हर व्यक्ति चुनाव कर रहा है, उनकी बाध्यताएं भी उन्हीं का चुनाव है। अचेतनतापूर्वक किए गए चुनाव, बाध्यताएं बन जाती हैं। मान लो कि अभी तुम क्रोधित हो जाते हो। क्रोधित होना, वास्तव में, तुम्हारा चुनाव है। कहीं न कहीं, तुम यह मानते हो कि स्थिति से निपटने का यही तरीका है, लेकिन चुनाव इतनी अचेतनापूर्वक किया गया है कि वह एक बाध्यता बन जाता है, वह एक अलग स्तर पर बलात्ï घटित होने लगता है। इसलिए जिस तरह से तुम जी रहे हो, यह तुम्हारा ही चुनाव है, लेकिन चुनाव बिना किसी चेतनता के लिए गए हैं- अचेतन चुनाव। एक बार ऐसा हुआ कि शंकरन पिल्लई एक मधुशाला में गया। उसके पीछे-पीछे एक शुतुरमुर्ग भी था। जब वह बैठ गया, तो साकी ने आकर आर्डर के लिए पूछा। शंकरन पिल्लई ने कहा, ‘मैं बीअर लूंगा’ फिर वह शुतुरमुर्ग की तरफ मुड़ा, ‘तुम क्या लोगे?’ ‘मैं भी बीअर लूंगा,’ शुतुरमुर्ग ने कहा। साकी ने बीअर देकर कहा, यह एक सौ छप्पन रुपए पचास पैसे का है।’ शंकरन पिल्लई ने अपनी जेब में हाथ डाला और बिल्कुल ठीक-ठीक रकम निकालकर उसे दे दिया। अगले दिन वह फिर शुतुरमुर्ग के साथ आया और बीअर की फरमाईश की। शुतुरमुर्ग ने कहा, मैं भी वही लूंगा। एक बार फिर उसने अपनी जेब में हाथ डाला और बिल्कुल ठीक-ठीक रकम चुका दिया। अब यह रोज की बात हो गई थी, तब तक एक शाम वे दोनों फिर घुसे। ‘वही लेंगे?’ साकी ने पूछा। ‘नहीं, इस बार मैं एक बड़ा स्कॉच लूंगा’ शंकरन पिल्लई ने फरमाया। ‘मेरे लिए भी वही,’ शुतुरमुर्ग ने कहा। ‘यह दो सौ उनासी रुपए का है,’ साकी ने कहा। एक बार फिर जेब से बिल्कुल ठीक-ठीक रकम बाहर आई। अब साकी से रहा नहीं गया, वह उत्सुकतापूर्वक पूछा, ‘माफ कीजिएगा महाशय, हर बार, आप अपनी जेब से बिल्कुल ठीक-ठीक पैसा कैसे निकाल देते हैं?’ ‘हां,’ शंकरन पिल्लई ने कहा, ‘कई साल पहले की बात है, मैं अटारी साफ कर रहा था और उसमें मुझे एक पुराना लैंप मिला। जब मंै उसे रगड़ रहा था कि एक जिन्न प्रकट हुआ और उसने मुझे दो वरदान मांगने के लिए कहा। मैंने पहला वरदान यह मांगा कि कभी भी अगर मुझे किसी चीज के लिए मूल्य चुकाना पड़े, तो मैं बस अपनी जेब में हाथ डालूं और ठीक उतना ही पैसा मुझे वहां पर हमेशा मिल जाए।’ ‘वाह क्या बात है।’ साकी ने कहा, ‘अधिकांश लोग एक करोड़ डालर या कुछ ऐसा मांगेंगे लेकिन आपके पास तो हमेशा उतना धन आ जाएगा जितना आप चाहेंगे, जब तक आप जीवित रहेंगे।’ ‘ठीक कह रहे हो, चाहे वह एक लीटर दूध हो या रोल्स-रोयस कार हो, बिल्कुल ठीक-ठीक रकम वहां हमेशा होती है,’ शंकरन पिल्लई ने कहा। फिर साकी ने पूछा ‘एक बात और महाशय, इस शुतुरमुर्ग का क्या चक्कर है?’ उसने जवाब में कहा, ‘मेरी दूसरी इच्छा एक लंबी टांग वाली मुर्गी की, मेरा मतलब है एक लंबी टांग वाली छोकरी की थी।’

अब पूरी की पूरी बात यह है कि तुम जो भी चुनाव करते हो, उसे चेतनापूर्वक करो। एक साधारण सा भी काम, जैसे कि जब तुम सुबह जागते हो, तो अचेतन चुनाव यह होता है कि तुम उठना नहीं चाहते। जब सूरज निकलता है, तब अपने चेहरे के ऊपर चादर थोड़ी ऊंची तान लेते हो। क्या तुमने गौर किया है? यह एक अचेतन चुनाव है। तुम्हारा भौतिक शरीर थोड़ी देर और बिस्तर में रहना चाहता है, थोड़ी देर और, थोड़ी देर और-कई सारे कारणों से, यह उठना नहीं चाहता है। जीवन केकई सारे पहलू हैं, तुम्हारे जीवन के अनुभव में कई सारी सीमाएं हंै, कई तरह से अचेतनापूर्वक, तुम वास्तव में दिन का सामना नहीं करना चाहते हो। मान लो कि कल तुमने पिकनिक पर जाने की योजना बनाई है। इसकेपहले की सूरज निकले, तुम उस दिन उठ जाते हो, क्या तुमने ध्यान दिया है? एक दिन पहले तुमने चेतना पूर्वक यह फैसला किया है, तुम उत्तेजित रहते हो। तुम कल का सामना करना चाहते हो। यह एक आनंदपूर्ण अनुभव है। तुम देखोगे कि इसके पहले की सूरज निकले, तुम उठ जाते हो। अन्यथा, अचेतनतापूर्वक, तुम अपने चेहरे के ऊपर चादर और ऊंची तानने का प्रयास करते हो, क्योंकि वह रोशनी कोई ऐसी चीज नहीं होती जिसका तुम सामना करना चाहते हो, क्योंकि उस रोशनी के साथ आज के शेयर का मूल्य भी आता है, उस रोशनी के साथ आज की समस्याएं आती हैं, क्योंकि उस रोशनी के साथ तुम्हारे जीवन में पूरा संसार आता है। 

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