दुनिया के लिए तनाव बना अल्जाइमर रोग, इस 'मसाले' के कारण हो रहा भारतीयों का 'बचाव': World Alzheimer's Day
World Alzheimer's Day

World Alzheimer’s Day: अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में दुनियाभर के लोग आज भी ज्यादा नहीं जानते। हालांकि बीते कुछ सालों में इस रोग से पीड़ित होने वालों की संख्या बढ़ी है। इस रोग की रोकथाम और निदान के विषय में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस का आयोजन किया जाता है। इस साल इस खास दिन की थीम है ‘नेवर टू अर्ली, नेवर टू लेट’ । दुनियाभर के उम्रदराज लोगों में यह रोग तेजी से फैल रहा है, हालांकि भारत के एक सीक्रेट मसाले के कारण इस रोग का प्रभाव कम है।

ऐसे हुई इस खास दिन की शुरुआत

World Alzheimer's Day
World Alzheimer’s Day started in 1994

वर्ल्ड अल्जाइमर डे की शुरुआत 1994 में हुई। पहली बार एडिनबर्ग में अल्जाइमर डिजीज इंटरनेशनल की 10वीं वर्षगांठ पर इसे मनाने की पेशकश रखी गई। तभी से हर 21 सितंबर को यह खास दिन मनाया जाता है। अल्जाइमर डिजीज इंटरनेशनल की स्थापना 1984 में दुनिया भर में अल्जाइमर रोगियों का समर्थन करने के साथ ही उन्हें आवश्यक उपचार देने के लिए की गई थी। इस संगठन के दुनियाभर में 100 से ज्यादा संस्थान हैं जो इस रोग से पीड़ित लोगों की समस्याओं को हल करने का काम करते हैं।

भारत में अल्जाइमर की स्थिति

अमेरिका में अल्जाइमर रोग एक बड़ी समस्या बन रहा है।
Alzheimer’s disease is becoming a big problem in America.

रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के अनुसार, अमेरिका में अल्जाइमर रोग एक बड़ी समस्या बन रहा है। साल 2020 में, लगभग 5.8 मिलियन अमेरिकी अल्जाइमर रोग से जूझ रहे थे। चिंता की बात यह है कि इस बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या हर पांच साल में लगभग दोगुनी हो रही है। हालांकि भारत में अल्जाइमर पीड़ितों की संख्या कम है। इसका एक मुख्य कारण है ‘करक्यूमिन’। कई शोध बताते हैं कि करक्यूमिन के कारण भारत में अल्जाइमर की दर कम है। दरअसल, करक्यूमिन हल्दी में पाया जाता है। जी हां, करक्यूमिन के कारण ही हल्दी का पीला रंग होता है। यह बेहद गुणकारी होता है। इसमें कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को खराब होने से बचाते हैं। यही कारण है कि यह कई रोगों से शरीर को बचाता है। उन्हीं में से एक है अल्जाइमर।

क्या है अल्जाइमर

अल्जाइमर एक ऐसा रोग है, जिसे लोग महसूस तो करते हैं, लेकिन इसे उम्र का असर मानकर उपचार नहीं करवाते हैं। इसे एक तरह से ‘भूलने का रोग’ कहा जा सकता है। यह डिमेंशिया का एक बड़ा कारण हो सकता है। यह एसिटिलकोलाइन की कमी के कारण होता है। इसमें मस्तिष्क की कोशिकाएं बनती तो हैं, लेकिन खत्म भी होने लगती हैं। जिससे स्मृति और तर्क शक्ति कम होने लगती है। कभी कभी वह बोलते समय शब्द तक भूल जाते हैं। ऐसे में इस रोग की शुरुआत में ही चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है।  

क्यों होता है अल्जाइमर

अधिकांश लोगों को अल्जाइमर आनुवांशिक होता है।
Most people with Alzheimer’s are genetic

अल्जाइमर रोग क्यों होता है, इसके विषय में अभी तक कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इसे लेकर शोध कर रहे हैं। हालांकि अधिकांश लोगों को अल्जाइमर आनुवांशिक होता है। इसी के साथ बदली हुई लाइफस्टाइल और पर्यावरणीय कारणों से भी यह रोग हो रहा है। इन सभी से मस्तिष्क प्रभावित होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार सामान्य और स्वस्थ मस्तिष्क की तुलना में इस रोग से ग्रसित लोगों के मस्तिष्क के एक हिस्से में कोशिकाएं काफी कम होती हैं।  

अल्जाइमर का उपचार

साइंस की इतनी उन्नति के बावजूद अल्जाइमर रोग का कोई उपचार फिलहाल खोजा नहीं जा सका है। हालांकि दवाओं से इसे एक स्तर पर रोका जा सकता है। इसी के साथ यह माना जाता है कि जिन लोगों को हार्ट से संबंधित परेशानियां नहीं होती हैं, उन्हें अल्जाइमर का खतरा कम होता है। ऐस में अपने दिल को सेहतमंद रखने की कोशिश करें।  ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करना भी जरूरी है।  

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...