स्ट्रेसफुल या भावनात्मक घटनाओं के चलते “ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम” बीमारी होती है। पुरूषों के मुकाबले इस बीमारी से महिलाएं अधिक पीड़ित पायी जाती हैं और 50 से 70 उम्र के बीच महिलाओं के बीच यह बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है। क्योंकि मेनोपोज के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन हारमोन के लेवल में गिरावट आ जाती है जोकि बीएचएस की बीमारी होने का एक मुख्य कारक माना जाता है।
लक्षण
बीएचएस बीमारी के लक्षण कष्टकारी होते हैं । इस बीमारी में दिल का आकार कुछ देर के लिए बड़ा हो जाता है और ढंग से पंप नहीं करता है, जबकि दिल की बाकी क्रियाएं सामान्य ढंग से होती रहती र्हैं।
- छाती में कड़ापन या दर्द का एहसास होना
- दिल की धड़कन अनीयमित हो जाना
- सांस फूलना व कमजोरी महसूस होना
- भूख और नींद की कमी
- अकेलापन, निराशा और पूर्णतः खालीपन का अहसास
- लगातार या रुक-रुक कर रूलाई आना
- नफरत का अहसास
बचाव व उपचार
अधिकतर देखा जाता है कि जब हमे ऊपर बताए गए लक्षण नजर आते हैं तो हम इसे हार्ट अटैक समझ लेते हैं लेकिन ऐसी स्थिति महज तात्कालिक होती हैं और सामान्यतः एक सप्ताह में ठीक की जा सकती हैं। ऐसे मामलों में बीएचएस से पीड़ित व्यक्ति के लिए जरूरी है कि वह हिम्मत करे और हालात पर काबू पाते हुए अपने सामान्य क्रियाकलापों को जारी रखे।
हमारा दिल हमारे पांच महत्वपूर्ण अंगों में एक है और इसे स्पेशल केयर की जरूरत होती है। दिल के काम करने में गड़बड़ी का एक छोटा सा लक्षण भी किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकता है और इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, आपको चाहिए कि समय रहते उचित कदम उठाए जाए।
नियमित जांच और डाॅक्टर से मिलना हमारे स्वास्थ्य संबंधी कार्यों का हिस्सा होना चहिए। इन सबके साथ ही अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करना चाहिए ताकि दिल की किसी भी बीमारी के खतरे को न्यूनतम स्तर तक कम किया जा सके, इसके लिए ये उपाय करे जैसे –
- सप्ताह के अधिकतम दिनों में किसी-न-किसी तरह के शारीरिक श्रम करें,
- हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट लें,
- सिगरेट पीने और तम्बाकू चबाने से परहेज करें,
- हाई और लो ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कराएं ।
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