kaagaj ke tukade
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Hindi Story: राहुल के पिता ने मंडी में अपनी दुकान पर जाने से पहले एक बार फिर से उसे उठाने के प्रयास से कहा कि बेवकूफ इंसान अगर इसी तरह ज़िंदगी में सोता रहेगा तो सारी उम्र कुछ भी हासिल नहीं कर पायेगा। हजारों बार समझा चुका हूं कि यदि अपनी ज़िंदगी को संवारना है तो सुबह जल्दी उठा कर। लेकिन मुझे लगता है कि तू कभी नहीं सुधर सकता। राहुल ने बिस्तर पर लेटे-लेटे ही कहा- ‘यदि सुबह जल्दी उठ कर ही हर कोई अमीर बन सकता तो फिर हमारा अखबारवाला और दूधवाला दुनिया के सबसे अमीर इंसान होते।’ अब इससे पहले कि राहुल की इस बात पर सारे घर में हंगामा होता, राहुल की मां ने अपने पति को किसी तरह से शांत करके ठंडे मन से दुकान पर भेज दिया। कुछ ही देर में राहुल की मां उसके लिये नाश्ता बना कर किसी जरूरी काम से बाहर चली गई।

थोड़ी देर और नींद पूरी करने के बाद राहुल जब सोकर उठा तो घर में काम करने वाली बाई ने अखबार देने के साथ एक लिफ़ाफ़ा भी उसको दिया। साथ ही माफी मांगते हुए उसने कहा कि रात को आप किस समय घर आये मुझे मालूम ही नहीं पड़ा, वरना यह चिट्ठी रात को ही दे देती। राहुल ने खुशी-खुशी उस लिफाफे को खोलने के साथ बाई को एक कप गर्मागर्म चाय लाने के लिए भेज दिया। लिफाफा खोलते ही राहुल की नज़र उस पत्र पर दौड़ने लगी तो उसी तेजी से उसके चेहरे पर मुस्कान फैल गई। पत्र को पढ़ते-पढ़ते राहुल को ऐसा महसूस होने लगा कि उसका बरसों पुराना ख्वाब अब पूरा होने में देर नहीं। इस पत्र में कनाडा की एक कम्पनी ने राहुल को एक अच्छी नौकरी की पेशकश दी थी। राहुल ने जब से होश संभाला था उसी दिन से उसके मन में एक ही लालसा थी कि चाहे कुछ भी हो जाये मुझे विदेश में जाकर ढ़ेरो डॉलर कमाने हैं। न जाने कैसे उसके मन में यह बात पक्के तौर पर घर कर चुकी थी कि यहां रह कर अपने पिता की दुकान में मेहनत करके भी वो अपने लिये वो सब कुछ नहीं कमा सकता जो कुछ वो अपने जीवन में हासिल करना चाहता है।

राहुल को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि इतनी बड़ी खुशखबरी में किसको शरीक करे। जैसे ही काम वाली बाई चाय की ट्रे लेकर आई तो राहुल ने सबसे पहले अपनी खुशी का इजहार उससे किया। लेकिन राहुल को हैरानी उस समय हुई जब उसने देखा कि इतनी बड़ी खबर सुनने के बाद भी उसके चेहरे के हाव-भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ। मुबारक देना तो दूर उल्टा बाई ने राहुल से कहा कि भगवान का दिया हुआ सब कुछ तो तुम्हारे पास है। अच्छा घर, गाड़ी और सबसे बड़ी चीज तुम्हारे मां-बाप तुम्हारे साथ है। फिर भी तुम यह सब कुछ छोड़ कर दूर परदेस में जाने की बात क्यूं सोच रहे हो? राहुल ने नाराज़ होते हुए कहा कि तुम तो ठहरी अनपढ़। तुम क्या जानो कि दुनिया क्या होती है? मैं अपनी सारी जिंदगी अपने पिता की तरह उस दुकान पर नहीं गुजार सकता। अपने लिये कुछ भी लेना हो तो महीनों भिखारियों की तरह गिड़गिड़ाना पड़ता है। न तो दोस्तों के साथ कहीं घूमने जा सकते हैं और न ही कोई मौजमस्ती कर सकते हैं। बस सारा दिन सड़े-गले फल और सब्जियों के बीच अपनी जिंदगी भी खत्म करते रहो। जरा-सी कोई गलती हो जाये तो कई दिनों तक गालियां सुननी पड़ती है।

राहुल के मन की निराशा को अच्छे से भांपते हुए बाई ने कहा कि बच्चे जब कभी भी कोई गलती करते हैं तो मां-बाप उन्हें गुस्सा करते हुए जरूर कई बार कुछ बुरा भला कह देते हैं, लेकिन यह सब उनकी जुबां पर होता है। उनके मन में कुछ नहीं होता। मां-बाप अपने बच्चों से कभी नाराज हो ही नहीं सकते। अभी तक तुम सिर्फ अपने लिये सोच रहे हो। क्या तुमने एक बार भी सोचा है कि हमें उनके बारे में भी कुछ करना चाहिये जिन्होंने हमें पाल-पास कर इतना बड़ा किया है। यही जज्बा हमें जिंदगी से असल प्यार का मतलब समझाता है। बेटा एक बात कभी मत भूलना कि हमारे रिश्ते होते हैं प्यार करने के लिये, पैसा होता है उपयोग करने के लिये, लेकिन मुझे अफसोस है कि तुम्हारे जैसे बच्चे प्यार तो पैसे से करने लगते हैं और रिश्तों का उपयोग अपने स्वार्थ के लिये करना शुरू कर देते हैं। भगवान की नज़र में भी वो इंसान बड़ा नहीं है जो करोड़ों रुपये कमाता है, बल्कि वो इंसान बड़ा है जो करोड़ों न सही कुछ लोगों का ही दिल जीतने में कामयाब हो जाता है। राहुल तुम मेरे बच्चों की तरह हो, इसलिये तुमसे कह रही हूं कि जब कभी हमारी जेब खाली होती है तो वो हमें बहुत कुछ नया सिखाती है, परंतु जब जेब में जरूरत से अधिक पैसे आ जाये तो अपने साथ हजारों बुराईयों को लेकर आती है। इसलिये घर छोड़ने से पहले जो भी फैसला करना बहुत सोच-समझ कर करना।

बाई की यह सारी बातें राहुल को जहर की तरह लग रही थी। उसने उबलते हुए कहा कि अब मुझे तुम जैसे नौकरों से यह सीखना पड़ेगा कि मुझे अपना भविष्य बनाने के लिये क्या करना चाहिये और क्या नहीं? इससे पहले कि राहुल बाई को कुछ और अपशब्द कहता उसकी मां घर के अंदर दाखिल हुई। राहुल की सारी बातें सुनने के बाद उन्होंने अपने बेटे से कहा कि तुम तो काफी पढ़े-लिखे हो, फिर भी तुम इस प्रकार की भाषा का प्रयोग कैसे कर रहे हो। तुम्हें क्या यह भी बताने की जरूरत है कि हमें सदैव यह ध्यान रखना चाहिये कि जो कुछ हम बोल रहे हैं उसका सामने वाले व्यक्ति पर क्या प्रभाव होगा। हमें कभी भी उन शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिये जो हम नहीं चाहते कि दूसरे हमारे लिये करें। तुम शायद यह भूल रहे हो कि इसी बाई ने अपने बच्चों की परवाह न करके तुम्हें इतना बड़ा किया है।

अब तुम इतने बड़े हो चुके हो कि मैं तुम्हें जबरदस्ती तो अपने पास नहीं रख सकती, लेकिन जहां कहीं भी रहो मेरी एक बात सदा याद रखना कि अपने दुश्मन को हजार मौके दो कि वो तुम्हारा दोस्त बन सके, लेकिन अपने करीबी को कभी भी एक भी मौका मत देना कि वो तुम्हारा दुश्मन बन सके। बेटा जिस दिन घरवालों से दूर जाओगे उस दिन तुम महसूस करोगे कि मां-बाप का प्यार उस नमक की तरह होता है, जो हमारे खाने में तो रहता है परंतु दिखाई नहीं देता। लेकिन जब कभी यह खाने में न हो तो उस दिन उसकी बहुत कमी महसूस होती है। राहुल की माताजी की प्रेरणादायक बातें सुन कर जौली अंकल युवाओं को इतना ही सलाह देते हैं कि मां-बाप के प्यार को ठुकरा कर आप चाहे कितनी भी दौलत कमा लो वो कागज़ के टुकड़ों से बढ़कर कुछ नहीं हो सकते। ऐसा व्यापार जो सिर्फ पैसे बनाता है और रिश्तों को खत्म करता है वो और कुछ नहीं एक घटिया व्यापार है।

ये कहानी ‘कहानियां जो राह दिखाएं’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं

Kahaniyan Jo Raah Dikhaye : (कहानियां जो राह दिखाएं)