प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम यानि की पीएमएस की समस्या किसी भी महिला को उसके पीरियड्स के शुरू होने के करीब लगभग 5 से 7 दिन पहले का होता है। अक्सर इस रोग से ग्रसित महिलाओं के व्यवहार में काफी तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। इससे जुड़े कई लक्षण होते हैं, जिसमें महिलाओं के मूड में पल-पल का बदलाव, ब्रेस्ट में दर्द, कुछ खाने की इच्छा, थकान, चिड़चिड़ापन और तनाव होता है। शोध की मानें तो हर पांच में से तीन महिलाओं को उनके पीरियड्स के दौरान पीएमएस का अनुभव किया है। जब भी किसी लड़की की उम्र बढ़ती है, उस बढ़ती हुई उम्र के साथ कई तरह के हार्मोनल चेंजेस होते हैं। जिस वजह से पीएमएस की समस्या बढ़ा जाती है। इसके चलते महिलाएं तनाव का शिकार हो जाती हैं। जो लाइफ स्टाइल पर भी बुरा असर डालती है। यदि जीवनशैली को बेहतर किया जाए तथा संबंधित इलाज की सहायता ली जाए तो प्रीमेंस्ट्रूअल सिंड्रोम संकेत तथा लक्षण को कम किया जा सकता है। आज इस लेख के जरिये हम आपको बताएंगे इससे बचाव की खास टिप्स, जो आपके काम आएंगी।
1. क्या हैं लक्षण- प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम यानि की पीएमएस की समस्या से जूझती ज्यादातर महिलाओं को इसके लक्षणों के बारे में जानकारी ही नहीं होती है। अगर आप सही समय पर इससे जुड़े लक्षण को पहचान जाएं तो समय पर उपचार कराना आसान होगा। आइये जानते हैं इससे जुड़े लक्षणों के बारे में।
• महिलाओं के व्यवहार में बदलाव आना।
• महिलाओं के इमोशनल होना।
• चिंता और तनाव से ग्रसित होना।
• मन में उदासी रहना।
• बात-बात पे दुख जताना।
• हर छोटी सी छोटी बात पर गुस्सा आना।
• कुछ भी अचानक खाने की इच्छा होना।
• सोने में परेशानी होना या नींद ना आना।
• समाज से दूरी बनाना।
• कमजोरी लगना।
2. जब होने लगे भावात्मक बदलाव– प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम में अकसर महिलाओं को भावात्मक और शारीरिक तौर पर कमजोरी महसूस होती है। इससे आपकी दिनचर्या काफी हद तक प्रभावित हो जाती है। शोध के मुताबिक पीरियड्स की शुरुआत के पांच दिनों के अंदर ये साड़ी समस्याएं कम होने लगती हैं। ये लक्षण आपको हर महीने परेशान कर सकते हैं।
3. किस वजह से होती है परेशानी– पीएमएस की समस्या महिलाओं में आम है। पीरियड्स के दौरान होने वाले बदलाव पीएमएस की वजह से ही होते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिसकी वजह से परेशानी बढ़ाने लगती हैं।
• स्मोकिंग की वजह से।
• तनाव लेने से।
• व्यायाम ना करने से।
• नमक, शुगर और लालमीट का ज्यादा सेवन करने से।
• डिप्रेशन की वजह से।
4. कैसे करें बचाव- प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम से बचने के कई तरीके हैं। अगर आप इससे निजात पाने के लिए आपको अपनी खुद मदद करनी होगी। और ये मदद कैसे होगी वो भी जान लीजिये।
• हर रोज कम से कम आधे घंटे का व्यायाम करें।
• हरी साग-सब्जियों आउट फलों का सेवन करें।
• अपने आहार में कैल्शियम की भरपूर मात्रा का सेवन करें।
• एल्कोहल से बनाएं दूरी।
• स्मोकिंग से बनाएं दूरी।
• खाने में कुव्ह भी बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरुर लें।
5. कब पड़ सकती है डॉक्टर की जरूरत– प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम महिलाओं के शरीर को कई तरह से प्रभावित करते हैं।  हार्मोन्स के लक्षण की वजह से इसमें उतार-चढ़ाव भी तेज हो जाता है। जो कभी कभी गर्भ तक को नुकसान पहुंचा सकता है। साथ ही बढ़ता तनाव पीएमएस को भी ट्रिगर करता है। जिससे कई तरह के परिवर्तन देखने को मिलते हैं। महिलाएं समाजिक दूरी बनाने लगती हैं, जो वाकई में चिंता का विषय है। और यही सही समय जब आपको डॉक्टर की जरूरत होती है।
प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम यानि की पीएमएस की समस्या महिलाओं में आम है, लेकिन अनदेखी करने पर ये बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। आप सही समय पर लक्षणों की पहचान कर इससे निजात पा सकते हैं। इससे निपटने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव और सही परामर्श ले सकती हैं।

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