Importance of Karma: हर व्यक्ति संसार पर शासन करना चाहता है। चूंकि संसार पर शासन करने का उसे अवसर नहीं मिलता, तो वह बस इतना ही कर पाता है कि अपने बच्चों, पत्नी या इस तरह की चीजों पर शासन करता है लेकिन वास्तव में वह पूरे संसार पर शासन करना चाहता है।
वे कौन से गुण हैं जो तुम्हें आकर्षित कर सकते हैं? वह क्या है, जिसे तुम खोजते हो? देखो, तुम बस प्रभावित हो, और यह भी हो सकता है कि तुम उससे एक व्यक्ति के रूप में आकर्षित हो। जिस तरह से वह दिखता है, या बोलता है, हो सकता कि तुम्हें पसंद हो, या यह भी हो सकता है कि जो काम किये जा रहे हैं, वह तुम्हें पसंद हो। तुम्हारा आकर्षण इन चीजों के बाहर नहीं जा सकता। एक गुरु को पहचानने और उसका शिष्य बनने के लिए किसी व्यक्ति में एक अलग तरह के गुण की जरूरत होती है। जब एडॉल्फ हिटलर ने अपनी खुद की एक पार्टी शुरू करने का निर्णय लिया, तो उसके पास मात्र कुछ मुठ्ïठी भर लोग थे, जो उसके साथ थे। वह उन लोगों के साथ एक तहखाने में बैठा और उनसे इतनी ओजपूर्ण शैली में बातें की कि उनकी कल्पनाओं में पर निकल आए तथा एक बड़ी ऊंचाई को छूने लगे, उसने उन लोगों को यह विश्वास करने के लिए बाध्य कर दिया कि वह बहुत जल्द पूरे विश्व पर शासन करने जा रहा है। वह मात्र एक बेरोजगार युवक था, और कुछ भी नहीं था, लेकिन वह एक बहुत ओजपूर्ण वक्ता था। उनके लिए वह ईश्वर था जो शासन करने जा रहा था। ऐसी ही उसने अपनी छवि बना रखी थी। हिटलर की छवि इतनी सशक्त थी कि उसे यह विश्वास हो गया था कि वह विश्व पर शासन करेगा। अगर तुम कोई भी छवि बिना किसी विराम या रुकावट के निर्मित करते हो, और मन को निरंतर उसी दिशा में केंद्रित करते हो, तो वह छवि साकार होगी ही, चाहे जो हो।
इसे बनाने का एक दूसरा भी तरीका है, बिना कोई मांग किए, बिना किसी चीज के विषय में कभी सोचे, जहां पर चीजें बस घटित होती हैं। इसके पहले कि हम वहां पहुंचे, थोड़ी सी जोशपूर्ण-सक्रियता की जरूरत होती है। वे लोग जिनमें कभी ज्वाला नहीं धधकी, वे पानी की ठंडक को नहीं जान पाएंगे। वे लोग जो अपना जीवन कभी पूरे हृदय से नहीं जी पाए, बस शांत बने रहे, वे दूसरे तरीकों को कभी नहीं जान पायेंगे। अपनी ऊर्जा को क्वथनांक या उबाल बिंदु तक पहुंचाने के लिए और आगे ले जाने के लिए, कम से कम थोड़ी देर के लिए एक उन्मादी होना भी लाभदायक हो सकता है। तब उसे किसी और चीज में रूपांतरित करना बहुत आसान होगा। बस
यही कारण है कि एक साधक कर्म का चुनाव करता है। वैसे भी हम कोई न कोई काम तो करेंगे ही। तो अब हमारे पास यह विकल्प है कि हम महात्मा गांधी की तरह काम करना चाहते हैं या हिटलर की तरह। क्यिा तुम जानते हो कि तुम अपनी किस तरह की छवि बनाना चाहते हो? तुम संसार पर शासन करना चाहते हो या तुम संसार की सेवा करना चाहते हो? अंतत: यही विकल्प है। प्राय:, हर व्यक्ति संसार पर शासन करना चाहता है। बस इतना ही है कि चूंकि व्यक्ति आधे हृदय से काम करता है, वह मात्र अपनी पत्नी पर ही शासन कर पाता है। चूंकि संसार पर शासन करने का उसे अवसर नहीं मिलता, तो वह अपने बच्चों , पत्नी या इस तरह की चीजों पर शासन करता है, लेकिन वह वास्तव में पूरे संसार पर शासन करना चाहता है।
उसके पास संसार पर शासन करने के लिए आवश्यक तीव्रता नहीं है, अन्यथा, वह शासक तो है ही। अब विकल्प बस यही है- या तो शासन किया जाए या सेवा की जाए। जिस भी तरह की छवि को तुम सबसे ज्यादा समन्वित, चैतन्य के सबसे नजदीक और ज्ञान के सबसे निकट मानते हो, तुम उसी तरह के कर्म का चुनाव करो।
