चश्मा लगाने से पहले अजय ने अपनी पॉकेट से वह खाका निकाला, जो उसने आज ही बनवाया था। खाका बंगले के तहखाने में जाने का रास्ता बताता था, किधर कैसे मुड़ना है, कहां रुकना है, कहां बटन दबाना है और कैसे अंदर जाकर फिर बटन दबाते हुए दरवाजा बंद करना है।

अजय अपने साथियों को सारी बातें समझाने के लिए एक अलग तथा सुरक्षित स्थान पर ले गया, क्योंकि वह थोड़ा समय भी नष्ट करना चाहता था।

चन्दानी के यहां वह छह की बजा साढ़े छह बजे तक पहुंचना चाहता था, ताकि उस समय तक सभी मेहमान पार्टी में पहुंच जाएं।

चन्दानी समय का बहुत पाबंद था, इसलिए उसके साथियों को भी पाबंदी बरतनी पड़ती थी। जो समय का पाबंद नहीं होता, उसे इसका ठोस कारण बताना पड़ता था। यदि चन्दानी संतुष्ट हो जाता तो ठीक, वर्ना वह अपने कार्यकर्ताओं को कोड़े से सजा दिए बिना नहीं रहता था।

सारी बातें अपने साथियों को समझाने के बाद अजय ने आंखों पर चश्मा चढ़ाया और ड्राइवर को अपनी मंजिल की ओर बढ़ने का आदेश दिया।

ड्राइवर ने कार चन्दानी के बंगले में प्रविष्ट की अजय के इशारे पर कार बंगले में रुकी।

बंगले के लॉन में इस ओर कुछेक व्यक्ति बहुत भेद भरे ढंग में छोटा-मोटा काम कर रहे थे। कोई फूल के गमले हटा-बढ़ा रहा था तो कोई ‘लॉन मोवर’ द्वारा लॉन की घास कतर रहा था।

अजय कार से नीचे उतरा। दो व्यक्तियों ने उसकी बांहें पकड़ीं। तीसरा व्यक्ति कार लेकर बंगले से बाहर निकल गया।

बंगले के लॉन में काम करते व्यक्तियों ने अजय तथा उसके साथ दो व्यक्तियों को देखा, परंतु कोई संदेह नहीं कर सका, क्योंकि उनका बॉस कब और किसको अपने आदमी इस प्रकार लाने के लिए भेजता है, कोई नहीं जानता था। आज पार्टी में शाम से इस प्रकार उनके बॉस के अनेक मेहमान आ चुके थे।

दोनों व्यक्तियों के साथ दो पग बाद अजय ने तीन सीढ़ियां पार कीं तो छोटे से बरामदे के बाद वह एक चौड़ी गैलरी में पहुंच गए। कुछ दूर चलकर वे बाएं मुड़े। कुछ पगों बाद रुके।

उनके दाहिनी तथा बाईं दोनों ही ओर गैलरी जाती थी, परंतु वे किसी ओर नहीं मुड़े। सामने दीवार पर एक बड़ी फ्रेमदार तस्वीर जड़ी हुई थी, एक उकाब की तस्वीर।

एक व्यक्ति ने अजय को छोड़कर उकाब की आंख पर अंगूठा रखकर दबाया। यह एक बटन था। दीवार में पत्थर का दरवाजा खुला, एक स्वर उत्पन्न हुआ चूं….ऊं…ऊं। वे अंदप्रविष्ट हुए।

अंदर से दरवाजा बंद करने के लिए एक साधारण बटन था। दरवाजा खुला तो पार्टी की चहल-पहल का शोर कानों में आ पहुंचा। दरवाजा बंद करने के बाद वे सीढ़ियां नीचे उतरे।

तहखाने के अंदर रेडियोग्राम की धुन बज रही थी, परंतु इस धुन में कभी-कभी चीतों का कर्कश स्वर भी सम्मिलित हो जाता था।

अजय ने महसूस किया, ये चीते मानो सदैव भूखे रहते हैं, मानव के मांस के लिए। अन्य मांस खाने से इनका पेट नहीं भरता।

चन्दानी कुछ दूर पर खड़ा जॉनसन से बातें कर रहा था। इस समय दोनों के ही हाथों में शराब के जाम थे। अजय ने अंधों के समान अपने साथियों का सहारा लेकर चलते हुए कनखियों से इधर-उधर देखा।

आज चन्दानी के लगभग सभी व्यक्ति उपस्थित थे, लड़कियां भी और पुरुष भी। लगभग सभी के हाथों में जाम थे। बाहर के संसार से निश्चिंत वे ठहाके लगाकर इस पार्टी का आनंद उठा रहे थे। रंधीर ने तो केवल लड़कियों का साथ ही ले रखा था। अजय ने चन्दानी के सामने खड़े होकर अपना चश्मा उतार दिया।

चन्दानी ने एक ही घूंट में अपना जाम समाप्त किया और अजय की ओर पलटा। यहां की पार्टी में जो भी आता था, उसे सबसे पहले चन्दानी के सामने अपनेआपको उपस्थित करना पड़ता था।

अजय के साथी उसे छोड़कर उसके दोनों ओर एक अच्छी दूरी लेकर खड़े हो गए। चन्दानी ने अजय की बजा उन दोनों व्यक्तियों को देखा।

उसने अपने मस्तक को एक झटका दिया। कहीं उसने अधिक तो नहीं पी है? उसने तो अजय को यहां लाने के लिए बादल का ग्रुप भेजा था। उसे दाल में काला दिखाई पड़ा। अजय तथा उसके मध्य यूं भी तनाव है।

अपना भ्रम मिटाने के लिए उसने तुरंत अपनी पॉकेट से रिवॉल्वर निकालना चाहा, परंतु अजय सतर्क था। उसने बिजली की फ़ुर्ती के समान अपनी पॉकेट से रिवॉल्वर निकाला और हवा में चला दिया।

चन्दानी की रिवॉल्वर उसके हाथ में आ चुकी थी, परंतु अजय का निशाना अचूक था। चन्दानी की रिवॉल्वर उसके हाथ से छूटकर दूर जा गिरी।

अजय के दोनों साथियों के लिए यह एक बहुत बड़ा इशारा था। वे तुरंत लपककर चन्दानी के दोनों ओर खड़े हो गए। अपना रिवॉल्वर उन्होंने चन्दानी की कनपटी पर लगा दिया।

पलक झपकते ही यह सब ऐसा हुआ, जिसकी किसी को भी आशा नहीं थी। सभी चौंक गए, परंतु जब संभलकर चन्दानी के व्यक्तियों ने अपना रिवॉल्वर तथा चाकू निकालना चाहा तो अजय एक ओर दीवार से सटते हुए सबको रिवॉल्वर दिखाता चीख पड़ा, ‘खबरदार! तुममें से किसी व्यक्ति ने कोई भी चालाकी की तो चन्दानी को जिंदा नहीं देखोगे।’

चन्दानी की सांस जहां की तहां रुक गई।

अजय आगे बढ़ा। झुककर उसने चन्दानी की फर्श पर पड़ी रिवॉल्वर उठा ली। इसके बाद उसने दीवार पर टंगी दो बंदूकें उठाईं। उनकी गोलियां चैक कीं। फिर अपने आदमियों को एक-एक बंदूक थमा दी।

उसके आदमियों ने अपना रिवॉल्वर जेब में रख लिया। एक व्यक्ति ने चन्दानी की पीठ पर बंदूक रख दी। दूसरा व्यक्ति कुछ दूर हटकर अन्य व्यक्तियों के आक्रमण के लिए सतर्क हो गया।

अजय कोठरी नंबर पांच की ओर बढ़ा।

जारी…

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