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Foolish and Ignorant: मुर्ख और अल्पज्ञानी भी हमारा गुरु
Foolish and Ignorant

Foolish and Ignorant: क्या आप इससे सहमत हैं कि आयुर्वेद में जितना महत्व सुगन्धित फूलों का है, उतना ही धतूरे के पत्तों का! जहां एक ओर फूल शरीर को शीतलता प्रदान करता है, वहीं धतूरा बड़े से बड़ा घाव ठीक करने में सहायक होता है। फिर आप इस बात से भी इत्तेफाक रखते होंगे कि एक बुरी घटना और एक मूर्ख व्यक्ति जीवन में गहरा अनुभव दे जाते हैं। यानी कि जीवन में अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोग होने बेहद जरूरी हैं। यूं कहें कि कभी-कभी एक मूर्ख व्यक्ति से आप वो सब सीख पाते हैं जो एक समझदार और बुद्धिमान व्यक्ति आपको कभी नहीं समझा पाता है। ऐसे में किसी मूर्ख व्यक्ति को अपना गुरु मान लेने में कोई बुराई नहीं!
सुनने में आपको थोड़ा अटपटा जरूर लग रहा हो लेकिन महान दार्शनिक अरस्तू का कहना था कि उनका गुरु, मूर्ख है। क्या आप जानना नहीं चाहेंगे कि महान योद्धा सिकंदर के गुरु अरस्तू ने ऐसी अटपटी बात क्यों कही! दरअसल हुआ यूं कि एक बार अरस्तू से किसी विद्वान व्यक्ति ने बड़ी विनम्रता से पूछा, ‘मैं आपके गुरु से मिलना चाहता हूं। बेशक इतने बड़े दार्शनिक का गुरु कोई विशेष व्यक्ति ही होगा। इस पर अरस्तू बोले, ‘आप उनसे नहीं मिल सकते हैं। तब इस पर उस विद्वान ने कहा कि क्या अब वह इस दुनिया में नहीं हैं। इस पर अरस्तू ने क्या कहा! कहा कि ‘दुनिया के सारे मूर्ख मेरे गुरु हैं और वह कभी मरते नहीं हैं।

Foolish and Ignorant: मुर्ख और अल्पज्ञानी भी हमारा गुरु
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फिर उस व्यक्ति ने दोबारा कहा कि ज्ञान अर्जित करने के लिए लोग किसी ज्ञानी व्यक्ति के पास जाते हैं लेकिन आप एक मूर्ख के पास गए। अरस्तू ने उसे समझाते हुए कहा, ‘मैं हमेशा यही मनन करता रहता हूं कि किसी व्यक्ति को उसके किस अवगुण के कारण मूर्ख समझा जाता है। फिर मैं आत्मनिरीक्षण करता हूं कि कहीं यह अवगुण मेरे भीतर तो नहीं है। इस तरह मैं अपनी कमियों को दूर करता आया हूं। तो, बताओ कि गुरु कौन हुआ, ज्ञानी व्यक्ति या फिर मूर्ख। इस पर उस विद्वान ने कहा कि, ‘मैं तो आपके पास इतनी दूर से ज्ञान अर्जित करने आया हूं और आप इस प्रकार कहकर मेरा मनोबल कम कर रहे हैं। जानते हैं इस पर अरस्तू ने क्या कहा कि जीवन को समझने के लिए हमेशा गुरु की आवश्यकता नहीं होती है।
व्यक्ति अपने आत्मनिरीक्षण और आत्मप्रेरणा से ही बहुत कुछ सीख सकता है। विश्वास कीजिए, अरस्तू की ही तरह आप भी किसी अल्पज्ञानी के व्यवहार और उसके चरित्र से अपनी कमियों को दूर कर सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे कि एक गधे से भी आप बहुत कुछ सीख सकते हैं। आचार्य चाणक्य के नीति शास्त्र में भी इसका उल्लेख है। यही कि गधे का जीवन हमें तीन बातें सिखाता है। पहली यह कि व्यक्ति को अपना बोझा ढोना कभी नहीं छोड़ना चाहिए। दूसरी यह कि किसी भी कार्य को करते समय सर्दी, गर्मी और बरसात की चिंता नहीं करनी चाहिए, तीसरी और सबसे प्रमुख बात यह कि जीवन में सदा संतुष्ट रहने का प्रयास करें। उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति के गुण और अज्ञानी के अवगुण आपको एक बेहतर इंसान बनने में मदद करते हैं।


निसंदेह किसी मूर्ख व्यक्ति से मित्रता करना जीवन को जोखिम में डालने जैसा है। तब भी, उससे शिष्ट और विनम्र व्यवहार रखने से आपके व्यक्तित्व में वृद्धि ही होगी। उदाहरण के तौर पर, किसी फिल्म की समीक्षा करने के लिए उसे देखना जरूरी होता है। ठीक वैसे ही, किसी किताब का आकलन करने के लिए उसे पढ़ना पड़ता है। वरना हमें कैसे पता चल पायगा कि वो एक अच्छी या फिर बेहद बुरी किताब है। उसी तरह एक मूर्ख व्यक्ति आपको सिखाता है कि बेवजह हर बात पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं है। अन्यथा लोग आपको भी मूर्ख समझने लगेंगे।
चाणक्य नीति कहती है कि जिस तरह बुद्धिमान को तर्क देकर ही शांत किया जा सकता है, उसी तरह मूर्ख व्यक्ति की हां में हां मिलाने से आप उससे कोई भी काम करवा सकते हैं। और, इसी प्रकार एक मूर्ख, बुद्धिमान की संगत में और बुद्धिमान किसी मूर्ख से परिचय रखकर काफी कुछ सीख सकता है।

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