काश होता एक डस्टबिन-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Kaash Hota Ek Dustbin

Short Story in Hindi: डस्टबिन बडा ही महत्वपूर्ण होता है । एक स्त्री के लिए घर की सफाई करने के बाद सार कूड़ा  डस्टबिन में डाल देती है। और इसी तरह से सोशल मीडिया पर अश्लील टिप्पणी करने वाले पुरुषों को उठाकर रोज डस्टबिन में डालती है और अपने मैसेंजरों को भी खाली करती रहती है। और सदा डस्टबिन में  पड़े सड़ते रहते हैं ।

यह चरित्रहीन संस्कारहीन पुरुष जो एक सभ्य स्त्री के आगे बढ़ने में बाधक बनते हैं। काश वास्तविक समाज में भी एक ऐसा ही डस्टबिन होता जहां चरित्रहीन गंदे पुरुष को अपने हाथों से उठाकर स्त्री डस्टबिन में सड़ने के लिए डाल देती  और स्त्री खुद इन चरित्रहीन गंदे पुरुषों से छुटकारा पा जाती और स्वतंत्र भारत में एक स्वतंत्र स्त्री बिना डरे इन चरित्रहीन संस्कारहीन पुरुषों से स्वतंत्र विचरण करती आभासी और सामाजिक दुनिया में…भारत माता की तरह स्वतंत्र हो जाती
काश एक चरित्रहीन संस्कारहीन पुरुषों के लिए एक डस्टबिन होता जो दिन रात परेशान करते हैं सड़कों पर अकेली स्त्री को और सोशल मीडिया पर अश्लील टिप्पणी कर इन पुरुषों की वजह से स्त्रियों  पर  बंधन लगाए जाते हैं। बेकसूर स्त्री की उन्नति में बाधक है यह संस्कारहीन और चरित्रहीन पुरुष।
काश एक डस्टबिन होता…

Also read: गर्मी के मौसम में घर की छत—जब मैं छोटा बच्चा था