-कहते जादूगर पाशा ने गोगो को उठाकर अपने कंधे पर बैठा लिया।
गोगो बैठी तो जादूगर पाशा उड़ चला। उड़ते-उड़ते उसने झटपट गोगो को इंग्लैंड, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, रूस, चीन, जापान समेत दुनिया के सारे बड़े-बड़े देश दिखा दिए। हर जगह वह थोड़ी देर रुकता, फिर अपनी तुर्रेदार लाल पगड़ी को इशारा कर देता। वह किसी एंटीना की तरह उसी दिशा में फहरने लगती, जिधर जादूगर को जाना था। बस, फिर पगड़ी के साथ-साथ जादूगर पाशा भी मजे में उड़ने लगता और झटपट-झटपट मीलों दूर निकल जाता। उसने गोगो को अफ्रीका और आस्ट्रेलिया, लंका, नेपाल और इंडोनेशिया की भी सैर कराई।
बोला, “गोगो, अभी कुल डेढ़ घंटा बीता है और अब हम कोलंबो में हैं। बोलो, क्या अब वापस चलें?”
“कोलंबो!” गोगो बुदबुदाई। बोली, “ओ जादूगर चाचा, अभी कितनी देर और लगेगी वापस पहुँचने में?”
“बस, आधा घंटा। मैंने प्रॉमिस किया था न!” जादूगर पाशा हँसते हुए बोला।
“सच्ची!” खुशी के मारे गोगो की चीख निकल गई।
“हाँ, क्यों नहीं!” जादूगर पाशा हँसने लगा। बोला, “तुम कहो तो हम पंद्रह मिनट में भी वापस पहुँच सकते हैं।”
“कैसे?” गोगो ने पूछा।
“मेरी प्यारी-सी कार से।” जादूगर पाशा ने कहा।
“कार…! कहाँ है तुम्हारी कार?” गोगो ने कौतुक से कहा।
सुनकर जादूगर पाशा ने अपनी दाढ़ी में हाथ डाला और देखते ही देखते एक छोटी-सी लाल खिलौना कार उसके हाथ में नजर आने लगी।
गोगो को हँसी आ गई। बोली, “यह दाढ़ी क्या तुम्हारा बटुआ है जादूगर चाचा कि तुमने इसमें अपनी खिलौना कार छिपाकर रखी है। और फिर इतनी छोटी-सी तो कार है, इसमें मैं बैठूगी कैसे?”
“अभी तुम देखती जाओ।” जादूगर पाशा हँसा।
उसी समय जादूगर पाशा ने अपनी दाढ़ी के एक बाल को पकड़कर खींचा तो देखते ही देखते कार बड़ी हो गई और होते-होते पूरे आकार की कार नजर आने लगी। जादूगर ने कार का दरवाजा खोलकर कहा, “आओ गोगो, बैठो।”
गोगो ने सोचा, जादूगर पाशा ही कार चलाएगा और वह तो पास वाली सीट पर आराम से बैठेगी। पर नहीं, जादूगर पाशा ने उसे ड्राइविंग सीट पर बिठाकर कहा, “बैठो गोगो, गाड़ी तुम चलाओगी।”
“पर…पर मुझे तो गाड़ी चलानी नहीं आती।” गोगो घबरा गई।
“कोई बात नहीं…कोई बात नहीं गोगो, यह कार तो खुद ही सिखाती है। तुम बस, इसका कहना मानना। चलो, अब ड्राइविंग सीट पर बैठो तो सही।”
और गोगो ने बैठते ही स्टार्ट का बटन दबाकर स्टेयरिंग व्हील को सँभाला, तो कार एकाएक तेजी से दौड़ पड़ी। इतनी तेज…इतनी तेज कि गोगो चकरा गई। हालाँकि उसे अंदर ही अंदर हँसी भी आ रही थी। आखिर पहली बार उसने ड्राइविंग की थी। इस कार को चलाना इतना मजेदार होगा, उसे अंदाजा ही नहीं था।
लेकिन थोड़ी देर बाद गोगो के चेहरे पर परेशानी की रेखाएँ उभरने लगीं। कारण यह था कि सामने लहराता हुआ समंदर नजर आ रहा था। वह नहीं समझ पा रही थी कि कार को किधर मोड़े, क्योंकि दूर-दूर तक बस समंदर का पानी ही पानी था।
क्या करूँ, क्या नहीं! सोचकर घबराते हुए उसने जादूगर पाशा की ओर देखा। पर जादूगर पाशा तो निश्चिंत बैठा था। हँसते हुए बोला, “चिंता न करो गोगो, तुम तो बस कार की स्पीड बढ़ाओ। यह जादू वाली कार है। पानी पर भी ऐसे ही दौड़ती है जैसे जमीन पर।”
“सच्ची, हम डूबेंगे नहीं?” गोगो ने हैरान हो पूछा।
“सच्ची…!” जादूगर पाशा हँसा।
और सचुमच जैसे ही कार समुद्र के पानी पर चलने लगी, उसकी स्पीड और बढ़ गई। वह बड़े मजे से समुद्र के पानी पर ऐसे दौड़े जा रही थी, जैसे समुद्र का पानी नहीं, दूर-दूर तक कोई समतल मैदान है।
समुद्र की ठंडी-ठंडी हवा गोगो के कानों में गुदगुदी कर रही थी। पानी पर जहाज की तरह तेज दौड़ती कार उसे इतनी मजेदार लग रही थी कि बार-बार उसे हँसी आ रही थी।
कुछ देर बाद समुद्र खत्म हुआ तो गोगो ने चैन की साँस ली। पर यह क्या! यह तो सामने पहाड़ है। अब…?
“हाय-हाय, अब क्या होगा?” गोगो फिर परेशान। पर जादूगर पाशा निश्चिंत बैठा था। हँसकर बोला, “स्पीड बढ़ाओ, गोगो!”
और सचमुच मजा आ गया। पहाड़ पर भी कार उसी तरह झटपट-झटपट दौड़ने लगी, जैसे समतल सड़क पर दौड़ रही हो।
गोगो ने घड़ी देखी। बोली, “जादूगर चाचा, दो घंटे पूरे होने में अभी दो मिनट बाकी हैं। क्या हम दो मिनट में पहुँच जाएँगे वापस?”
“हो-हो-हो!” जादूगर पाशा हँसा। बोला, “क्यों नहीं, जरूर पहुँच जाएँगे। बस गोगो, तुम जरा ऊपर वाला नीला बटन तो दबाओ।”
गोगो ने ऊपर उठकर नीला बटन दबाया।…मगर यह क्या! नीला बटन दबाते ही कार तो उड़ने लगी। अरे सचमुच, कार उड़ी जा रही थी आसमान में! अब वह हवाई जहाज की तरह तेजी से हवा में तैर रही थी।
और दो मिनट पूरे होते ही जादूगर पाशा की कार पहुँच गई झूला पार्क में।
झूला पार्क के नीली वर्दीधारी दरबान ने देखा कि तेजी से चलती लाल कार पार्क के अंदर दौड़ी चली आ रही है। वह चिल्लाया, “सुनो-सुनो, कार अंदर नहीं आएगी। कार को बाहर ही पार्क कीजिए।”
पर तब तक जादूगर पाशा और उसकी लाल कार दोनों ही गायब हो चुके थे।
गोगो एक गुलाब के फूल के पास खड़ी अचरज से भरकर सोच रही थी, ‘अरे, इतनी जल्दी जादूगर चाचा कहाँ चले गए? और उनकी कार…! शायद फिर उन्होंने अपनी खिलौना कार दाढ़ी में ही छिपा ली होगी।’
गोगो ने ध्यान से देखा कि गुलाब के फूल की एक पँखुड़ी पर एक अजीब-सी दाढ़ीदार मक्खी बैठी है। ‘जरूर वही होगा जादूगर पाशा।’ गोगो समझ गई और ‘टा-टा’ करके हँसती हुई घर की ओर चल दी।
ये उपन्यास ‘बच्चों के 7 रोचक उपन्यास’ किताब से ली गई है, इसकी और उपन्यास पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Bachchon Ke Saat Rochak Upanyaas (बच्चों के 7 रोचक उपन्यास)
