दशग्रीव के बिना राम का अस्तित्व नहीं है। एक ओर प्रकांड ब्राह्मण था तो दूसरी ओर पराक्रमी योद्धा। एक पिता निष्ठ था और दूसरा पत्नी निष्ठ। एक ज्योतिष और जड़ी-बूटियों में पारंगत था तो दूसरा अस्त्र-शस्त्रों के संचालन में निपुण। एक मोक्ष का प्रार्थी था और दूसरा मोक्ष दास्त्री। एक पिता था तो दूसरा पति। विभिन्न मतों के अनुसार रावण आयुर्वेद पर अनेक ग्रंथ लिखे। वनस्पतियों और जड़ी-बूटियों का रावण को ज्ञान था। रावण रूग्ण का उपचार करता था या नहीं इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता। एक लोक प्रचलित मान्यता के अनुसार रावण ने अपनी पत्नी मंदोदरी के अनुरोध पर शिशु के लिए आयुवेदिक उपचार पर पुस्तक भी लिखी थी। ज्ञान विभिन्न विधाओं में पारंगत दशग्रीव एक महान अभियंता भी था। ऐसा भी कहा जाता है कि पुष्पक विमान भी रावण ने निर्मित किया था। रावण की विद्वता की परख रखने वाले राम ने लक्ष्मण को उस समय शिक्षा ग्रहण करने भेजा जब दशग्रीव मृत्यु शय्या पर अंतिम सांसें ले रहा था। लंका में यह मत भी प्रचलित है कि रावण समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाना चाहता था। इसके अतिरिक्त सोने में सुगंध डालना चाहता था।
सिगिरिया

श्रीलंका में सिगिरिया नामक एक स्थान है। ऐसा माना जाता है कि वहां रावण का महल हुआ करता था।
रावण का महल जिस चट्टान पर था वह अत्यंत दुर्गम स्थल है। ऐसा माना जाता है कि रावण का साम्राज्य मध्य श्रीलंका में, बदुल्ला, अनुराधापुरा, केंडी, पोलोन्नुरुवा और नुवारा एलिया तक फैला हुआ था।

इस महल के विषय कहा जाता है कि यह महल कुबेर ने बनाया था। कुबेर रावण का भाई था। सिगरिया रॉक चट्टान के शीर्ष पर एक प्राचीन महल का अवशेष है। जो किलेबंदी, सीढ़ीदार बगीचे, तालाब, नहर, गलियों और फव्वारों से घिरा हुआ है।
नुवासा एलिया

श्रीलंका में नुवासा एलिया वह स्थान है जहां सीता को सर्वाधिक समय तक रखा गया था। यहां अब सीता माता का मंदिर बना हुआ है। इस स्थान को सीता एलिया भी कहा जाता है। इतिहासकारों और विद्वानों के अनुसार नुवासा एलिया में ही अशोक वाटिका थी।
एल्ला की रहस्यमय गुफाएं

ऐसा माना जाता है कि नुवासा एलिया से सीता को एल्ला नामक स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया था। यहां एक बहुत बड़ी, अनोखी, काफी गहरी एवं अनेक खंडों में विभक्त गुफा है। जानकार लोगों के अनुसार इस रावण गुफा में विशेष प्रकार की सुरंग व्यवस्था है।

जिसे सुरंगों का जाल कहा जा सकता है। रावण समय-समय पर इसका प्रयोग करता था। यह गुफा आज भी है और इसके पास एक नदी बहती है। विद्वानों के अनुसार इस नदी में सीता स्नान करने आया करतीं थीं। ऐसा भी कहा जाता है कि रावण यहीं पर ही अपना प्रिय वाद्ययंत्र रावण हत्था बजाया करता था।
कुरुनेगाला हवाई अड्डा

कुरुनेगाला वह स्थान है जहां इस बात के संकेत मिले हैं कि यहां एक हवाई अड्डा प्राचीन काल में रहा होगा। संभवतः यह रावण का हवाई अड्डा था। इसके अतिरिक्त अनेक हवाई अड्डों थे रावण के। रावण को हवाई यात्रा में बेहद रूचि थी और वह अक्सर हवाई यात्रा पर निकल जाया करता था।
अनुराधापुर में रहस्यमय यंत्र

अनुराधापुर में एक रहस्यमयी चट्टान देखने को मिलती है। यहां एक विशेष यंत्र बना हुआ है। इस विषय में अनेक कथाएं श्रीलंका में प्रचलित हैं।

इतिहासकारों, वैज्ञानिकों और विद्वानों के अनुसार यह पूरे ब्रह्मांड का मानचित्र है। एक अन्य मत के अनुसार यह अंतरिक्ष तक का मानचित्र है।
वानावतुना में वानस्पतिक विविधता

यह एक उभरा क्षेत्र है। यहां एक पहाड़ी है। यहां कि वनस्पति श्रीलंका की वनस्पति से भिन्न है। ऐसी मान्यता प्रचलित है कि जब भगवान हनुमान लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी के लिए पूरा पहाड़ ला रहे थे तो उसका एक हिस्सा यहां गिर गया था। संभवतः इसी कारण से यहां की वनस्पति काफी अलग है। इसके अलावा एक अन्य कहानी भी है। कहते हैं कि यहां चुंबकीय शक्ति सर्वाधिक है। वैज्ञानिकों के अनुसार यहां की चुंबकीय शक्ति इतनी अधिक है कि अगर इसके ऊपर से कोई उपग्रह गुजरे तो वह भी अपना रास्ता भटक जाता है।
दिवरुमपोला
जहां सीता की अग्नि परीक्षा हुई

श्रीलंका में वेलीमड़ा नामक जगह पर डिवाउरूम्पाला मंदिर है। यहां पर माता सीता ने अग्नि परीक्षा दी थी। आज यहां एक मंदिर है। जिस तरह न्यायालय में भगवान की कसम खाई जाती है, वैसी ही यहां आकर लोग वादे की कसम खाते हैं।
