hath yogi ka mukti prasang
hath yogi ka mukti prasang

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

एक गांव के करीब जंगल में एक योगी योग साधना में हमेशा लीन रहता था। वह स्वभाव से गुस्सैल स्वभाव का था इसलिए उसने निर्णय किया कि इस गुस्से को शांत करने के लिए हठ योग किया जाए। उसने सोचा, शेर, बाघ और चीते जैसे क्रूर प्राणियों के चमड़े से बने आसन पर बैठने से मेरा मन शांत नहीं होगा और मैं अच्छी तरह ध्यान मग्न नहीं हो पाऊंगा और इससे मेरे मन में और क्रोध उत्पन्न होगा, यह सोच कर वह सात्विक प्रकृति वाले प्राणी अर्थात् गाय के चमड़े से बने आसन पर बैठ कर अपनी योग साधना में लीन रहता।

एक दिन उस योगी की आज्ञा के बिना एक चूहे ने उसके योग स्थान पर प्रवेश किया। इतना ही नहीं उस चूहे ने योगी के आसन को कुरेद-कुरेद कर खाया जिससे आसन छिद्र-छिद्र हो गया। यह देख योगी आहत हुआ और उसने अपने लिए नया आसन बनाने का निर्णय लिया और गांव के चमार को बुला कर, उसे गाय के चमड़े का ही आसन बनाने का आदेश दिया। चमार ने डरते हुए कहा कि “आस-पास के दस गांवों में देख आया, चमड़े के लिए एक भी गाय उपलब्ध नहीं है। मेरे पास शेर, चीता, भालू आदि का चमड़ा तो उपलब्ध है लेकिन गाय का नहीं। जब गाय का चमड़ा उपलब्ध होगा मैं बना दूंगा।”

अगले ही हफ्ते पता चला कि किसी किसान की गाय रोगग्रस्त होकर मर गयी जिसके चमड़े का उपयोग एक बछड़े को मातृत्व का अनुभव दिलाने के लिए किया जा रहा है, जिसकी माँ उसको जनते हुए मर गयी थी। वह बछड़ा अपनी माँ की याद में कराहता रहता है, यह चमडा उस पर लादने के बाद ही वह दूध पीता है।

चमार की बात सुनकर योगी की आंखें लाल हो गयीं। उसको इस बात पर गुस्सा आया कि एक बछड़ा उसकी योग साधना से अधिक महत्त्वपूर्ण हो गया। योगी चमार के साथ किसान के पास गया और उसे चमड़ा देने का आदेश दिया। किसान ने बताया कि यदि चमड़ा योगी को दे दिया जाए तो बछड़ा मर जाएगा। इस पर क्रोधित होते हुए योगी ने किसान को मारने के लिए हाथ उठाते हुए कहा- “हठयोगी के योग भंग करने का दुस्साहस करता है मूर्ख, या तो यह चमड़ा मुझे दे दे या मेरा शाप ग्रहण कर।” इतना कहते-कहते उसे इतना क्रोध आया कि उसके दिमाग की नसें फट गयीं और वह वहीं गिर कर मर गया। फिर किसान और चमार दोनों ने मिलकर उस योगी की अंत्य क्रिया संपन्न की और उस योगी की सद्गति की प्रार्थना की और अपने-अपने काम पर लौट गए।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’