Sexual Harassment Trauma
Sexual Harassment Trauma

सेक्सुअल हेरेसमेंट छुपाना हो सकता है घातक, इसके ट्रॉमा से निकलने के लिए अपनाएं ये टिप्स

Sexual Harassment Trauma : भारत में अक्सर महिलाएं सेक्सुअल हेरेसमेंट को लेकर बात नहीं करती हैं, जिसकी वजह से उन्हें ट्रॉमा भी झेलना पड़ता है। आइए जानते हैं सेक्सुअल हेरेसमेंट ट्रॉमा से किस तरह निकलें?

Sexual Harassment Trauma : सेक्सुअल हेरेसमेंट (यौन उत्पीड़न) एक गंभीर समस्या है, जो न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी लोगों को प्रभावित कर सकती है। कई बार पीड़ित व्यक्ति समाज, परिवार या करियर को लेकर डर के कारण इसे छुपा लेते हैं, लेकिन यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकता है। अगर आप या आपका कोई करीबी इस दर्द से गुजर रहा है, तो उससे बाहर निकलने के लिए कुछ प्रभावी उपाय किए जा सकते हैं। आइए जानते हैं कि सेक्सुअल हेरेसमेंट के ट्रॉमा से कैसे निकलें?

सेक्सुअल हेरेसमेंट को छुपाने से अपराधी को बढ़ावा मिलता है और पीड़ित को और अधिक मानसिक पीड़ा सहनी पड़ती है। ऐसे में, जरूरी है कि आप इस बारे में भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें। इसके लिए आप, अपने परिवार, दोस्त, या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से अपनी भावनाएं साझा करें। अगर कार्यस्थल पर हुआ है, तो संबंधित अथॉरिटी को सूचित करें। इसके साथ ही जरूरत पड़े, तो कानूनी सहायता लें।

Break Silence
Break Silence

अक्सर पीड़ित खुद को दोषी मानने लगते हैं और सोचते हैं कि कहीं उन्होंने ही कोई गलती तो नहीं की। यह मानसिक दबाव और ट्रॉमा को बढ़ा सकता है। याद रखें कि इसमें गलती आपकी नहीं है, अपराधी की है। कोई भी व्यक्ति किसी के भी खिलाफ जबरदस्ती नहीं कर सकता।

अगर ट्रॉमा ज्यादा गहरा है, तो मनोवैज्ञानिक या काउंसलर से मदद लेने में झिझक न करें। थेरेपी से आपकी मानसिक स्थिति को समझने में मदद मिलेगी। डर और चिंता को दूर करने के उपाय मिलेंगे। आत्मविश्वास दोबारा हासिल करने में सहायता मिलेगी।

जब कोई बुरा अनुभव होता है, तो दिमाग बार-बार उसी घटना को दोहराने लगता है। इससे बचने के लिए अपनी रुचियों में खुद को व्यस्त रखें। नियमित रूप से योग, ध्यान (मेडिटेशन) और व्यायाम करें। म्यूजिक सुनें, किताबें पढ़ें या ट्रैवल करें।

Exercise
Exercise

भारत में महिलाओं और पुरुषों, दोनों के लिए यौन उत्पीड़न से बचाव के कानूनी प्रावधान हैं। अगर आपको न्याय चाहिए तो नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं। राष्ट्रीय महिला आयोग या हेल्पलाइन नंबर का उपयोग करें। साइबर क्राइम से जुड़ा मामला हो, तो ऑनलाइन शिकायत करें।

किसी ऐसे व्यक्ति से बात करें जिस पर आप भरोसा करते हैं, जैसे परिवार के सदस्य, दोस्त या काउंसलर। यह न सिर्फ आपको मानसिक रूप से हल्का महसूस कराएगा बल्कि आपको सही मार्गदर्शन भी मिल सकता है।

ध्यान (मेडिटेशन) और योग जैसी तकनीकें अपनाकर खुद को शांत और मजबूत बनाएं। सकारात्मक गतिविधियों में शामिल हों, जैसे पेंटिंग, संगीत, या यात्रा।

meditation
meditation

अन्य पीड़ितों और बचे लोगों से बात करना आपको अकेला महसूस करने से बचा सकता है। इसके लिए विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन सपोर्ट ग्रुप्स उपलब्ध हैं। आप ऐसे ग्रुप से जुड़कर खुद को सुरक्षित महसूस करा सकते हैं।

ट्रॉमा से उबरने में समय लगता है, इसलिए खुद को समय दें और धैर्य रखें। धीरे-धीरे, सही कदम उठाने से आप इस दर्द से उबर सकते हैं।

सेक्सुअल हेरेसमेंट को सहना और छुपाना मानसिक और भावनात्मक रूप से घातक हो सकता है। जरूरी है कि पीड़ित खुलकर अपनी बात कहें, कानूनी मदद लें और मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाएं। याद रखें आप अकेले नहीं हैं, मदद हमेशा उपलब्ध है।

निक्की मिश्रा पिछले 8 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लिख रही हैं। उन्होंने ग्वालियर के जीवाजी यूनिवर्सिटी से इकनॉमिक्स में एमए और भारतीय विद्या भवन से जर्नलिज़्म की पढ़ाई की है। लिखना उनके लिए सिर्फ एक प्रोफेशन...