गाय, बछड़ा और बाघ-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तराखण्ड: Cow and Tiger Story
Cow and Tiger Story

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Cow and Tiger Story: किसी गांव में एक गाय और उसका बछड़ा रहता था। गाय रोज हरी घास चरने जंगल जाया करती थी ताकि उसके बछड़े को दूध मिलता रहे। बछड़े को अधिक दूध पिलाने की इच्छा गाय को दूर-दूर तक जंगल में घास चरने के लिये प्रेरित करती। घास चरते-चरते वह एक दिन बहुत दूर तक निकल गई। चरते-चरते गाय एक बाघ के इलाके तक पहुंच गयी। बाघ की नजर जैसे ही गाय पर पड़ी, वह गाय की तरफ आगे बढ़ा। गाय बाघ को आता देख भयभीत होने लगी, वह बाघ से बोली दाज्यू मुझे जाने दो, घर पर मेरा बछड़ा मेरा इन्तजार कर रहा है। वह भूखा होगा। मुझे जाने दो, मैं वादा करती हूं कि उसे दूध पिलाकर वापस यहां आ जाऊंगी, तब तुम मुझे खा लेना। गाय की बात सुनकर बाघ हंसने लगा और बोला मैं बेवकूफ लगता हूं, यह बातें तुम सिर्फ अपनी जान बचाने के लिए कह रही हो। मुझे भूख लगी है, मैं तुम्हें खाकर रहूगा।

गाय ने बहुत मिन्नतें की, बछड़े की दुहाई दी, पर बाघ नहीं माना। लेकिन गाय निरन्तर मिन्नत करने लगी। आखिर बाघ का मन पसीज गया और उसने गाय को जाने की इजाजत दे दी और कहा अगर तू कल वापस नहीं आयी तो तेरे वहां आकर तुझे और तेरे बछड़े दोनों को खा जाऊंगा।

गाय ने उस समय तो राहत की सांस ली परन्तु जैसे-जैसे वह शहर की तरफ बढ़ती जा रही थी, वह अपने दिये वचन का ख्याल आते ही उदास हुए जा रही थी। आखिरकार गाय घर पहुंची, बछड़ा गाय को देखकर खुश हुआ और दूध पीने लगा, गाय उसे प्यार करती, पुचकारती रही, मां को उदास देखकर बछड़े ने उदासी का कारण पूछा। गाय ने सारी बात बता दी। बछड़े ने पूरी बात ध्यान से सुनी और कुछ देर सोचने के बाद बोला, मां इसमें उदास क्यूं होना हुआ, कल मुझे भी ले के चलना, मैं बाघ मामा को समझा दूंगा।

गाय ने समझा कि बाघ एक जंगली जानवर है और उसमें दया भाव नहीं होता, पर बछड़ा नही माना, गाय के लाख मना करने के बाद भी जब बछड़ा नहीं माना तो गाय ने साथ आने की इजाजत दे दी।

दूसरे दिन गाय और बछड़ा जंगल की तरफ चल दिये। थोड़ी देर में वह बाघ के सामने पहंच गये। अब गाय को अपने बछडे के मारे जाने का भय अधिक सताने लगा। वह विवश थी। गाय बोली बाघ दाज्यू, मैं अपने कहे वचन के मुताबिक आ गई। मुझे खालो और मेरे बछड़े को जाने दो।

इतने में बछड़ा बोला, नहीं बाघ जी आप पहले मुझे खालो।।

गाय, बछड़े को चुप करते हुए बोली, नहीं, नहीं आप मुझे खा लो बछड़े को जाने दो।

नहीं-नहीं कहते हुए बछड़ा बाघ के सामने चला गया।

इतने में बाघ हंसते हुए बोला कि न मै तुझे खाऊंगा न ही तेरी मां को। जो अपने वचन पर अपनी जान की परवाह न करते हुए यहां तक आ गई, उसको मैं क्या हरा पाऊंगा और दूसरी तरफ तू है जो अपनी मां के बदले अपनी जान देने के लिये तैयार है। मुझे खाना होता तो मैं गाय को कल ही खा लेता। मैं तो बस यह देख रहा था कि गाय अपना वचन निभाती है या नहीं।

बाघ ने बछड़े को बहुत प्यार किया और उन दोनों को घर तक छोड़ने भी गया।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’