Summary: स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल याददाश्त के लिए खतरा
अत्यधिक स्मार्टफोन उपयोग ध्यान और याददाश्त पर नकारात्मक असर डाल सकता है, जिससे डिजिटल डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है।
डिजिटल डिटॉक्स, ब्रेन एक्सरसाइज और नो-फोन ज़ोन अपनाकर आप अपनी मेमोरी और फोकस को बेहतर बना सकते हैं।
Smartphone Addiction: आज का युग स्मार्टफोन का युग है। सुबह की शुरुआत से लेकर रात को सोने से पहले तक हर समय हमारे हाथ में स्मार्टफोन रहता है। इसमें कोई शक नहीं कि स्मार्टफोन ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग हमारे मानसिक स्वास्थ्य और विशेष रूप से हमारी याददाश्त पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
क्या कहती हैं रिसर्च?

कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों और मेडिकल जर्नल्स में यह बात सामने आई है कि जो लोग दिन भर में 4-5 घंटे से अधिक समय तक मोबाइल स्क्रीन पर रहते हैं, उनकी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और दीर्घकालिक याददाश्त (long-term memory) पर असर पड़ता है। यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया की एक रिसर्च में पाया गया कि मोबाइल पर नोटिफिकेशन और मल्टीटास्किंग मस्तिष्क के प्रेफ़्रंटल कॉर्टेक्स को थका देती है, जिससे सूचना को लंबे समय तक याद रखने की क्षमता घटती है। स्मार्टफ़ोन के अधिक इटेसमैल से डिजिटल डिमेंशिया नामक एक नई स्थिति सामने आ रही है।
कैसे बिगाड़ता है स्मार्टफोन आपकी याददाश्त
निरंतर डिस्टर्बेंस से ब्रेन फोकस नहीं कर पाता
मोबाइल पर लगातार आ रहे नोटिफिकेशन, कॉल्स और मैसेज ब्रेन को एक कार्य पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित नहीं करने देते।
डिजिटल डिपेंडेंसी
आजकल हमें फोन में सेव चीजें जैसे फोन नंबर, टू-डू लिस्ट, पासवर्ड याद रखने की जरूरत ही नहीं पड़ती। इससे ब्रेन की प्राकृतिक रूप से चीज़ों को याद रखने की क्षमता कम हो जाती है।
नींद की कमी

रात को देर तक स्क्रीन देखने से नींद पूरी नहीं होती, जिससे मस्तिष्क की मेमोरी कंसोलिडेशन प्रक्रिया बाधित होती है।
मल्टीटास्किंग का दबाव
स्मार्टफोन पर एक साथ कई ऐप्स चलाना ब्रेन को ओवरलोड करता है और इससे याद रखने की क्षमता पर असर पड़ता है।
बचने के लिए अपनायें ये तरीक़े
डिजिटल डिटॉक्स का अभ्यास करें
हर दिन एक निर्धारित समय के लिए स्मार्टफोन से दूरी बनाएं। जैसे सुबह उठने के एक घंटे तक और रात को सोने से 1 घंटा पहले फोन न छुएं।
नो-फोन ज़ोन बनाएं
कुछ समय के लिए घर में नो-फ़ोन जोन बनाएँ और घर के सभी लोग इस नियम को फॉलो करें। खासकर पढ़ाई, खाने और सोने के समय मोबाइल पूरी तरह बंद या साइलेंट रखें।
ब्रेन एक्सरसाइज करें
रोज़ 10-15 मिनट के लिए पजल, सुडोकू या याददाश्त बढ़ाने वाले खेल खेलें। इससे आपकी सोचने की क्षमता बढ़ेगी।
पढ़ने और लिखने की आदत डालें

हमेशा फ़ोन में रील्स, वीडियो और न्यूज़ या दूसरी चीज़ें देखने की जगह न्यूज़पेपर्स और बुक्स पढ़ने की आदत बनाएँ। डिजिटल नोट्स की जगह डायरी में लिखने की आदत डालें।
फिजिकल एक्टिविटी और मेडिटेशन
शारीरिक व्यायाम और नियमित मेडिटेशन दिमाग़ को शांति और ताजगी देता है। हर दिन कम से कम तीस मिनट कोई भी एक्सरसाइज ज़रूर करें। इससे शरीर के साथ आपका दिमाग़ भी तरोताज़ा रहेगा। मैडिटेशन से आप एकाग्र मन से कम कर सकेंगे और यह याददाश्त भी सुधारने में सहायता करेगा।
तो, आप भी अब से स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल सोच-समझकर करें। टेक्नोलॉजी का उपयोग तभी तक सही है जब तक वह हमारी क्षमताओं को बढ़ाए, न कि खत्म करे। अगर हम समय रहते सचेत न हुए, तो डिजिटल डिमेंशिया जैसी समस्याएं आम हो जाएंगी।
