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Hindi kahani - माँ को मिली नई पहचान
Laut Aao Maa

Hindi Kahani : ऊपर वाले कमरे से जोर की आवाज़ आ रही थी। आज फिर से ओजस्वी ने अपने पापा को कहते सुना, ” एक मामूली हाउसवाइफ हो तुम. तुम्हे क्या पता कि कामकाजी इंसान के ज़िन्दगी में कितनी व्यस्तता होती है. तुम्हे तो दिनभर खा कर घर मे ही पड़े रहना होता है। तुम क्या जानो पैसे कमाने में कितनी मेहनत करनी होती है”.  माँ हमेशा की तरह चुप थी और ओजस्वी हतप्रभ।

“माँ, पापा के किसी बात का जवाब क्यों नहीं देती”? वह सोचने लगी।

लॉक डाउन के वज़ह से स्कूल के सारे क्लासेज ऑनलाइन ही चल रहे थे. घर के बाकि कामकाजी लोग भी ज्यादातर वक़्त घर पर ही बिता रहे थे , पर, कोई भी किचन में माँ की मदद नहीं कर रहा था।  सारा दिन उसकी मां किचन में काम करती । दिन से रात तक वह भाग-भाग कर सबकी फ़रमाइश पूरी करती पर किसी को भी उसके काम की कद्र न थी।  आज जब फिर से उसके पापा, माँ पर गुस्सा कर रहे तो ओवी का मन खिन्न हो उठा. वह सोचने लगी कि ऐसा क्या करूँ कि सबके दिल मे माँ के काम के प्रति इज़्ज़त का भाव आये।

वह सोच में पड़ गई। तभी, उसे एक आईडिया आया।   वह लपक कर अपने कमरे में गयी और अलमारी से अपना कैमरा निकाल कर ले आयी. उस दिन वह सारा दिन यूट्यूब पर कुछ सर्च कर रही थी. शाम तक सारा काम निपटाने के बाद रात में वह जल्दी सो गई। कल से उसे अपने  काम पर जो लगना था।

अगली सुबह वह माँ के जागने के साथ ही जग गयी. किचन में माँ जो भी पका रही थी, उसने कैमरे में उसकी रेकॉर्डिंग करना शुरू कर दिया. माँ ने पूछा तो उसने जबाब दिया, “स्कूल के कूकरी कॉम्पिटिशन के लिए रिकॉर्ड कर रही हूँ, ताकि उस वक़्त मुझे और मेरी सहेलियों को इससे मदद मिल पाए। आप बस सारे सामग्री और तरीके को भी साथ मे बताती जाओ।” मां ने ऐसा ही करना शुरू किया।

अब यह रोज़ का काम होने लगा ।  वह किचन में मां के साथ रहती , सारे डिशेज़ रिकॉर्ड करती और बाद में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद फ़ोन में कुछ करती रहती. इस तरह दिन बीतने लगे. ओवी के साथ समय बिताने से माँ अब थोड़ी खुश-सी रहने लगी थी. एक माह बीतने को था. आज मदर्स डे था. ओजस्वी  ने कुछ खास करने को सोचा. अपने आस-पास रहने वाले दोस्तों की मदद से उसने पूरे हॉल को अच्छे से सजाया। उसके बाद कमरे की लाइट बंद कर दी।

आज सुबह से ही ओजस्वी  मां को कहीं नजर नहीं आई. उन्हें फिक्र होने लगी।  उन्होंने जल्दी-जल्दी से काम निपटा कर उसे ढूंढना शुरू किया. नीचे के सारे कमरे में जब वो नही दिखी तो माँ के कदम ऊपर हॉल के तरफ बढ़ चले।दरवाज़ा खुला था।  अंदर घुप्प अंधेरा था. उसने आवाज़ लगाई “ओजस्वी  , ओजस्वी  , कहाँ है तू?”

तभी कमरे की लाइट जल पड़ी।  ओजस्वी की आवाज़ आयी “हैप्पी मदर्स डे , माँ। लव यू सो मच।  ” हाल में तालियों की गूंज सुनकर उन्होंने नज़रे दौड़ाई तो सामने घर के सारे लोग और कुछ पड़ोसी भी मौजूद थे।

उसने एक गिफ्ट अपनी मां की और बढ़ाया, “इसे खोल कर देखो”. माँ आश्चर्य में पड़ गई. “बाद में देखती हूँ न”। “नहीं , अभी खोलो” , ओजस्वी  ने ज़िद किया। “ठीक है”।

जैसे ही उन्होंने गिफ्ट का रैपर हटाया , उपहार को देख उसके रगों में खुशी की लहर दौड़ गयी. अंदर यूट्यूब से आया ‘सिल्वर बटन’ था, जो उसके एक हज़ार सब्सक्राइबर होने पर मिला था. साथ मे ढेर सारी चिठ्ठी और ई-मेल के प्रिंट आउट थे, जिसमे उनकी कुकिंग स्किल की सराहना की गई थी।   उन्होंने चैनल का नाम पढ़ा ” कुक विथ नीलम” ।

उनकी आंखों में आश्चर्य मिश्रित भाव थे. उन्हें यकीन ही नहीं  हो रहा था कि उनकी छोटी सी बिटिया रानी ने कैसे ये सब कर दिया. तभी ओवी ने अनाउंस किया, “लेडीज एंड जेंटलमैन.. हेयर आई एम प्रेजेंटिंग मिसेज नीलम गुप्ता. द होस्ट ऑफ ‘कुक विथ नीलम’ शो”. सबने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया. वो भाव-विह्वल हो ओजस्वी के गले लग गई।  “भगवान तुझ-सी बेटी सबको दे”।

पहली बार घरवालों के नज़रों में उसके लिए प्रशंसा का भाव था।  ओजस्वी  ने अपने समझदारी से वह कर दिखाया था, जो आजतक घर के बड़ों ने भी करने का नहीं  सोचा था ओजस्वी का हाथ थामे, मां का चेहरा गर्व से दमक रहा था, आखिर आज उनकी बेटी ने उन्हें एक नईपहचान जो दी थी।

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