प्री मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति होती है जो महिलाओं  को हर महीने मासिक धर्म होने से पहले महसूस करने को मिलती है। इस स्थिति के दौरान उन्हें कुछ शारीरिक या मानसिक लक्षण देखने को मिलते हैं।अ र्थात् पीएमएस की परिभाषा हम यह लिख सकते हैं, ” एक ऐसी स्थिति जो अपने साथ शारीरिक, व्यवहारिक और मानसिक लक्षण लेकर आती है, जोकि हर महीने मासिक धर्म से पहले होती है और उनके होने के बाद चली जाती है। यह कोई बीमारी नहीं है। लगभग 40% महिलाओं के लिए यह परिभाषा ठीक है और इसके लक्षण हर महिला में अलग अलग समय अवधि तक देखने को मिल सकते हैं। इसके लक्षण सामान्य से हट कर होते हैं और जब आपके पीरियड्स शुरू होते हैं तो यह चले जाते हैं। 5% महिलाओं को प्री मेंस्ट्रुअल लक्षण देखने को मिलते हैं जिनमें चिंता करना, डिप्रेशन, कॉन्फिडेंस न होना, इरीटेशन होना, पेट फूल जाना आदि शामिल हैं।इसके उपचार की अभी तक कोई बेस्ट रेंज तो उपलब्ध नहीं है लेकिन बहुत सारे ऑप्शंस मार्केट में उपलब्ध हैं।

प्री मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के कारण

वैसे तो किसी को नहीं पता है कि यह किस कारण से होता है क्योंकि पीएमएस ओवुलेशन के बाद ही शुरू हो जाता है और जब तक आपके पीरियड्स नहीं आते तब तक रहता है। हालांकि यह मान सकते हैं कि यह उस समय होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण होता है। यह लक्षण हर महिला में उनके लाइफस्टाइल, वह कितना पोषण खाती हैं और उनकी जज्बाती हालत क्या है पर निर्भर होकर अलग अलग हो सकते हैं। इसलिए ही कुछ ही समय के लिए कुछ महिलाओं को बहुत ज्यादा लक्षण देखने को मिलते हैं तो कुछ महिलाओं को बहुत कम। इसका कारण पता लगाने पर अभी बहुत रिसर्च की जा रही हैं लेकिन इसके लक्षण प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज से मिलते जुलते हैं। पीएमएस आपके अंदर किसी हार्मोन की कमी के कारण या किसी हार्मोन की अति के कारण नहीं होते हैं।

प्री मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम

प्री मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के

लक्षण 

मूड बदलते रहना

इरिटेट रहना

टेंशन

आसानी से रो देना

सिर दर्द होना

कंफ्यूज रहना

ब्रेस्ट में दर्द रहना

डिप्रेशन हो जाना

कब्ज या डायरिया

कमर दर्द होना

पेट फूलना

कुछ ऐसे लक्षण जो बहुत ही कम देखने को मिलते हैं।

नींद का पैटर्न डिस्टर्ब हो जाना।

पिंपल्स आदि जैसी स्किन समस्या होना।

जोड़ों में दर्द होना।

व्यक्तित्व में बदलाव होना।

अनियमित धड़कन।

कुछ निर्णय न लें पाना।

प्री मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के

उपचारलक्षण डायरी बनाना

: आप इस चीज का उपचार तब ही ले सकती हैं जब आपको ढंग से अपनी बीमारी का पता हो। आपके पास लक्षणों का रिकॉर्ड रहना बहुत जरूरी है ताकि आप यह जान सकें कि आपको कौन कौन से लक्षण कितने समय तक रहते हैं और वह किस समय होते हैं। यह रिकॉर्ड आपके डॉक्टर की आपके लिए उपयुक्त इलाज ढूंढने में बहुत अधिक सहायक हो सकता है। आप निम्न कुछ चीजों को रिकॉर्ड बना सकती हैं।

क्या आप कोई ओरल कंट्रेसेप्टिव ले रही हैं?

आप कब और क्या चीजें खा रही हैं?

क्या आप धूम्रपान करते हैं या शराब पीती हैं? अगर हां तो कितनी मात्रा में।

काम पर या घर पर आपके स्ट्रेस लेवल का रिकॉर्ड रखें।

किस अवस्था में आपको पहली बार पीएमएस के लक्षण देखने को मिले थे और वह क्या क्या थे?

आप कौन सी एक्सरसाइज करती हैं और कितने समय तक?

दवाइयां प्रिस्क्राइब की गई दवाइयां

: यह दवाइयां उन महिलाओं के लिए भी लाभदायक होती हैं जो अपने पीएमएस की वजह से अपने लाइफस्टाइल को कंट्रोल नहीं कर पा रही हैं। डायूरेटिक्स पेट फूलने वाली समस्या को कम करने के लिए दी जाती आ रही हैं। वैसे तो अब यह ज्यादा प्रचलित नहीं है लेकिन आज भी कभी कभार इसको प्रेस्क्राइब कर दिया जाता है। कुछ डॉक्टर्स टेबलेट्स की फॉर्म में आपको हार्मोन भी दे सकते हैं।

एंटी डिप्रेसेंट

: यह भी दवाइयों की ही एक फॉर्म है। कुछ दवाइयों के लिए नियमित सुपरविजन जरूरी होता है इसलिए आपको हर 6 महीने या साल में एक बार अपने डॉक्टर के पास जाते रहना चाहिए। अगर आपके लक्षण कम या ठीक नहीं होते हैं तो भी अपने डॉक्टर की सहायता लें।

कैल्शियम और विटामिन बी 6

: कुछ महिलाओं के लक्षण कम करने में कैल्शियम और विटामिन बी6 भी काफी ज्यादा सहायक रहे हैं। कैल्शियम आप हर दिन भी ले सकती हैं लेकिन विटामिन बी 6 आपको केवल पीरियड्स आने के कुछ ही दिन पहले लेना होता है। स्टडीज के अनुसार कैल्शियम सप्लीमेंट का प्रभावित डोज हजार एमजी प्रति दिन होता है। आप कैल्शियम से युक्त डाइट भी ले सकते है जैसे लो फैट डेयरी उत्पाद।

कैल्शियम और विटामिन बी6

:को लेने के लिए आपको डॉक्टर की सलाह की जरूरत नहीं है। यह आपको आसानी से आस पास की मार्केट में उपलब्ध हो जाएगी और इसके पीछे की सूचना को जरूर पढ़ें। अगर आप अब भी डोज को लेकर क्लियर नहीं हैं तो फिर अपने डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं।

सेल्फ केयर 

यह ध्यान जरूर रखें कि आप हर रोज हेल्दी खाना खा रही हैं। ताजे फल और सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करें। अधिक नमक, कैफ़ीन और शराब को अवॉइड करें।

हर रोज एक्सरसाइज करें। अगर आप रोजाना आधे घंटे के लिए वॉकिंग भी करती हैं तो इससे आपके स्ट्रेस लेवल कम होते है। इससे आप रिलैक्स भी होती हैं और आपका मूड भी एकदम अच्छा और ताजा हो जाता है। अगर आपको जोड़ों में दर्द है तो रोजाना एक्सरसाइज से यह भी ठीक हो सकता है।

एक अच्छी और चैन पूर्ण नींद लें। ध्यान रखें कि कम से कम 7 से 8 घंटे अवश्य ही सोएं।

इनके अलावा लक्षणों को कम करने के लिए आप मसाज, योग और एक्यूपंक्चर जैसी तकनीकों का भी सहारा ले सकती हैं। इन तकनीकों से बहुत सी महिलाओं को लाभ मिला है और यह आपके लिए भी अवश्य लाभदायक रहने वाली हैं।

निष्कर्ष 

पीएमएस एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें आपको अधिकतर मानसिक लक्षण देखने को मिलते हैं और इस वजह से आप काफी चिड़चिड़े भी ही सकती हैं। अगर आपको इस स्थिति में नहीं फसना है तो आपको अपनी देख भाल करनी होगी खास कर अपना लाइफस्टाइल बदलना होगा। एक हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर जाएं और रोजाना एक्सरसाइज करें व हेल्दी खाना ही खाएं।

यह भी पढ़ें-

क्यों होता है महिलाओं के मूड और व्यवहार में पल पल बदलाव

गर्मियों में जरूरी हेल्थ केयर टिप्स

स्वास्थ्य संबंधी यह लेख आपको कैसा लगा? अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही स्वास्थ्य से जुड़े सुझाव व लेख भी हमें ई-मेल करें- editor@grehlakshmi.com