Hindi Story: क्या एक हफ़्ता लगेगा ??
“जी सर सॉफ्टवेयर में प्रॉब्लम्स आ गयी है, पुर्ज़ा आने में टाइम लगेगा…”
दुकानदार के इस वाक्य को सुनते ही विनोद को अपना दिल मुट्ठी में भिंचता सा लगा।
तेज पसीना निकला और वह वहीं बेहोश हो गया ,निहारिका उसे लोगों की सहायता से कार में डालकर घर ले गईं।
सदमा बड़ा था ,समस्या गम्भीर …
डॉक्टर नींद का इंजेक्शन देकर चला गया,वह भी कुर्सी पर बैठकर ऊँघने लगी
कि कानों में “वॉव….थ्री के शेयर्स ,ये वन मिलियन तक जाएगी ,आई बेट…”की आवाज़ पड़ी।
इंजेक्शन के असर में भी मिस्टर विनोद कपूर के चेहरे पर बालसुलभ मुस्कान थी.
उनका बायाँ हाथ बन्द आँखों के सामने इस मुद्रा में था मानो उन्होंने कुछ पकड़ रखा है और दायें हाथ का उँगली अँगूठा बड़ी चपलता से हवा में थिरक रहा था।
“आहा ….मेरी मोस्ट वायरल वीडियो ,अरे ये तो एक लाख सब्सक्राइबर पार कर गया ,यूट्यूब से सिल्वर प्ले बटन को मैंने हासिल कर लिया।”
उनकी बच्चों जैसी किलकारी से , धीमी रोशनी में नहाया सर्वसुविधायुक्त कस्टमाइज़ बेडरूम गूँज उठा ,पर उनकी पत्नी निहारिका का दिल घबरा उठा…
अभी तो मात्र दो घण्टे ही हुए हैं और बिना फ़ोन के इनकी हालत कितनी खराब हो गयी है ,ऐसे ततड़प रहे हैं जैसे जल बिन मछली,राम जाने हफ़्ता कैसे कटेगा।
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पति की इस हालत को देखकर उसका कलेजा मुँह को आ गया जब से उनका मोबाइल फ़ोन रिपेयरिंग को गया था ,तब से उनकी ऐसी ही हालत हो गयी थी।
पहली बार वो बिना सेल्फ़ी लिए बिना रील बनाये इतनी देर रुके हैं अभी तो हफ़्ता भर बाकी है।
यूँ भी वो मोबाइल के आँखों से ओझल होते ही बुरी तरह बेचैन हो जाते ,वाई-फाई खराब हो या डेटा न चले तो उन्हें पसीने आने लगते धड़कन बढ़ जाया करती ।
घर मे राशन भले कम हो पर पावर बैंक का स्टॉक पूरा रहता था।विनोद ने पूरे घर की दीवालों को फेसबुक, इंस्टाग्राम,व्हाट्सएप और अन्य ऐप्प के डिजायनों से सजवाया था।
दरवाज़ों पर नेमप्लेट भी बड़ी अजीब सी लगवाई थी।
रसोईघर पॉवर बैंक था तो डाइनिंग रूम बैटरी,बैडरूम के बाहर इंस्टाग्राम ओनली मी का स्टिकर था तो बैठक की दीवारें फेसबुक के डिजाइन से सजवाई थीं
जब पहली बार जब उन्हें यह दौरा पड़ा था तो निहारिका ने उन्हें हॉस्पिटल दिखाया था,पर डॉक्टर से इसे डिप्रेशन कहकर भेज दिया।
दवाई विनोद ने कूड़ेदान में डाल दीं जब अगले दिन हालात ज्यादा बिगड़े तो छुपा न रह सका।
पड़ोसन ने इसे उसे भूत-प्रेत का साया समझा , और उनके घर काम करने वाली गंगूबाई ने गम्भीर स्वर में कहा….
“मेमसाब भाऊ को बड़ा वाला दौरा पड़ेला है, इनको डेटा वाले बाबा के आश्रम ले जाने का ….
उधर मेडिटेशन होएंगा तो साब एक दम अच्छा हो जायेंगा,पन उधर चढ़ावे में आई फ़ोन चढ़ाने को माँगता…वी आई पी पेशेन्ट को…”
वो भटनागर मैडम उधरिच जाती है ,अब साब सवेरे उधर मेडिटेशन के वास्ते जाता दोनों लोग फ़ोन को हाथ भी नहीं लगाता।
निहारिका अपने पति की तकलीफ़ उसकी तड़प को शिद्दत से महसूस कर रही थी,मोबाइल के बिना तो विनोद साँस भी नहीं लेते ….
अगर उनका फोन रिपेयरिंग को न गया होता तो उनकी ऐसी हालत क्यों होती, उसने भरी आँखों से सोचा
और गंगूबाई के साथ जाने को हामी भर दी उधर,ये सोचकर कि शायद पति की मोबाइल की लत को कुछ आराम मिले।
पर डॉक्टर की चेतावनी याद आ गयी कि भूले से भी सात दिन उनके सामने घर मे किसी को फ़ोन नहीं दिखाना या चलाना है।
आश्रम गयी ,परन्तु पता चला कि बाबाजी पहले ऑनलाईन पेमेंट जमा करवाते हैं और सारे ध्यान के सेशन बाद में मिलते हैं।
उसने छुपकर महँगा पेमेंट कर ऑनलाइन रसीद प्राप्त कर ली थी और कुछ राहत महसूस कर रही थी।
काउण्टर पर गेरुआ बिजनेस सूट में रँगबिरंगी ज़ुल्फों वाली सेल्फ़ी लेती एक आश्रम के स्टाफ की ने पूछा
जी …क्या परेशानी है आपको देवी…
साध्वी जी…निहारिका ने हिचकिचाहट भरे स्वर में कहा…
सी…आप मुझे होप कह सकती हैं …मेरी हर सोशल साइट पर आई डी इसी नाम से है..
आपका रजिस्ट्रेशन हो गया है ,
जी…
तो फिर प्रॉब्लम बताइये हमारे यहाँ मेडिकल से लेकर मेडिटेशन का कंपलीट पैकेज है ,गुरुजी की ब्रान्च देश विदेश तक फैली हैं ,उसने गर्व से कहा।
आप मेरी आई डी को और जल्दी से मोबाइल छुपा दिया।
और बोली आश्रम में पर्सनल फ़ोन चलाना मना हैं अभी ,आपके हसबैंड साथ आये हैं
जी वो उधर बैठे हैं ,निहारिका ने विनोद की तरफ़ इशारा करते हुए कहा।
“देखिये आप सही जगह आई है ,और कोई उपाय नहीं मिसेज कपूर आपके पति को बहुत गम्भीर समस्या है,इन्हें मीडिया डिटॉक्स थेरेपी ही देनी पड़ेगी…”
मतलब ?
मतलब ये कि आप ये टोकन लेकर उस सामने वाले चेम्बर में चली जाइये ..
जी कहकर निहारिका उधर चली गयी,सामने उसके कई स्वामी जैसे लोग बैठे हुए थे ।
उनमें से एक ने निहारिका की दी फ़ाइल और टोकन को देखकर गम्भीर स्वर में कहा।
इन्हें मोबाइल का दर्शन भी मत कराइये ,इन्हें मोबाइलाजीर्ण हुआ है।
मतलब,ये कैसी विचित्र बीमारी है ये
देखिये जिस तरह ऊलजलूल खाने से हमें कब्ज़ या अजीर्ण हो जाता है, तो उसे दूर करने के लिये मरीज को लंघन अर्थात व्रत उपवास करवाया जाता है
उसी तरह आपके पति को भी एक दिन मोबाइल व्रत करना पड़ेगा स्वामी जी गम्भीरता से बोले।
जी हाँ आजकल मीडिया डिटॉक्स भी ज़रूरी है, एक जनरल फिजिशियन ने अपनी राय दी।
कैसे होगा गुरुजी ,यह तो मोबाईल के बिना एक कदम नहीं रखते,निहारिका ने कहा।
यहाँतक कि मेरे घर में भी दीवारों पर सोशल मीडिया के एप की डिजाइन बनी है और रसोईघर में बैटरी की।
बचा लीजिये मेरे सुहाग को किसी तरह ,मिसेज कपूर ने रोकर कहा।
“हम अपना काम कर रहे हैं ” क्या हम मरीज को देख सकते हैं।
जी वो सामने ही बैठे हैं,पर मैंने उन्हें यह कहा है कि मैं अपनी दवा लेने आई हूँ,उन्होंने मायूसी से कहा।
डोंट वरी हम उन्हें पता नहीं लगने देंगे, उन्होंने शीशे के पार सामने नज़र डालते हुए कहा।
मिस्टर कपूर का व्यक्तित्व तो बड़ा शानदार था ,पर कॉरिडोर में चक्कर लगाते स्टॉफ ने उनके मुँह से शब्दों के नाम पर लाइक,शेयर ,कमेन्ट,हैशटैग पेज हर तीसरे वाक्य में सुना।
वो हड़बड़ाए से अन्दर आये और बोले ,कि इन्हें मेडिटेशन की भी ज़रूरत है,मीडिया डिटॉक्स ,आई मीन मोबाइल का व्रत बहुत ज़रूरी है इनके लिये।
पर ये इतने सीरियस हैं कि यहाँ भर्ती करना पड़ेगा ऑनलाइन सेशन नहीं मिल पायेगा ।
ये ठीक हो जायेंगे?
डॉक्टर -आप भगवान को मानती हैं,
जी हाँ,निहारिका ने कहा।
तो गुरुजी भगवान ही हैं ,वो मीठे स्वर में बोले
पर रात भर में तो इनकी हालत इतनी बिगड़ गयी ,यहाँ फोन न दिखा तो कैसे होगा ये निर्मोबाईल व्रत उसने चिंतित स्वर में कहा।
मैडम अगर ये निर्मोबाइल नहीं रख सकते तो फिर दूसरा उपाय भी है ।
सेमी-निर्मोबाइल ….
जिस तरह सामान्य व्रत में फलाहार करते हैं ठीक उस तरह सुबह व्हाट्सएप,दोपहर फेसबुक शाम को इंस्टाग्राम और रात को दस मिनट तक यूट्यूब की डेटाहार की सुविधा मिलेगी पर शुल्क प्रीमियम ही होता है उसका।
अगर गम्भीर पेशेंट ने पहले ही दिन सफलतापूर्वक एक निर्मोबाइल व्रत कर लिया तो उसे अगले दिन पन्द्रह मिनट का डेटॉल मिलेगा,
अगर उसके बाद फिर निर्मोबाइल व्रत किया तो उसके अगले दिन एक घंटे का समय मिलेगा ।
डेटॉल उसने हैरत से कहा..
जी हाँ ,जैसे कैदी को अच्छे व्यवहार पर पैरोल मिलती हैं ,वैसे ही आश्रम मरीज़ को डेटॉल प्रदान करता है,इससे साधक जल्दी और आसानी से सोशलमीडिया से डिटॉक्स होना सीखते है…
इतने आकर्षक पैकेज की बात से भी उसे कुछ संशय तो था पर क्या करती और कोई रास्ता भी न था सामने…
मरता क्या न करता ,निहारिका ,हाँ कह शुल्क का भुगतान कर,विनोद को भर्ती करवाकर गेस्टरूम में गंगूबाई के साथ आराम करने चली गयी ।
आश्रम में विनोद जैसे गम्भीर मरीजों को हॉल में निर्मोबाइल व्रत के साथ-साथ दिन में चार बार डेटाहार भी करवाया गया।
उसके अगले सफलतापूर्वक निर्मोबाइल व्रत के बाद अगले दिन उन्हें पन्द्रह मिनट के डेटॉल की आज़ादी भी मिली।
पर विनोद ने उस समय का अपने लिये उपयोग करने से मना कर दिया…
आश्रम का यह सफलतम प्रयोग माना गया और चौथे दिन विनोद को एक घण्टे का डेटॉल का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ।
निहारिका को वह पूरी तरह स्वस्थ लग रहा था,वह डिस्चार्ज पेपर बनवाने के लिये गयी…
पर यह क्या कोई सिस्टम उसकी एंट्री स्वीकार नहीं कर पा रहा था।
आश्रम की सुविधाओं पर पन्द्रह मिनट में ही अन्तर स्पष्ट दिखने लगा।आधे घण्टे में तो गुरुजी भी परेशान दिखने लगे…
सुदृढ़ व्यवस्था डगमगा चुकी थी ,साधक आईफ़ोन हाथ में थामे लम्बी लाइन में लगे थे
थोड़ी देर में विनोद निहारिका को खोजते हुए आया,और भीड़ चीरते हुए गुरुजी के पास पहुँच गया।
क्या हुआ क्या सर्वर डाउन है ,उसने पूछा
पता नहीं,
लाओ कीबोर्ड दो और विनोद ने चुटकी में मामला यूँ सुधारा की मानो कुछ हुआ ही न हो,
निहारिका -ओह तो तुम ठीक नहीं हो यह क्या था
विनोद -आश्रम का सॉफ्टवेयर हैक किया था
पर…. पासवर्ड कैसे मिला?
विनोद- आश्रम से उपहार में मिले आईफ़ोन को दिखाकर यहाँ के हेड को पेज की रीच बढ़ाने के गुर सिखाये हैं।
