बाई चंदा फिर चिल्ला रही थी, ‘अम्मा जी, फिर पड़ोसी ने आंगन में कूड़ा डाल दिया, मना करते हैं फिर भी कूड़ा फेंक देती है, बहू प्रिया भी बोली, ‘हां अम्मा जी, कल मैंने कूड़ा फेंकते देखकर मना भी किया, बहुत बदतमीज है। इनको समझाना बहुत जरूरी है। अम्मा जी भी चिंता में पड़ गई, नए पड़ोसियों को सबक सिखाना जरूरी है।

दो दिन बाद ही पड़ोसी के घर से कथा का बुलावा आया, अम्मा जी ने कहा, ‘बहू मैं जाऊंगी। प्रिया भुनभुना रही थी, ‘अम्मा जी, ऐसे बदतमीज लोगों के यहां नहीं जाइए। अम्मा जी ने चंदा से एक बड़ी सी बाल्टी वाला डस्टबिन मंगवाया, बढिय़ा से पैक करवाया, चंदा के साथ गई। सभी पड़ोसी भी नए पड़ोसी से मिलने आए। पूजा में चढ़ाने के लिए फल-फूल और मिठाई लाए, नए पड़ोसी के साथ-साथ सभी उत्सुक थे, अम्मा जी क्या उपहार लाई हैं। पूजा के पश्चात प्रसाद वितरण शुरू हो रहा था, अम्मा जी ने नए पड़ोसी को उपहार दिया, वह रख रही थी, अम्मा जी ने कहा, ‘बहू अभी खोलो, पड़ोसिन ने उपहार खोला, एक डस्टबिन था। तमतमा कर कुछ कहने ही जा रही थी अम्मा जी ने कहा, ‘बहू छत पर जाकर बार-बार कूड़ा फेंकने में तुम्हें तकलीफ होती है, कूड़ा इसमें भर लेना और सफाई कर्मचारी को दे देना और अच्छे पड़ोसी बनना। चल चंदा, आज आंगन की सफाई करनी है कल से ये कूड़ा डस्टबिन में ही डालेगी।

अन्य पड़ोसी नए पड़ोसी को देख रहे थे। पड़ोसी के पति ने ही डस्टबिन में व्यवहार किए दोने डाल दिए और अम्मा जी से माफी मांगी।

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