अगर आपको भी कोविड से रिकवर होने के लिए दवाइयों से लेकर कोई गलत फहमी है तो आज आप अपनी सभी गलत फहमियां स्पष्ट कर लीजिए। कुछ लोग खुद ही कहीं से पढ़ कर या खुद डॉक्टर बन कर ही अपनी दवाइयां शुरू कर देते हैं लेकिन ऐसा करने से उनकी हालत और अधिक खराब हो सकती है क्योंकि वे दवाइयां  साइड इफेक्ट्स भी करती हैं। इसलिए आपको निम्न प्रचलित दवाइयों के बारे में जानकारी होना जरूरी है कि कौन सी दवाइयां कोरोनावायरस से इंफेक्शन के इलाज में सहायक है और कौन सी नहीं।

पैरासिटामोल:पैरासिटामोल का प्रयोग केवल बुखार होने पर या शरीर में दर्द होने पर ही करना चाहिए। लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि मरीज को एक दिन में 3 ग्राम से अधिक मात्रा नहीं लेनी चाहिए। लेकिन आपको इस टैबलेट का प्रयोग दिन रात नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से डॉक्टरों को मरीज के बुखार को मॉनिटर करने में समस्या उत्पन्न होती है।

एंटी वायरल : कुछ एंटी वायरल दवाइयां जो कोविड 19 के लिए प्रभावी मानी गई हैं वह हैं : लोपिनाविर, रिटोनावीर, रेमदेविसीर और फविपीरवीर। लेकिन आज के समय जो एकमात्र दवाई कोविड के लिए प्रभावी मानी जा रही है वह है रेमदेविसीर। अन्य दवाइयां किसी काम नहीं आ रही है। एक छोटे से ट्रायल के दौरान पता लगाया गया कि फविपीरवीर दवा बिल्कुल भी प्रभावी नहीं है। इसके बावजूद भी देश में लोग इसे खरीद रहे है और प्रयोग कर रहे हैं जबकि इसके कारण लोगों को साइड इफेक्ट भी देखने को मिल रहे हैं हालांकि इसका कोई भी लाभ नहीं मिल रहा है। हमारे देश के अलावा कोई भी जगह इस दवाई को प्रयोग नहीं कर रही है। इंटरफेरॉन भी कोविड 19 के लिए ट्राई की गई जिसमें एंटी वायरल प्रभाव थे। लेकिन WHO ने उसे भी किसी काम का नहीं बताया। रिकवरी ट्रायल में पाया गया कि अगर इस ड्रग को कोर्टिको स्टीरॉयड के साथ प्रयोग किया जाता है तो यह लाभदायक साबित हो सकती है।

एंटी बायोटिक्स : आपको यह सलाह नहीं दी जाती है कि आप ओवर द काउंटर दवाइयों या एंटी बायोटिक्स का प्रयोग करें। एंटी बायोटिक्स, एंटी बैक्टेरियल होती हैं। इनका कोविड को ठीक करने में किसी प्रकार का रोल नहीं होता है लेकिन यह संदेह माना जाता है कि हो सकता है आपको कोविड के साथ साथ कोई अन्य इंफेक्शन भी हो जिसे ठीक करने में यह लाभदायक रह सकती है। लेकिन केवल शुरुआत के दो हफ्तों में। एजीथ्रोमीसीन और डॉक्सीसाइकिलन जैसी दवाइयों का नियमित और रूटीन प्रयोग बिल्कुल भी सुझाया नहीं जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक एंटी बायोटिक्स का आपको कोविड से बचाने में किसी प्रकार का रोल नहीं है और अगर आप इनका प्रयोग करते हैं तो इससे आपका अस्पताल में एडमिट रहने का समय बढ़ सकता है और यहां तक की आपके मृत्यु की संभावना भी अधिक हो सकती है।

आइवरमेक्टिन : यह एक एंटी पैरासिटिक ड्रग है जो SaRS CoV 2 को लैब में न्यूट्रलाइज करने में लाभदायक मानी गई है। इससे थोड़ी सी उम्मीद जगती है कि यह इंसानों के लिए भी प्रभावी हो सकती है लेकिन ऐसा किसी भी प्रकार का ट्रायल नहीं किया गया है और न ही इसका प्रभाव पाया गया है। कुछ रिसर्च का मानना है कि यह प्रभावी हो सकती है लेकिन वह अधिक साइंटिफिक प्रमाणों पर आधारित नहीं हैं। इसलिए इसका रूटीन में प्रयोग नही करना चाहिए।

रेमदेविसिर : यह लोगों की जान बचाने में समर्थ नहीं है। बहुत सी स्टडीज यह साबित कर चुकी हैं। यह केवल उन लक्षणों की गंभीरता को कम कर सकती है जिनके कारण लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। यह फेफड़ों के लिए लाभदायक है। अगर इसे बीमारी के पहले हफ्ते में दिया जाए तो यह और अधिक लाभदायक हो सकती है। लेकिन जिन लोगों के लक्षण अधिक गंभीर नहीं हैं और जिनको अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है, उन लोगो को इस दवाई का प्रयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे उन लोगों को इसकी पर्याप्त मात्रा हासिल नहीं होगी जिन्हें सच में इसकी आवश्यकता है।उन मरीजों को न दें जिनका घर पर इलाज चल रहा हो और जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर न हों।

प्लाज्मा : प्लेसिड रिकवरी और प्लेटिना ऐसे ट्रायल्स थे जो साबित कर चुके हैं कि प्लाज्मा जैसा इलाज प्रभावी नहीं है। लेकिन अधिक रिस्क वाले लोगों को अगर बीमारी की शुरुआत में ही यह ट्रीटमेंट दिया जाए तो इसकी एंटी बॉडीज से उनको थोड़ा लाभ मिल सकता है। लेकिन जब मरीज अधिक गंभीर बीमार हो जाता है तो इसका प्रयोग करना व्यर्थ है।

स्टीरॉयड : एक रिकवरी ट्रायल के दौरान पता लगाया गया है कि अगर स्टेरॉइड्स को लो ऑक्सीजन लेवल मरीजों को दिया जाए तो वह जान बचा सकता है। लेकिन इसका प्रयोग केवल उन्हीं मरीजों पर करना चाहिए जिनकी हालत बहुत गंभीर है और जिनके ऑक्सीजन लेवल सच में कम है। अगर नॉर्मल ऑक्सीजन लेवल वाला मरीज इसका प्रयोग करता है तो उसकी हालत और बिगड़ सकती है। इसका रेगुलर प्रयोग तब तक नहीं करना चाहिए जब तक मरीज की ऑक्सीजन नियमित रूप से कम नहीं हो रही हो। यह जीवन बचाने में प्रभावी है लेकिन केवल तब जब इसका प्रयोग ध्यानपूर्वक किया जाए।मेडिकेशन की तरह की कुछ अन्य बातों को लेकर भी निरंतर भ्रामक स्थिति बनी हुई है। आइए जानते हैं इन बातों में से कितनी सही है और कितनी निरर्थक

पानी से फैलता है :कोविड 19 कोई जलजनित बीमारी नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक कोई ऐसा प्रमाण नहीं है जिससे यह सुझाया जा सके कि कोरोना वायरस किसी कोविड संक्रमित क्षेत्र से पानी के माध्यम से फैल सकता है।

हवा से फैलता है :प्रमाणों के मुताबिक कोरोना वायरस नजदीकी संपर्क में आने के कारण फैलता है। यह संपर्क लगभग 1 मीटर का भी हो सकता है। एक व्यक्ति तब संक्रमित होता है जब वह संक्रमित ड्रॉपलेट को अपने मुंह, आंखों या नाक के द्वारा अंदर इनहेल कर लेता है। सार्वजनिक जगहों में हवा के माध्यम से संक्रमण के फैलने को इंकार भी नहीं किया जा सकता है।

मेडिकल कंसंट्रेटर का प्रयोग करना सही नहीं : जिन लोगों को लंबे समय से रेस्पिरेटरी बीमारियां हैं और जिनका ऑक्सीजन लेवल 88 से 92 के बीच भी है तो उन्हें इससे अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती है। जिन मरीजों को हल्का कोविड न्यूमोनिया है और जिनका ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल 94 से अधिक है उन्हें अस्पताल भर्ती करवाने से पहले ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के द्वारा लाभ दिया जा सकता है।

ऑक्सीजन कंसंट्रेटर या ऑक्‍सीजन सिलेंडर :आप ऑक्सीजन सिलेंडर या ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का प्रयोग अपनी उपलब्धता के हिसाब से कर सकते हैं। अगर मरीज अधिक गंभीर नहीं है तो आप दोनों में से किसी भी एक ऑप्शन का प्रयोग कर सकते हैं लेकिन अगर अधिक गंभीर है तो आप कंसंट्रेटर का प्रयोग न करें। अगर सिलेंडर का प्रयोग करने के बाद भी मरीज ठीक नहीं हो रहा है तो उसको तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाया जाए।

हली डोज के बाद संक्रमित हो जाने पर न लें दूसरी डोज़:यह बात बिल्कुल गलत है। ‌एक्सपर्ट के अनुसार अगर कोई व्यक्ति वैक्सीन का पहला डोज लेने के बाद संक्रमित हो जाता है तो उसे दूसरा डोज पॉजिटिव पाए जाने के 6 हफ्तों बाद लेना चाहिए। उनका कहना है कि वैक्सीन का पहला डोज लेने के बाद वायरस से संक्रमित होने की संभावना 65% तक कम हो जाती है और दूसरा डोज लेने के बाद यह संभावना 80 से 90% तक कम हो जाती है।

गर्म पानी पीना व नहाना है फायदेमंद: यह बात पूरी तरह से सही नहीं। गर्म पानी पीने से कोरोना ठीक नहीं होगा। यह केवल लक्षणों को कम करने में लाभदायक है। एक लैब सेटिंग के दौरान वायरस को मारने के लिए लगभग 60 से 70 डिग्री तापमान का होना जरूरी है और गर्म पानी से नहाने के बाद भी आपके शरीर का तापमान 37 डिग्री के आसपास ही रहता है, इसलिए यह वायरस को खत्म नहीं कर सकता है।

डिक्सामिथेसन से कोविड का मरीज ठीक होता है: जी हां, इसको कई प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है जैसे – इसके प्रयोग से मृत्यु की संभावना में कमी आती है। जो लोग गंभीर हैं और वेंटीलेटर पर हैं, उन्हे लाभ कर सकती है। जिन्हें मॉडरेट बीमारी है और ऑक्सीजन की आवश्यकता है उनके लिए लाभदायक हो सकती है।

कोविड संक्रमित मां अपने बच्चे को दूध पिला सकती है: जी। यह भी सही है। एक कोरोना संक्रमित मां अपने बच्चे को दूध पिला सकती है। लेकिन उसे इस दौरान कुछ बचाव के उपायों का पालन करना होगा। जैसे इस दौरान मास्क का प्रयोग करें ताकि इंफेक्शन फैलने से बच सके। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो सकता हो कि वायरस दूध के माध्यम से भी फैल सकता है।

निष्कर्ष 

आजकल सोशल मीडिया या यूट्यूब पर बहुत से ऐसी बातें वायरल हो रही है जो पूरी तरह से सच नहीं। अच्छा होगा यदि आप किसी भी बात या मेडिकेशन को फॉलो करने से पहले उस बात की तह तक जाएं। यही नहीं अगर आप कोविड पॉजिटिव हैं या आपके परिवार में अथवा आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो संक्रमित है तो खुद से आपको किसी भी दवाई का प्रयोग नहीं करना चाहिए। चाहे वह कितनी ही प्रभावी क्यों न हो। भले ही आपने उसके बारे में किसी आर्टिकल या वीडियो में ही क्यों न सुना या पढ़ा हो। हो सकता है वह दवाई किसी स्पेशल स्थिति वाले मरीज के लिए ही लाभदायक हो और आपको उसके प्रयोग से और अधिक गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ जाये। इसलिए केवल डॉक्टर से परामर्श लेकर ही किसी दवाई का सेवन करें अन्यथा नहीं। वरना परिणाम गंभीर हो  आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है।

 

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