बिस्कुट रख लो...-पूज्यनीय सास
Biscuit Rakh Lo

Short Story: बहु सुनो यह बिस्कुट रख लो रास्ते में खाती जाना और यह पांँच सौ का नोट भी लो चाय पानी पीती जाना।”

मुझे हंँसी आ रही थी, और गुस्सा भी। रांची से दिल्ली कुछ ही घंटों में तो इंडिगो फ्लाइट पहुंचा देगी। यह बात कई बार सासू मांँ को बता चुकी थी, पर वो थीं कि ज़िद्द पर अड़ी थी।
“रख लें बिस्कुट का पैकेट और चाय पानी पीती रहना। अकेली जा रही है, अपना ध्यान रखना।”

अरे! मैं कोई दूध पीती छोटी बच्ची हूंँ। जो इस तरह मेरी चिंता कर रहीं हैं। वैसे तो घर में जब देखो हर काम में मेरी कमी निकालेंगी और तानों की बौछार लगाए रहेंगी।
“बस अब जल्दी से यहाँ से निकल जा अविका।” एक तरफ मन में यही चल रहा था फिर भी सासूमांँ के चरण स्पर्श करते वक्त आंँखों से आंँसू की कुछ बूंदें स्वत: लुढ़क आई। शायद इसलिए कि उनको मेरी कितनी चिंता है।
एयरपोर्ट पहुंँची तो पता चला फ्लाइट काफी डिले हो गई है। भूख जोरों की लग गई थी तब सासूमांँ के दिए बिस्कुट से ही अपना पेट भरा और उन्हीं पैसों से पानी और कॉफी लिया।
बाहर से भले वो नारियल की तरह कठोर दिखती हैं पर दिल उनका बहुत ही कोमल है।

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