Type 2 Diabetes Causes: अपने आसपास नजर दौड़ाएं तो आपको हर उम्र के व्यक्ति डायबिटीज के शिकार मिल जाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक पूरी दुनिया में तकरीबन 34 करोड़ 10 लाख लोग इससे पीड़ित हैं जिनमें करीब 7 करोड़ 70 लाख मरीज भारत में हैं और कई लोग इसके मरीज बनने के कगार पर खड़े हैं। डायबिटीज वास्तव में बीमारी नहीं, एक मेटाबोलिक सिंड्रोम है, जो कई बिमारियों का घर भी है।
पहले माना जाता था कि डायबिटीज जेनेटिक कारणों से प्रौढ़ावस्था या मिडिल एज में जाकर होती है। लेकिन आज गलत आदतों और खराब जीवनशैली की बदौलत डायबिटीज का खतरा बढ़ गया है।
अनुशासित दिनचर्या को फोलो न करना
कारण चाहे कुछ भी रहे आज अकसर हम सभी सदियों से चली आ रही जीवनशैली पर अमल करना भूलतेे जा रहे हैं- ‘‘अर्ली टू बेड, अर्ली टू राइज। मैक मैन हेल्दी-वैल्दी एंड वाइज।‘‘ इसके बनिस्पत हमारी दिनचर्या देर रात तक जागना, दिन चढ़े उठना और अफरा-तफरी में अपने-अपने कामों में लग जाना हो गई है। हेल्दी रहने के लिए व्यायाम आदि करना तो दूर, कई बार ब्रेकफास्ट भी स्किप कर देते हैं। जिसकी भरपाई में बड़े चाव से जंक फूड खाते हैं। जिस पर ध्यान न देने पर हममें से कई लोग डायबिटीज, मोटापा, ब्लड प्रेशर जैसी बिमारियों की गिरफ्त में आ जाते हैं।
इसे देखते हुए अपनी दिनचर्या साइकिल; सिरकेडियन ऋदम के कामों में नियमितता जरूरी है। इसलिए व्यस्तता के बावजूद सोने-उठने के टाइम, ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर, पूरी दिनचर्या नियत समय पर करने की कोशिश करें। ब्रेकफास्ट स्किप न करें और रात का खाना सोने से तीन घंटे पहले जरूर कर लें। ताकि रात को इंसुलिन का स्राव ठीक तरह हो और डायबिटीज जैसी बीमारी को कंट्रोल में रख पाएं।

स्वस्थ वजन कायम न करना
व्यस्त जीवनशैली और आलस की वजह से अपनी सेहत के लिए टाइम न निकालना और नियमित रूप से व्यायाम न करना मोटापे और भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज को बढ़ावा देता है।

जरूरी है कि शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। रक्त में ग्लूकोज के स्तर के हेल्दी रेंज में रखने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। एक्सरसाइज करने से शरीर में एंडोर्फिन कैमिकल रिलीज होता है जो तनाव कम कर शरीर को रिलेक्स करने में मदद करता है। व्यायाम करने से शरीर में रक्तसंचार सही रहता है, शूगर बर्न होती है और ब्लड शूगर लेवल नियंत्रण में रहता है। विशेषज्ञों का दावा है कि अगर मरीज अपना वजन 7.10 प्रतिशत कम कर लेते हैं तो डायबिटीज नियंत्रित ही नहीं रिवर्स भी हो सकती है।
आरामपरस्त जीवन शैली
काम की वजह से या आरामपरस्ती के चलते ज्यादा देर तक बैठे रहना डायबिटीज को ट्रिगर करता है। एक शोध के हिसाब से अधिक बैठने से ब्लड शूगर लेवल बढ़ जाता है और इंसुलिन रजिस्टेंस कम हो जाता है।

इससे बचने के लिए लगातार बैठे न रहें, हर आधा घंटे बाद कम से कम 5 मिनट का ब्रेक लें। वाॅक करें या छोटा-मोटा काम करते रहें। जहां तक हो सके पूरे दिन एक्टिव रहना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि जितनी मात्रा में आप सेवन करते हैं उसे एक्सरसाइज करके खर्च करना भी जरूरी हैैै। अपनी सहूलियत क्षमता और पसंद के हिसाब से नियमित रूप से 20.30 मिनट कोई भी शारीरिक परिश्रम वाला काम या फिजीकल एक्टिविटी जरूर करें। वो एक्टिविटीज मार्निंग वाॅक, योग, व्यायाम, मेडिटेशन कुछ भी हो सकती है।
तनावग्रस्त रहना
चाहे वो घर-परिवार को लेकर हो, पढ़ाई में अव्वल आने की होड़ हो या कम समय में ज्यादा काम करने की जद्दोजहद को लेकर हो। तनाव के समय एड्रानलिन हार्मोन का रिसाव होता है जो शरीर में ऑक्सीटोसिन और सेरोटिन हार्मोन की कार्यक्षमता पर असर डालता है। इमोशनल इटिंग की प्रवृत्ति बढ़ जाती है यानी अपनी बोरियत, अकेलेपन दूर करने के लिए बार-बार स्नैक्स खाने को आसान जरिया मानते है। इससे शरीर में ब्लड शूगर लेवल बढ़ जाता है जो डायबिटिक लोगों के लिए खतरनाक होता है।
पूरी नींद न लेना

विशेषज्ञों के हिसाब से सोना या साउंड स्लीप लेना वाकईं हमारे स्वास्थ्य के लिए सोना है। देर रात तक काम करने की वजह से दिन भर में बामुश्किल 4-5 घंटे ही सोते हैं। लेकिन इसका उनकी सेहत पर खासा असर पड़ता है। कम सोना डायबिटीज को ट्रिगर करता है। देर तक जागने के लिए चाय-काॅफी जैसे कैफीनयुक्त पेय और भूख लगने पर स्नैक्स का सेवन करना एक्सट्रा कैलोरी या फैट का कारण तो बनता ही है। ऊपर से कम सोने से व्यक्ति दिन भर थकान और तनाव से ग्रस्त रहता है जिससे उसका ब्लड शूगर लेवल बढ़ जाता है।
इससे बचने के लिए अपने सोने का रूटीन तय करें। अच्छी सेहत के लिए अपनी नींद से समझौता नहीं करना चाहिए । दिन में कम से कम 7-8 घंटे की जरूर सोना चाहिए।
नमक और चीनी का अधिक सेवन करना

एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन भर में ज्यादा से ज्यादा 25 ग्राम या 5 चम्मच अतिरिक्त चीनी और 5 ग्राम या 1 चम्मच से कम नमक का सेवन करना बेहतर है। नमकीन स्नैक्स, चिप्स, आचार, साॅस जैसी चीजें अवायड करनी चाहिए जिनमें मौजूद नमक और सेचुरेटिड फैट नुकसानदायक है। ज्यादा मात्रा में ली गई चीनी फैट में बदलकर शरीर में जमा हो जाती है और ज्यादा नमक शरीर में वाॅटर रजिस्टेंस का कारण बनता है। जिससे व्यक्ति का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है और भविष्य में मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
अनहेल्दी फूड के प्रति बढ़ता क्रेज

घर के बने पौष्टिक तत्वों से संतुलित और सुपाच्य आहार के बजाय फास्ट फूड या जंक फूड का प्रचलन दिनोंदिन बढ़ रहा है जिसमें पौष्टिक तत्वों की कमी और ट्रांसफैट की अधिकता होने पर डायबिटीज शूगर लेवल बढ़ने का खतरा बना रहता है।
खान-पान संयमित और संतुलित होना चाहिए। संतुलित और पौष्टिक भोजन करना जरूरी है। डाइट में साबुत अनाज, मल्टीग्रेन आटा, छिलके वाली दालें, स्प्राउट्स, हरी सब्जियां, हरी पत्तेदार सब्जियां, फलए नट्स जैसी हाई फाइबरयुक्त और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट जरूर शामिल करनी चाहिए। मैदा, चीनी जैसी रिफाइंड चीेजें, वसायुक्त भोजन और अधिक कार्बोहाइड्रेट या कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ खाने से परहेज करना चाहिए। चोकरयुक्त गेहूं का आटा या मल्टीग्रेन आटा खाएं जिसमें जौ, बाजरा जई चना मिला हो। यह आटा शूगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है। नियमित तौर पर अखरोट, बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स जरूर लें। इनमें मौजूद मैग्नीशियम डायबिटीज की रोकथाम में मदद करता है।
बार-बार खाना या फूड क्रेविंग होना

हममें से ज्यादातर लोग दिन में 3 मुख्य मील के अलावा क्रेविंग को शांत करने के लिए दिन भर कुछ न कुछ खाते रहते हैं। सोडियम, शूगर और फैट में रिच इन चीजों से पेट तो नहीं भरता, शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जरूर बढ़ती रहती है। अनचाहे ही डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बिमारियों का आप शिकार हो सकते हैं।
अपने भोजन संबंधी आदतों में बदलाव लाएं। कोशिश करें कि हर मील में प्रोटीन रिच खाद्य पदार्थ जरूर शामिल करें जैसे-दालें, दूध और दूध से बने पदार्थ, अंडे, साल्मन मछली, चिकन। प्रोटीन को पचाने में काफी समय लगता है। जिससे पेट देर तक भरा होने का अहसास रहता है। हर 3 घंटे में थोड़ी मात्रा में हेल्दी चीजें (फल, ड्राई फ्रूट्स, सीड्स) थोड़ी-थोड़ी मात्रा में जरूर खाएं जिससे एनर्जी लेवल मेंटेन रहे। ज्यादा लंबा गैप आने पर शरीर में शूगर का लेवल बढ़ने लगता है और कमजोरी महसूस होने लगती है।
स्मोकिंग और एल्कोहल का सेवन करना

स्मोकिंग और एल्कोहल का सेवन स्टेटस सिंबल भी बन गया है जो धीरे-धीरे कई बीमारियों का घर बना देता है। डायबिटीज की शिकायत है तो एल्कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए। एल्कोहल का सेवन करने के साथ अगर वो खाना नहीं खाते तो कई बार शूगर लो होने से बेहोशी आ सकती है।
रेगुलर हैल्थ चैकअप न कराना

आमतौर पर हम सभी की मानसिकता रहती है कि जब तक कोई बीमारी न हो, तब तक डाॅक्टर के पास जाना बेकार है। यहां तक कि डायबिटीज का अंदेशा होने पर भी कतराते हैं। जबकि 45 वर्ष की उम्र के बाद हर व्यक्ति को रेगुलर हैल्थ चैकअप कराना चाहिए। डायबिटीज हो तो डॉक्टर को कंसल्ट करना और उसकी हिदायतों को पूरी तरह फोलो करना चाहिए।
(डाॅ संजय कालरा, एंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया, दिल्ली)
