फूड प्वाइजनिंग या हम यह कहें कि खाने से उत्पन्न होने वाली बीमारियां। यह तब होती है जब हम कुछ ऐसी चीजें खाते या पीते हैं जिनमें हानिकारक कीटाणु होते है। यह कीटाणु बैक्टीरिया, वायरस या पैरासाइट किसी भी रूप में हो सकते हैं। बैक्टेरिया खाने में टॉक्सिन उत्पन्न कर देते है। यही वह टॉक्सिन होता है जो सभी समस्याओं का कारण होता है। तो आज हम जानेंगे कि फूड प्वाइजनिंग किस प्रकार हमें बीमार कर सकता है, जब यह हो जाता है तो इसके क्या क्या लक्षण देखने को मिलते हैं और इससे हम कैसे बच सकते हैं। तो आइए जानते हैं कि फूड प्वाइजनिंग के क्या क्या लक्षण होते हैं।

फूड प्वाइजनिंग के लक्षण

कीटाणुओं से भरपूर खाने को खाने के बाद लक्षण दिखने में घंटों का भी समय लग सकता है और दिनों का भी। लक्षण दिखने का समय इस बात पर निर्भर करता है कि खाने का कितना अमाउंट लिया है या खाने के किस भाग से फूड प्वाइजनिंग हुई है। इसके कुछ लक्षण निम्न हैं : 

  • पेट में दर्द होना
  • डायरिया
  • फीवर 
  • भूख न लगना
  • उल्टियां आना
  • जी मिचलाना
  • कमजोरी आना और थकान महसूस होना।
  • कई बार फूड प्वाइजनिंग एक इंसान को हो जाती है तो कई बार पूरे परिवार को। यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस व्यक्ति ने खाने का कितना पार्ट खाया था।

मछली खाने के बाद फूड प्वाइजनिंग के लक्षण क्या क्या होते है ?

मछली खाने के बाद फूड प्वाइजनिंग होने के दो प्रकार होते हैं: किगुआटेरा और स्क्रोंबोएड प्वाइजनिंग। पहली प्रकार की प्रोजनिंग के लक्षणों में पेट में दर्द, उल्टियां, डायरिया और जी मिचलाना आदि। यह लक्षण बढ़ते बढ़ते सिर दर्द, शरीर में दर्द, खुजली होना, गुदगुदी होना, शरीर का सुन्न पड़ जाना आदि में भी तब्दील हो सकते हैं। कई बार आपको यह लक्षण भी महसूस होता है मानो आपने कुछ मेटल का खा लिया हो या आपका दांत टूट गया हो। आपको सर्दी या गर्मी लगने में भी बदलाव आ सकता है।

  • दुसरे प्रकार का इंफेक्शन आपके द्वारा मछली खाने के 20 या 30 मिनट बाद होता है। इसके लक्षणों में चेहरे का लाल पड़ जाना, उल्टी आना, डायरिया और पेट दर्द आदि शामिल होते है। यह लक्षण एलर्जिक रिएक्शन से मिलते जुलते होते हैं।
  • विब्रियो इंफेक्शन एक प्रकार का बैक्टेरियल इंफेक्शन होता है जो वार्म या सी वॉटर को मछलियों द्वारा उपजता है। यह अन्य सी फूड द्वारा भी हो जाता है। अगर आप मछली या समुद्र के भी संपर्क में आते हैं तो आपको यह इंफेक्शन हो सकता है। इसके लक्षणों में बुखार, उल्टियां, पेट दर्द होना और डायरिया शामिल है। कुछ अधिक गंभीर लक्षणों में तेज बुखार, सर्दी लगना, बीपी लो हो जाना, चेहरे का लाल पड़ जाना, सूजन और मुंह पर दाने हो जाना आदि शामिल होते हैं। अगर बैक्टीरिया किसी ओपन कट में घुस जाता है तो यह इंफेक्शन और अधिक गंभीर भी हो सकता है। यह आपके खून के अंदर घुस सकता है और जानलेवा भी बन सकता है। आप इसका रिस्क सी फूड को अच्छे से पक्का कर खाने से कम कर सकते हैं। इस प्रकार के इंफेक्शन को ट्रीट करने के लिए एंटी बायोटिक्स का प्रयोग किया जाता है।

 

फूड प्वाइजनिंग के क्या क्या कारण होते हैं?

 

फूड प्वाइजनिंग होने के बहुत से अलग अलग कारण हो सकते हैं।  जिन खाद्य पदार्थों को ठंडा होना चाहिए लेकिन उन्हें गर्म किया जाता है तो यह फूड पॉइजनिंग का मुख्य कारण होता है। इसलिए ही फूड प्वाइजनिंग बुफे और पिकनिंक्स पर ज्यादा आम है। फूड प्वाइजनिंग होने के कुछ मुख्य कारण निम्न हैं ; 

  • कच्चा या आधा पका हुआ मीट।
  • बिन पश्चयुरीकृत किए गए डेयरी उत्पाद।
  • कच्ची शेल्फिश।
  • बिना धोए गए फल।
  • बिना धोई गई सब्जियां।।

फूड प्वाइजनिंग की पहचान कैसे की जा सकती है?

फूड प्वाइजनिंग के अधिकतर केस की पहचान नहीं की जाती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ज्यादातर लोग घर पर ही ठीक हो जाते हैं। अगर आपको इसके अधिक गंभीर लक्षण देखने को मिलते हैं तो आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए। वह इसकी पहचान करने के लिए आपका ब्लड टेस्ट कर सकते हैं। और इसके अलावा डॉक्टर आपके स्टूल का सैंपल लेकर भी यह चेक कर सकते हैं कि कौन से जर्म से आपको फूड प्वाइजनिंग हो रही है।

क्या आप फूड प्वाइजनिंग से खुद का बचाव कर सकते हैं?

इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका यही होता है कि आप जो खा रहे हैं उसका ध्यान रखिए। हमेशा घर पर ही खाने खाएं और ताजा खाना बना कर खाएं। खाने को जमा करके रखने और उसे बाद में खाने से बचें। जब बाहर खाना खा रहे हों तो बुफे आदि चीजों से बचें।

फूड प्वाइजनिंग से बचने के टिप्स

  • खाने से पहले फल और सब्जियों को अच्छे प्रकार से धो लें।
  • अलग अलग खाद्य पदार्थों के लिए प्रयोग करने से पहले सारे उपकरण जैसे कटिंग बोर्ड, चाकू और बर्तन आदि को धो लें।
  • आपके हाथों और बर्तनों को बार बार धोते रहें।
  • कच्चे और पके हुए मीट को एक ही प्लेट में न रखें।
  • अगर आपने एक चाकू से कच्चा मीट काटा है तो उस चाकू का प्रयोग दूसरी चीजों को काटने के लिए न करें और अगर कर रहे हैं तो पहले चाकू को अच्छे से धो लें।
  • खाने से पहले मीट की अच्छे से पका लें और अगर हो सके तो आप मीट थर्मामीटर का भी प्रयोग कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करें कि बीफ 160 डिग्री, चिकन 180 और मछली 140 डिग्री एफ पर पकी हुई हो।
  • एक्सपायर हो गए पैकेट बंद फूड का प्रयोग कभी भी न करें।
  • अगर बनाए गए खाने को आप अगले 4 घंटों तक नहीं खाने वाले है तो उसे फ्रीज में रख दें।
  • जंगली मशरुम का प्रयोग न करें।
  • अगर आप प्रेगनेंट हैं या आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है तो सॉफ्ट चीज़ को न खाएं।
  • अगर बाहर किसी देश में घूमने जा रहे हैं तो कच्चे फल और सब्जियों को धोए बिना न खाएं।
  • किसी रेस्टोरेंट या फंक्शन के दौरान फ्रिज से निकाली गई चीजों को अगर बाहर कई घंटों के लिए रखा गया है तो उनका प्रयोग न करें।

मछली खाने से होने वाले फूड प्वाइजनिंग को किस प्रकार अवॉइड करें?

इस प्रकार के इंफेक्शन से बचने के लिए ऐसी मछली न खाएं जिनमें पॉयजन होता है जैसे अंबर जैक, ग्रुपर, स्नैपर आदि। अधिक पॉयजन मछली के आंतरिक ऑर्गन में पाया जाता है इसलिए उन्हें न खाएं। जिन मछलियों को अच्छे से फ्रिज में नहीं रखा गया हो उन्हे भी न खाएं।

फूड पॉइजनिंग के उपचार

ज्यादातर लोग घर पर ही कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं। इस दौरान आपको डिहाइड्रेट होने से बचना है। ज्यादा से ज्यादा लिक्विड चीजों का सेवन करें। जब तक आपकी उल्टियां और अन्य लक्षण नहीं ठीक हो जाते हैं तब तक सॉलिड फूड न खाएं और न ही डेयरी उत्पादों का सेवन करें।

आपको डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

जब आपका डायरिया 3 दिन से अधिक टिक जाए, उल्टियों को 2 दिन से अधिक हो जाएं, आपके स्टूल में खून दिख रहा हो, आपको बहुत तेज बुखार हो तो आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

फिश द्वारा हुई फूड प्वाइजनिंग को कैसे ठीक करें?

अगर आपको यह इंफेक्शन हो जाता है तो आपको कुछ दवाइयां दी जाती हैं जो आपके लक्षणों को कुछ दिन बाद ठीक कर देती है।

आप कितने दिनों तक बीमार रह सकते हैं?

अधिकतर लोगों को फूड प्वाइजनिंग के लक्षण एक से दो हफ्तों तक रहते हैं। यह आपको कितनी देर तक प्रभावित कर सकते हैं यह बात इस पर निर्भर करेगी कि आपने कितना पॉयजन खाया है। यह लक्षण अगर आप बिना फ्रिज की मछली खाते हैं तो दुबारा भी आ सकते हैं।

आप कैसे पता कर सकते हैं कि आप डिहाइड्रेट हैं?

अगर आपको कम पेशाब आए, मुंह सुखा रहे, सिर दर्द, दुविधा और थकान, अधिक प्यास लगने जैसे लक्षण दिखाई देते रहते हैं तो समझ लें कि आप बहुत कम हाइड्रेटेड हैं।

क्या यह एक गंभीर स्थिति है?

कुछ स्थितियां जैसे डिहाइड्रेशन और खतरनाक बैक्टेरिया का सेवन कर लेने से यह खतरनाक स्थिति हो सकती है और अगर आप प्रेगनेंट हैं तो आपके लिए यह और हानिकारक हो सकता है इसलिए ध्यान से खाएं पिएं और अपनी सभी दवाइयों का सेवन करते रहें ताकि यह लक्षण जल्दी ही ठीक हो सकें।

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