एक बार ऐसा हुआ कि पोप अमेरिका गए, वहां पर उनकी कई वचनबद्घताएं थीं। वे सीनसीनाटी, ओहायो में, हवाईजहाज से उतरे। ड्राईवर-चलित, एक स्ट्रेच लिमो – क्या तुम स्ट्रेच लिमो जानते हो? अमेरिका में लोग एक लिमोजीन को उसकी अंतिम सीमा तक हांकते हैं। एक ड्राईवर उसे चला रहा था। पोप थोड़े से जोश में आ गए, क्योंकि उन्होंने उस तरह से कभी कोई कार नहीं चलाई थी। उन्होंने ड्राईवर से कहा, ‘मैं इसे चलाना चाहता हूं। अब बेचारा ड्राईवर पोप से भला ना कैसे कहता? उसने कहा ‘ठीक है। पोप कार चलाने का आनंद लेने लगे, गैस को अधिक से अधिक दवाते गए, वे नये या सौ मील प्रति घंटे की रफ्तार से चले जा रहे थे। उनको यह पता नहीं था कि वे कितनी स्पीड से जा रहे हैं, और ओहायो की पुलिस खतरनाक होती है।

पोप झूम रहे थे कि तब तक उन्होंने अपने पीछे फ्लैशलाईट देखा। एक पुलिस वाला उतरा और सावधानीपूर्वक, बंदूक को हाथ में लिए हुए, धीरे-धीरे कार के पास पहुंचा। स्वयं पोप ही गाड़ी चला रहे थे! उसने पिछले सीट पर देखा और वहां कोई बैठा हुआ था। फिर उसने कहा, ‘ठहरो। वह अपनी कार के पास गया, रेडियो निकाला और पुलिस आयुक्त को फोन किया। उसने आयुक्त से कहा, ‘मैंने एक बड़ी मछली पकड़ी है। ‘अरे बताओ तो, वह कौन है? क्या टेड केनेडी फिर से मुसीबत में है? ‘नहीं, उससे भी एक बहुत बड़ा आदमी है। ‘क्या चेलसी क्लिंटन है, पीकर चला रही थी? तुमने किसको पकड़ा है? ‘वह बोला, मैं यह नहीं जानता कि वह कौन है, लेकिन उसने पोप को अपना ड्राईवर रखा है! तो तुम यह नहीं जानते हो कि तुम्हारी कार कौन चला रहा है। भाग्य एक ऐसी चीज है, जिसे तुम अचेतनतापूर्वक निर्मित किए जा रहे हो, तुम इसे चेतनतापूर्वक भी निर्मित कर सकते हो। पिछले कुछ दिनों से, तुम्हारे साथ जो हम करने का प्रयास कर रहे हैं, वह बस यही है।

अगर तुम अपने अंतरतम को स्पर्श कर सकते हो, अगर तुम एक क्षण के लिए यह देख सको, ‘हर चीज मेरा उत्तरदायित्व है, और अपना संपूर्ण ध्यान स्वयं पर केन्द्रित कर सको, तो तुम अपना भाग्य फिर से लिख सकते हो। तुम्हारा ध्यान हमेशा बिखरा हुआ है, क्योंकि जिसे तुम ‘मैं मानते हो – वह तुम्हारा घर है, तुम्हारी कार, तुम्हारी पत्नी, तुम्हारा बच्चा, तुम्हारी शिक्षा, तुम्हारा ओहदा और तुम्हारी दूसरी बकवासें हैं। अगर मैं तुम्हें इन सभी चीजों से अलग कर दें, तुम ऐसा महसूस करोगे जैसे कि तुम कुछ भी नहीं हो ; हां या नहीं? इसलिए जिसे तुम ‘मैं कहते हो, वह अभी तुम्हारे चारों तरफ फैला हुआ है।

जब मैं तुम कहता हूं, यह मात्र तुम हो, यह कालीन नहीं है, यह दीवार नहीं है, तुम्हारा बच्चा नहीं है, कोई और चीज नहीं है। जब मैं ‘तुम’ कहता हूं, यह बस तुम हो। अगर ध्यान उस पर केन्द्रित है, तुम अपना भाग्य फिर से लिख सकते हो, जिस भी तरह से तुम चाहो।

तुम कोई व्यवस्थित प्राणी नहीं हो; तुम एक बिखरे हुए प्राणी हो। तुम्हें अभी भी इन सभी कचड़ों को बटोरना पड़ता है, उसे अंदर डालना पड़ता है। फिर वह तुम बन जाता है। तुम अभी भी तुम नहीं बन पाए हो; तुम एक भीड़ हो, है कि नहीं? एक भीड़ का भाग्य हमेशा पहले से ही निश्चित होता है। जैसे ही तुम एक ईनडीविजुअल (व्यक्ति) बन जाते हो- ईनडीविजुअल शब्द ईनडीविजीवल (जिसे खंडित न किया जा सके) से आता है। इसे और खंडित नहीं किया जा सकता; यह बस यह है। यह यहां ओर, वहां नहीं हो सकता। एक बार जब तुम एक सच्चे ईनडीविजुअल (व्यक्ति) बन जाते हो, तुम्हारा भाग्य तुम्हारा हो जाता है

यह भी पढ़ें –मन का स्वभाव – आचार्य महाप्रज्ञ