क्या आप जानते हैं कि आप का स्टूल भी आपकी सेहत के बारे में बहुत कुछ बताता है। आपके स्टूल का रंग, टेक्सचर और उसकी बहुत सी चीजें आपके लाइफस्टाइल द्वारा प्रभावित हो सकती हैं। यह आपके पाचन तंत्र में अगर कोई समस्या है तो उसका भी एक संकेत हो सकता है। आप कैसे बता सकते हैं कि आपका स्टूल हेल्दी है या नहीं? इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक हेल्दी स्टूल रंग में थोड़ा ब्राउन और थोड़ा सॉफ्ट टेक्सचर का होता है और इसकी बाउल गतिविधियों में भी आपको किसी तरह की समस्या नहीं आती है। लेकिन अगर इसके अलावा आपको रंग या टेक्सचर में कोई असमानता देखने को मिलती है तो वह आपके पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या जैसे गैस, एसिडिटी, डायरिया आदि का एक संकेत हो सकती हैं। तो आज हम बात करने वाले हैं कि आपका स्टूल आपकी सेहत के बारे में क्या कहता है लेकिन इससे पहले हम एक बार ब्रिस्टल स्टूल चार्ट के बारे में जान लेते हैं।

ब्रिस्टोल स्टूल स्केल

फेकल मैटर 75% पानी और 25% सॉलिड मैटर होता है जिसमें डेड बैक्टीरिया, बिना पचा हुआ भोजन और बहुत से इनॉर्गेनिक सब्सटेंस शामिल होते हैं। आपके ऐसे खाने को लगभग पचने में तीन दिन का समय लग जाता है और इसके बाद आपको बाउल मूवमेंट होती है। लेकिन जब खाना आपके सिस्टम से बहुत तेजी से या बहुत धीमे से पास होता है तो इससे आपके स्टूल के रंग, साइज और टेक्सचर पर असर पड़ सकता है और ब्रिस्टल स्टूल स्केल स्टूल को साइज और टेक्सचर के आधार पर लगभग 7 कैटेगरी में विभाजित करता है।

पहला प्रकार: अलग अलग कठोर गोलियां जोकि नट्स के जैसे दिखती हैं और यह पास होने में काफी दिक्कत होती है।

दूसरा प्रकार: सॉसेज शेप होती है लेकिन बीच बीच में थोड़े लंप्स भी देखने को मिल सकते हैं।

तीसरा प्रकार: इसकी शेप भी ए सॉसेज जैसी ही होती है लेकिन बीच बीच में टेक्सचर में दरार दिखाई देती हैं।

चौथा प्रकार: यह दिखने में एक सांप जैसा होता है और इसका टेक्सचर स्मूथ और सॉफ्ट होता है।

पांचवा प्रकार: यह अलग अलग टुकड़े होते हैं और इनके किनारे भी क्लीयर कट होते हैं और इन्हें पास करने में कोई दिक्कत नहीं होती है।

छठा प्रकार: इसके फुले हुए टुकड़े होते हैं और यह एक मैशी स्टूल होता है।

सांतवा प्रकार: यह पानी जैसा होता है, इसमें कोई भी सॉलिड टुकड़े नही होते हैं और यह सारा तरल ही होता है।

कब्ज के संकेत

पहला और दूसरा प्रकार बहुत कठोर और गठीला होता है और जब उसे पास किया जाता है तो उसमें दर्द भी हो सकता है। इस प्रकार का स्टूल लंबे समय तक आप की बड़ी आंत में रहता है और यह कब्ज का एक लक्षण भी हो सकता है। कब्ज के कई सारे कारण हो सकते हैं जिसमें दवाइयां, डाइट्री बदलाव, स्ट्रेस और बीमारी आदि शामिल हो सकते हैं।

हेल्दी रूप से होने वाले पाचन के संकेत

तीसरा और चौथा प्रकार पूरी तरह से नॉर्मल होता है और इसी प्रकार को स्टूल का हेल्दी प्रकार भी कहा जाता है। यह सामान्य रूप से सॉसेज या स्नेक शेप का ही होता है। इसे पास करने में भी किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं होती और यह फ्लश करने से चला जाता है।

डायरिया का लक्षण

पांचवा और आखिर वाला प्रकार थोड़ा सा अधिक पानी वाला और मैशी होता है। इस प्रकार के स्टूल आप की बड़ी आंत में बहुत ही कम समय के लिए रहते हैं और यह बहुत ही जल्द बाहर आ जाते हैं और यह डायरिया होता है। डायरिया भी आपके खाने पीने की आदतों, दवाइयों, स्ट्रेस, बीमारियों और इंफेक्शन आदि के कारण हो सकता है।

स्टूल का रंग और आपकी सेहत

आपके स्टूल का रंग भी आपकी किसी स्वास्थ्य सेहत की ओर इशारा कर सकता है। अगर आप का स्टूल रंग में आम तौर पर ब्राउन होता है तो यह पूरी तरह से नॉर्मल और सामान्य होता है। स्टूल चिंता का कारण तब बनता है जब उसका रंग लाल या काला होता है। यह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग का एक संकेत हो सकता है। अगर आपके स्टूल का रंग ग्रे होता है तो यह भी लीवर से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है जोकि आपको चेक करवा लेनी चाहिए। अगर पीला स्टूल आता है जिसमें से बहुत गंदी स्मेल आती है तो वह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपकी आंतें अच्छे से खाने को पचा नहीं पा रही है और न ही फैट को अब्जॉर्ब कर पा रही हैं। यह क्रोनिक पेनक्रिएटिस का भी एक लक्षण हो सकता है।

हेल्दी स्टूल को आप किस प्रकार संतुलित रख सकते हैं?

संतुलित और हाई फाइबर से युक्त डाइट खाएं: फाइबर आपको कब्ज की समस्या से छुटकारा दिला सकता है इसलिए हाई फाइबर से भरपूर चीजें खाएं ।

नियमित रूप से एक्सरसाइज करें: अगर आपको कब्ज है तो एक्सरसाइज करने से आपकी आंत खाने को पचाने में अधिक समय नहीं लगती है।

अपने आप को हाइड्रेटेड रखें: पानी आपके शरीर से टॉक्सिंस निकलने में मदद करता है इसलिए एक दिन में कम से कम 8 गिलास पानी तो जरूर पिएं।

अगर आपको लगता है कि आपका स्टूल हेल्दी नहीं है और इसमें कुछ असमानताएं हैं तो आपको एक बार डॉक्टर के पास जा कर अपना सारे शरीर का चेक अप जरूर करवा लेना चाहिए।

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