भारत कथा माला
उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़ साधुओं और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं
बहुत समय पहले की बात है एक हँसता खेलता परिवार था। परिवार में माता-पिता और दो बच्चे थे। एक का नाम अमन और दूसरे का नाम अतुल था। अमन की उम्र 8 साल और अतुल की 13 साल थी। परिवार बहुत पढ़ा-लिखा तथा संस्कारी भी था। अमन और अतुल अंग्रेजी भाषा के स्कूलों में पढ़ते थे। सभी बहुत खुश थे। माता-पिता नौकरी करते थे, इसीलिए घर की आम बोलचाल की भाषा कन्नड़ से कब अंग्रेजी हो गयी किसी को नहीं समझ आया। अमन और अतुल छोटे थे इसलिए जैसी भाषा माता-पिता की थी, अमन और अतुल भी वही अपना लिए। सभी एक-दूसरे से अंग्रेजी में बातें करते थे।
सब ठीक चल रहा था। सभी अपने कामों में व्यस्त थे। अमन और अतुल अपनी पढ़ाई में व्यस्त रहने लगे। इस तरह से समय बीतने लगा। किसी ने कभी भी नहीं सोचा की अपनी मातृभाषा को अपने आने वाली पीढ़ी को भी सिखाना चाहिए, कभी भी उन्हें जरुरत नहीं लगी। अमन और अतुल भी अपनी अंग्रेजी भाषा से खुश थे। एक दिन गाँव से अमन और अतुल की दादी जी सभी के साथ शहर में रहने के लिए आयी। सभी को बहुत अच्छा लग रहा था कि कोई बच्चों के साथ घर में बड़ा रहने के लिए आया है। एक दिन माता-पिता अपने रोज के कार्य की तरह अपने-अपने कामों के लिए चले गये और अमन और अतल की गर्मी की छट्रियां चल रही थी इसलिए अमन और अतुल घर पर ही रह रहे थे। दोनों बच्चे अपने-अपने गेम खेल रहे थे कि अचानक दादी की आवाज आने लगी नीरू-नीरू। अमन और अतुल आवाज सुनकर दादी के पास आए लेकिन दादी क्या कह रही है, उन्हें कुछ समझ नहीं आया। दोनों भाई दादी के पास बैठकर उनको सुनने लगे फिर भी उन्हें कुछ समझ नहीं आया कि वह क्या कह रही है।
दोनों भाई बहुत परेशान हो रहे थे लेकिन कुछ कर नहीं सके, कुछ ही समय में दादी की साँस चलना बंद हो गई। अमन ने अपनी माता को फोन लगाया और बताया कि दादी जी कुछ नहीं बोल रही है। माँ सारा काम छोड़कर जल्दी से घर के लिए निकल दी, साथ में अपने पति को भी फोन करके बुला लिया। जब तक दोनों घर पर पहंचते तब तक बहत देर हो चुकी थी। दादी जी की सांसे बंद हो चुकी थी। सभी बहुत दुखी थे फिर भी सभी मान्यता के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किए। समय बीतने लगा।
एक दिन अमन ने अपनी माता जी से पूछा- माँ ‘नीरू’ का क्या मतलब होता है? माँ ने कहा यह शब्द आपको स्कूल में नहीं सिखाया गया है? अमन ने कहा नहीं। ‘तो फिर आप को यह शब्द कैसे पता चला?’ माता ने पूछा, अमन ने कहा यह शब्द दादी से सुना था। जब आप सब घर पर नहीं थी तो दादी ने कुछ खाया और नीरू-नीरू कर कुछ मांग रही थी। हमें समझ नहीं आया। हम दोनों भाई उनके पास आकर बैठ गए। उनको समझने की कोशिश करने लगे, इतने में उनका साँस चलनी बंद हो गई और फिर हमने आपको फोनकर बुला लिया था। माँ ने जब अपने बेटे के मुँह से यह शब्द सुना तो उनके होश उड़ गए। उनको जरा भी समझने में देर नहीं लगी कि हो ना हो माता जी की जान पानी ना मिलाने के कारण हुई है। सभी लोग यह सुनकर बहुत दुखी हुए कि आज अपने बच्चों को अपनी मातृभाषा समझ आती तो शायद आज माता जी हमारे साथ होती। और उस दिन के बाद से उन्होंने अपने बच्चों को अपनी मातृभाषा सीखाना शुरू किया।
भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’
