क्या आपके मन में भगवान पर अडिग विश्वास है? छल-कपट से रहित उसी मनोभाव की उपस्थिति में नकारात्मक विचार सिर नहीं उठाएंगे। वांछित मनोरथ पूर्ण भी होगी!
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चुनाव चेतनापूर्वक करो – सद्गुरु
जिस तरह से तुम जी रहे हो, यह तुम्हारा ही चुनाव है, लेकिन चुनाव बिना किसी चेतनता के लिए गए हैं- अचेतन चुनाव। तुम जो भी चुनाव करते हो, उसे चेतनापूर्वक करो। एक साधारण सा भी काम।
तुम अपना भाग्य फिर से लिख सकते हो – सद्गुरु
अगर तुम अपने अंतरतम को स्पर्श कर सकते हो, अगर तुम एक क्षण के लिए यह देख सको, ‘हर चीज मेरा उत्तरदायित्व है, और अपना संपूर्ण ध्यान स्वयं पर केन्द्रित कर सको, तो तुम अपना भाग्य फिर से लिख सकते हो।
मृत्यु अंत नहीं अगला चरण है – सदगुरु
मृत्यु एक कल्पना है। कई लोगों ने इसके बारे में बातें कीं और तुम्हें विश्वास दिलाया। मृत्यु जैसी कोई चीज नहीं है। मात्र जीवन है, जीवन, सिर्फ जीवन। एक आयाम से दूसरे में, दूसरे से तीसरे आयाम में जाना।
