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अनुभव

गृहलक्ष्मी की कहानियां : नाराज होना पत्नी की हॉबी लिस्ट में टॉप प्रियोरिटी में है। वह किसी बात पर भी नाराज हो सकती है। यथा तुमने नहाने के बाद चमेली का तेल क्यों लगा लिया। खाते समय चप-चप क्यों कर रहे हो। अभी यही हाथ नाक में डाल रहे थे, अब बिना हाथ धोए मेरे नहाने का साबुन छू लिया…वगैरह-वगैरह।

आज पत्नी फिर नाराज है। अब नाराजगी दूर हो तो पता चले कि मामला क्या है। मैं खाने का प्रेमी हूं और वह किचन हड़ताल कर अक्सर मेरे पेट पर प्रहार करती है। इसी हफ्ते वह पहले भी दो बार नाराज हो चुकी है। पहली बार उसने कहा मैं आज खाना नहीं बनाऊंगी। मैंने बैग उठाया और ऑफिस कैंटीन का सहारा लिया। फोन मिलाया। बड़े बेटे ने फोन उठाया। मैंने पूछा कि सबने क्या खाया। उसने बताया- नूडल्स। मैंने कहा- मम्मी से कह देना कि वह भी खा लें, मैंने खा लिया है। अच्छा कहकर उसने फोन काट दिया। तत्क्षण ही घंटी घनघना उठी, ‘क्यों जी, क्या बना गये थे जो कह रहे हो कि खा लेना। 

रात आठ बजे जब घर के लिए निकलने लगा तो सोचा, घर का हालचाल ले लूं। इस बार मैंने छोटे बेटे के मोबाइल पर फोन मिलाया। ‘बेटा, जरा बाहर आओ, जरूरी बात है। छोटा बेटा मेरा फैन है और इस तरह की सिचुवेशन में वह काफी सपोर्ट करता है। मैं फुसफुसाया, ‘क्या बना रही हैं तुम्हारी मम्मी।वह बोला, ‘कुछ कर तो रही हैं किचन में… लेकिन आप फुसफुसा क्यों रहे हैं? ‘ठीक है! तुम मम्मी को मत बताना…।

थोड़ी देर बाद ही मोबाइल की घंटी बज उठी। लगा जैसे बिजली कड़क रही हो, ‘तो तुम अब बच्चों से जासूसी करवाओगे कि खाना बन रहा है कि नहीं। बाहर ही खाना…। मामला और संगीन हो गया। अपने घर में अजनबी की तरह प्रवेश कर, उल्टा सीधा पकाया। खाया। खर्राटे ले रही पत्नी की तरफ से मुंह घुमाकर, अगली खुशनुमा सुबह का इंतजार करते हुए सो गया।

दूसरा वाकया भी सुन लीजिए। मामूली सी बात पर मूड उखड़ गया। किचन में अंधेरा छा गया। फतवा जारी हो गया, यानी ककड़ी के चोर को फांसी की सजा। चाय के साथ खायी सूखी ब्रेड का तसव्वुर करते हुए ऑफिस आ लगा। इस बार मैं फूंक-फूंक कर कदम रख रहा था। घर लौटने से एक घंटा पहले किचन का हाल जानने के लिए शतरंजी चाल चली। पड़ोसी और सबकी मुंह लगी बिटिया लवली को फोन मिलाया, ‘बच्ची, मेरा एक काम कर दो… जरा घर जाकर देखो तुम्हारी आंटी क्या पका रही हैं। लेकिन उन्हें पता नहीं चलना चाहिए कि मैं पूछ रहा हूं। मैंने उसे पट्टी पढ़ाई। लड़कियां सीधी होती हैं और उत्साहित भी, बोली, ‘आप चिन्ता न करें अंकल …मैं कर लूंगी। मुझे उस पर पूरा भरोसा था। समय बीता। उसकी काल आई। ‘अंकल, मटन पका रही हैं। कह रही थीं कि रूमाली रोटी तुम्हारे अंकल से मंगवा लूंगी। मैंने कंफर्म किया, ‘आंटी को शक तो नहीं हुआ? वह बोली, ‘आई एम जीनियस अंकल… बिंदास घर आइये, मटन तैयार है। मटन और वह भी पत्नी के हाथ का…। मैंने काफी देर मुंह नहीं खोला। मुंह में पानी जो भरा हुआ था।

रिलैक्स था कि गुस्सा ठंडा हो गया है। अंकल से रोटी मंगवाने का मतलब साफ था कि मैंने आधी लड़ाई तो जीत ही ली है। वक्त काटना मुश्किल हो रहा था। सोचा रोटियां लेेकर रख लूं। घर पहुंचने में लेट हो गया या बाद में न मिलीं तो? जैसा सोचा, वैसा किया। रोटियां लेकर गाड़ी में डाल दीं और इत्मीनान से पत्नी के फोन का इंतजार करने लगा। घर जाकर बाजार से लाने का नाटक करना पड़ेगा, तो कर लूंगा। पान की दुकान तक जाऊंगा और एक पान दबाऊंगा और लौट आऊंगा। उसे विश्वास हो जाएगा कि मैं ताजातरीन रूमाली लेकर आया हूं। ऑफिस बंद होने का समय हो चला, लेकिन पत्नी का फोन नहीं आया। शंकाओं से घिरा हुआ घर पहुंचा। सीधे बाथरूम में जा समाया। बाहर कुछ चिल्लपों सी सुनाई देने लगी। मामले का सिरा पकडऩे के लिए बाथरूम से बाहर आया। बेटे की आवाज कानों से टकराई, ‘मम्मी मैं अपनी किताब निकालने गया तो कार में ये रूमाली रोटियां मिलीं। पापा को कैसे पता चला कि रोटियां लानी हैं, जबकि उनका मोबाइल ऑफ था। मैंने मोबाइल चेक किया। सचमुच ऑफ था। किचन से आवाजें आ रही थीं, ‘अब तुम घर की बातें मोहल्ले में गाने लगे… एक छोटी बच्ची को मोहरा बनाया… अरे इतना भुक्खड़ पति मैंने कहीं नहीं देखा। सबने नॉनवेज उड़ाया और मैं ब्रेड-बटर। रात को जब सब सो गये तो फ्रिज देखा। सारा का सारा चट गये थे पेटू बच्चे। नींद की गोली खाकर सो गया।

हां, तो मैं बता रहा था कि पत्नी इस बार भी शौकिया नाराज नहीं लगतीं। चलें ऑफिस की कैंटीन का सहारा लें। अब कसम तो नहीं खा सकता कि कभी पता लगाने की कोशिश नहीं करूंगा कि रसोई में क्या बना है… इसलिए क्या आप मेरी कोई मदद कर सकते हैं मुझे पता चल सके कि शाम को पत्नी ने क्या पकाया है?