Welfare of Cancer Patients: ‘कैंसर’, ये नाम सुनते ही हर किसी की रूह कांप जाती है। दुनियाभर में हर साल लाखों लोगों की जान लेने वाला यह रोग जितना पीड़ादायक है, उतना ही जानलेवा भी। इस रोग से लड़ना और इसके साथ जीना आसान नहीं है, फिर भी हजारों लाखों लोग मौत को हराकर जिंदगी की जंग जीतते हैं। कैंसर से जूझ रहे ऐसे ही लोगों को समर्पित है 22 सितंबर का दिन। इस दिन मनाया जाता है ‘वर्ल्ड रोज डे’ या ‘द डे फॉर वेलफेयर ऑफ कैंसर पेशेंट्स’। इस साल इस खास दिन की थीम है, ‘ऑनरिंग द करेज टू फाइट अगेंस्ट कैंसर’ यानी कैंसर से जंग लड़ने वालों का सम्मान।
एक बच्ची सिखा गई जीने की सीख

यह खास दिन 12 साल की एक कैंसर रोगी बच्ची मेलिंडा रोज की याद में मनाया जाता है। मेलिंडा एस्किन ट्यूमर से पीड़ित थी और साल 1996 में कैंसर से लड़ते हुए उसने दुनिया छोड़ दी, लेकिन आज भी वह लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है। दरअसल, रोज के परिवार को बहुत देरी से उसके कैंसर का पता लग पाया था। डॉक्टर्स ने रोज को जीने के लिए सिर्फ कुछ ही सप्ताह का समय दिया था, क्योंकि कैंसर उसके पूरे शरीर को अंदर से खोखला कर चुका था। कैंसर का पता चलने के बाद रोज मात्र छह महीने ही जी पाई। लेकिन इस दौरान कैंसर से जूझती यह नन्ही बच्ची कैंसर रोगियों के लिए कविताएं, खत और लेख लिखती रही। रोज की इन कोशिशों से अन्य कैंसर मरीज काफी प्रभावित हुए। 22 सितंबर को रोज मेलिंडा ने दुनिया को अलविदा कहा और इसी कारण इस दिन ‘रोज डे’ मनाया जाता है। जिसे बाद में द डे फॉर वेलफेयर ऑफ कैंसर पेशेंट्स भी कहा जाने लगा।
इसलिए खास है यह दिन
जिंदगी में किसी को जीने की उम्मीद देना, सबसे बड़ा काम है। और वर्ल्ड रोज डे यही काम करता है। इस दिन कैंसर रोगियों को उनके अपने बताते हैं कि जिंदगी की इस बड़ी जंग में वे अकेले नहीं हैं। उनके हर कदम पर उन्हें सहारा देने के लिए कोई अपना मौजूद है। इस दिन कैंसर रोगियों को खुशियां देने की कोशिश की जाती है। शोध बताते हैं कि परिवार और अपनों का साथ कैंसर पेशेंट्स पर मनोवैज्ञानिक तरीके से पॉजिटिव असर डालता है। आपको बता दें कि दुनियाभर में साल 2020 में करीब 18 मिलियन से ज्यादा लोग विभिन्न प्रकार के कैंसर से पीड़ित थे। ये लोग हर दिन एक नई जंग लड़ते हैं।
क्या करें इस दिन

वैसे तो इस जानलेवा बीमारी के जूझ रहे लोगों के संघर्षों की लंबी लिस्ट है, लेकिन सभी के संयुक्त प्रयासों से हम उनकी इस कठिन डगर में उन्हें प्यार और अपनेपन की छाव दे सकते हैं। आप कैंसर पेशेंट्स को फूल, उपहार और सबसे ज्यादा अहम अपना समय दे सकते हैं। कैंसर का उपचार काफी महंगा होता है, अगर आप चाहें तो एक ऐसा ग्रुप बना सकते हैं जो जरूरतमंदों की आर्थिक मदद कर सके। आपकी छोटी-छोटी मदद भी जरूरतमंदों के लिए बड़ी साबित हो सकती है।
