Broken Heart Syndrome: हमारे शरीर का सबसे नाजुक और संवेदनशील पार्ट होता है दिल यानी हार्ट। दुख की खबर हो या किसी प्रकार की खुशी, हमारा दिल ही सबसे पहले प्रतिक्रिया देता है। जब शरीर भावनात्मक या शारीरिक तनाव महसूस करता है तो अस्थायी हार्ट कंडीशन उत्पन्न होती हैं, जिसे ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है। इस स्थिति में हार्ट फंक्शनिंग कम हो जाती है। साथ ही कई स्थितियों में माइनर हार्ट अटैक भी आ सकता है। ये समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है लेकिन सामान्यतौर पर इसका शिकार युवा और अधिक उम्र के व्यक्ति होते हैं। आखिर ये सिंड्रोम क्या है और ये हमारे शरीर को कैसे प्रभावित करता है चलिए जानते हैं इसके बारे में।
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क्या है ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम एक तरह की हार्ट कंडीशन है, जो मानसिक और भावनात्मक तनाव के कारण उत्पन्न होती है। इसे टैकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी के नाम से भी जाना जाता है। इस स्थिति में शरीर तेजी से हार्मोन रिलीज करता है, जिससे दिल कमजोरी महसूस करने लगता है। इसके लक्षण हार्ट अटैक के समान होते हैं, जिसमें सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई और चक्कर आ सकते हैं। साथ ही हार्ट की फंक्शनिंग भी धीमी हो जाती है। हालांकि ये अस्थायी समस्या है जिससे उभरने में 2-3 हफ्ते का समय लग सकता है।
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम का कारण
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के कारणों के बारे में स्पष्टतौर कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन माना जाता है कि ये समस्या एड्रेनालाइन नामक स्ट्रेस हार्मोन की वृद्धि की वजह से उत्पन्न होती है। इसके लिए मानसिक और भावनात्मक तनाव जिम्मेदार होता है जैसे ब्रेकअप, किसी करीबी की मृत्यु, एक्सीडेंट या बिछड़ना। इसके अलावा शारीरिक तनाव भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हो सकता है।
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम से कैसे करें डील

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम एक अस्थायी कंडीशन है जिससे उभरने में 2-3 तीन हफ्ते का समय लग सकता है। सामान्यतौर पर इस स्थिति को हार्ट अटैक से संबंधित माना जाता है लेकिन इसका उपचार समय रहते किया जा सकता है। ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के लिए स्पेसिफिक मेडिकेशन नहीं है लेकिन इससे उभरने के लिए तनाव को कम करने वाली दवाएं काम आ सकती हैं। इसके अलावा ईसीजी और ईकेजी करवाना आवश्कयक होता है, जिससे हार्ट की सही स्थिति का पता लगाया जा सके।
– ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम से उभरने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव करना बेहद जरूरी है।
– हार्मोन को स्थिर और नॉर्मल करने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज और योगा का सहारा लिया जा सकता है।
– स्ट्रेस लेवल को कम करने के लिए दवाईयों के अलावा काउंसलिंग की जा सकती है।
– कई बार उपचार के बाद ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम दोबारा उभर सकता है, इसलिए 4-6 हफ्ते के बाद ईकोकार्डियोग्राम आवश्यक रूप से करवाया जा सकता है।
– डायबिटीज और हाई बीपी के मरीजों को विशेष रूप से तनाव को कम करने का प्रयास करना चाहिए।
– मानसिक और शारीरिक तनाव को कम करने के लिए हिल स्टेशन का टूर प्लान कर सकते हैं जहां मन को शांति मिल सके।
– परिजनों और दोस्तों से बात करें ताकि स्ट्रेस को कम किया जा सके।
