imandari
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एक बार एक अमीर व्यक्ति अपनी मोटरकार में बैठकर कहीं जा रहा था। उसका रुपयों से भरा थैला रास्ते में कहीं गिर गया। वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे, इतने में उसने देखा कि एक बालक उसकी ओर दौड़ा चला आ रहा है। उसने अपने चालक को मोटर रोकने के लिए कहा। बालक ने उसे उसका थैला लौटाते हुए कहा कि आपका यह थैला रास्ते में गिर गया था।

कहकर वह जैसे दौड़ता हुआ आया था, वैसे ही दौड़ता हुआ चला गया। अमीर ने देखा कि थैले में एक भी रुपया कम नहीं था। उसने बालक को उसकी ईमानदारी के लिए पुरस्कृत करने का विचार बनाया। वह स्कूल पहुँच गया और प्रधानाचार्य से मिलकर अपनी इच्छा जाहिर की।

प्रधानाचार्य ने पूरे स्कूल में घोषणा करवा दी कि जिस बालक ने यह नेक काम किया है, वह उनके कार्यालय में आए। लेकिन बहुत देर तक जब कोई छात्र वहाँ नहीं पहुँचा, तो अमीर इनाम की राशि प्रधानाचार्य के सुपुर्द करके चला गया कि जब वह बालक मिल जाए यह पैसा उसे सौंप दें। अगले दिन, प्रधानाचार्य ने जब अपने कार्यालय का दरवाजा खोला तो वहाँ पर एक पर्चा मिला, जिस पर अनुरोध किया गया था कि इस राशि को गरीब छात्रें के लिए बने कोश में जमा कर दिया जाए।

ये कहानी ‘इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंIndradhanushi Prerak Prasang (इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग)