अगर मैं तुम्हें एक छोटा सा खिलौना देता हूं, मान लो एक खिलौने की कार देता हूं- फिर तुम्हें यह पता होता है कि उसे कैसे चलाना है, तुम जानते हो कि उसका उपयोग कैसे किया जाए। अगर मैं तुम्हें वास्तव में एक कार दे दूं, तो तुम जानते हो कि उसे कैसे चलाना है और उसका आनंद लेना भी जानते हो, लेकिन अगर मैं तुम्हें एक अन्तरिक्षयान दे दूं, फिर तुम्हें उसकेसिर या पूंछ का कुछ पता नहीं चलेगा, क्या ऐसा नहीं है? संभवत: अगर मैं तुम्हें एक हवाई जहाज दे दूं-जब तुम उन सैकड़ों सूचकों और मीटरों को देखोगे-तुम यह नहीं जान पाओगे कि उसकेसाथ क्या किया जाए। अगर मैं तुम्हें एक अन्तरिक्षयान देता हूं, निश्चित रूप से तुम यह नहीं जान पाओगे कि उसकेसाथ क्या करना है। इसलिए गुरु एक वाहन होता है, जो तुम्हें तुम्हारे अस्तित्त्व के वर्तमान आयामों के परे ले जाना चाहता है। हम गुरु को एक अन्तरिक्षयान कह सकते हैं। तुम यह नहीं जान पाओगे कि उसका उपयोग कैसे किया जाए। एक अन्तरिक्षयान को कैसे संचालित करना है, यह तुम नहीं जान पाओगे। संभवत: तुम एक कार चारों तरफ चला सकते हो, लेकिन एक वाहन जो तुम्हें दूसरे आयामों में ले जा सकता है, तुम नहीं जानते हो कि उसे कैसे संचालित करना है। इसलिए इसका उपयोग करने का प्रयास मत करो, तुम बस इसके साथ रहना सीखो।
अन्तरिक्षयान में जो जगह है, जो खालीपन है, जो एक रिक्तता है, अगर तुम उसके भीतर बस रहना सीख जाते हो, तो वह जहां कहीं भी जाएगा, तुम्हें वहां लेकर जाएगा, है कि नहीं? इसलिए तुम उसके खाली स्थान में बैठना सीखो, उसका उपयोग करने का प्रयास मत करो। उसका उपयोग करने का प्रयास एक बहुत बड़ी भूल होगी। गुरु का उपयोग करने का प्रयास एक बहुत बड़ी भूल है, जिसे सदियों से लाखों जिज्ञासु करते आ रहे हैं। जैसा कि मैं उस दिन बता रहा था कि वह लड़का, वह नवयुवक, जो मुझे केदारनाथ से लौटते समय रास्ते में मिला था, बहुत सरल था। वह अपने गुरु के साथ आठ वर्षों से रह रहा था। गुरु ने उसे कोई साधना नहीं दी थी। मैं बस उनकी सेवा करता हूं और अभी प्रतीक्षा में हूं। जब वे साधना देंगे फिर मैं उसे करूंगा। अभी तो मैं बस वहां रहता हूं। वे जो कुछ भी कहते हैं, मैं करता हूं। मैं झाडू लगाता हूं, सफाई करता हूं, खाना बनाता हूं और बस प्रतीक्षा में हूं, उस आदमी ने कहा। वह निश्चित रूप से जान लेगा, इस संबंध में कोई प्रश्न ही नहीं है। एक आदमी जो इस तरह से हो सकता है, वह एक बुद्धिमान व्यक्ति है, मूर्ख नहीं है। अगर तुमने उसके साथ उन दूसरे चार लोगों को देखा हो, वे बड़े तेजस्वी और बुद्धिमान लोग थे। वे लोग बकरे की तरह नहीं थे, बल्कि आठ सालों तक बेहिचक प्रतीक्षा करने को तैयार थे, बिना किसी प्रक्रिया में, एक साधारण सी भी प्रक्रिया में बिना दीक्षित हुए। हरेक छोटी-छोटी बातों पर उसमें से बिना उतरे, अन्तरिक्ष-यान में बस बैठना सीखो। हो सकता है कि तुम कहीं न पहुंचो, बस उनके खालीपन में रहना सीखो। जो होना होगा, वह होगा।
बिना गुरु के कोई आध्यात्मिक प्रक्रिया नहीं हो सकती। उसके बिना तुम स्वयं को रूपांतरित नहीं कर सकते। तुम अपने आप को एक ऐसी चीज में कैसे रूपांतरित कर सकते हो जिसे तुम नहीं जानते हो? तुम केवल उसी दिशा में काम कर सकते हो जिसे तुम जानते हो, है कि नहीं? वह काम कैसे कर सकते हो, जिसे तुम नहीं जानते हो? उसे करने के लिए तुम्हें इतना चेतन या जागरूक होना होगा कि तुम इस अस्तित्त्व में गमन कर रहे या एक खास दिशा में गमन की चेष्टï कर रहे ऊर्जा, के हर एक पहलू की प्राकृतिक प्रवृत्ति को देख सको। तुम्हें इसे समझने की जरूरत होगी और उस मार्ग पर अग्रसर होना होगा। केवल वही व्यक्ति जिसमें चेतना की इतनी समझ है, बिना गुरु केयात्रा कर सकता है। अन्यथा, अगर वे बिना गुरु के जाते हैं, तो वे बस लड़खड़ाते, लड़खड़ाते और लड़खड़ाते रहेंगे।
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