Hindi Love Story: “देर लगी आने में तुमको, शुक्र है फिर भी आए तो; आस ने दिल का साथ ना छोड़ा, वैसे हम घबराए तो…” मैंने गाते हुए कहा, जब वह एक घंटे की देरी से मेरी कार की फ्रंट सीट पर आकर बैठी।
“सॉरी…सॉरी, बहुत देर हो गई।”
“मैडम, आपने मेरे एक घंटे का क़त्ल किया है। जिसके लिए यह सॉरी नाकाफ़ी है।” मुझे क़तई नापसंद है इतना लम्बा इंतेज़ार, जब किसी ने वक़्त दिया हो।
“तुम्हें क्या पता हम लड़कियों की मुसीबतें, अब जल्दी चलो भी।” यहाँ तो अपने किए जुर्म का रत्ती भर अहसास तक नहीं।
“अब किस मुसीबत में फंस गई थी, तुम्हारा मेकअप देखकर तो लगता है दो घंटे से इसी में बिज़ी होगी।” मैंने लड़कियों के बारे में अपने साधारण ज्ञान का उपयोग किया। यूँ तो यह नाइट ड्रेस में भी मेरे साथ चल देती थी, पर आज मैडम को उसकी स्कूल फ्रेन्ड की शादी में भी जाना था।
“तुम समझ ही नहीं सकते। आई लाइनर और बाल ठीक करते-करते रोना आ गया आज तो। दोनों तरफ़ की आई लाइनर बराबर करना कितनी बड़ी मुसीबत है। रोना आने पर, रो भी नहीं सकते वरना तो और तबाही।”
“हाँ! इतनी बड़ी-बड़ी मुसीबतें तुम्हीं को मुबारक हो। तुम लोगों के भेजे में यह सीधी सी बात कब घुसेगी कि, यह दुनिया तुम्हें हुस्न के बाज़ार की अदना सी माल भर समझती है। तुम्हारी सारी सजावटें तुम्हें उस मुक़ाबले में ढकेल देती हैं; जिसमें हर किसी को अव्वल होने का भ्रम परोसा जाता है। कैसे तुम इस बेवकूफ़ी भरे ख़्याल पर यक़ीन कर सकती हो कि, इतनी ज़हमत उठाकर भी दूसरों की नज़रों में ख़ूबसूरत नज़र आना लड़कियों का पहला काम है। इस हुस्न परस्त दुनिया का सितारा बनने की कोशिश में तुम माल बनते चली जाती हो। और हाँ, तुम्हारी आईलाइनर के बराबर होने से ज़्यादा क़ीमती मेरा वक़्त था। जब जाना हो एक घंटे बाद का ही वक़्त बताया करो।”
“ही…ही…ही…किया तो वही था।” उसने जवाब दे सकने लायक़ सवाल ही सुना और मेरी ओर हवा में पुचकारते हुए कहा। उसकी यह अदा मुझे खासी पसंद है, वैसे तो आशिक़ दिल का ख़्याल करते हुए कजरारी आँखों से आँखें तो नहीं ही मारी जानी चाहिए; यूँ ही तो वाइज़ काफ़िर हुए फिरते हैं।
“पटाना बहुत आता है तुम्हें।” कहते हुए मैंने दिवानगी का रस स्वरों में घुलने दिया।
“तुमने भेजी थी ना आज गुड मार्निंग के साथ शायरी कि ‘मोहब्बत आँखों से बयाँ होती है…’ तो सोचा आज बयाँ कर ही दूँ।” अपनी ग़लती पर, शरारत से फ़तह हासिल करना उसकी बेमिसाल ख़ासियत है। उसने तिरछी नज़रों से मुझे देखा।
“हाँ, पर ये किसने कहा कि भैंगी आँखों से बयाँ होती है?” मैंने शक्ल पर फ़र्ज़ी हैरत बिखर जाने दी।
“मैं तुम्हें भैंगी लगती हूँ?…एक नम्बर के दुष्ट हो।” उसने अपना भैंगापन छोड़ा नहीं, बल्कि होंठ भी तिरछे कर लिए।
“हे भगवान! इक चुड़ैल से प्यार किया…उससे नज़र को चार किया…हाय रे हमने ये क्या किया…ये क्या किया…” मैंने मस्ती में बहते हुए पैरोडी गाई।
“भूत कहीं के…तुम्हारा मर्डर कर दूंगी मैं, पर अभी तो तुम्हारे बाल खींचने का भी रिस्क नहीं ले सकती। बदलाखोर दरिंदे!” कहते हुए उसने अपने दोनों हाथों से नोंच खाने वाली भंगिमा बनाई। नेल आर्ट मेरी आँखों में चमका।
या अल्लाह! मुझ पर रहम-ए-तजुर्बा हुआ, उसने आइने के सामने वक़्त जाया नहीं किया था।
“ओ बाबू मोशाय! ज़िंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में है जहाँपनाह, जिसे ना आप बदल सकते हैं ना मैं। हम सब तो रगमंच की कठपुतलियाँ हैं, जिसकी डोर हुस्नवालियों के हाथ बँधी है। कब, किसे, कैसे उठाकर पटकेंगी, यह कोई नहीं जानता… मौत तू एक कविता है, मुझसे एक हुस्नवाली का वादा है; गुनगुना देगी वह, मुझे अपने आगोश में दबोच कर…”
ये कहानी ‘हंड्रेड डेट्स ‘ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Hundred dates (हंड्रेड डेट्स)
