Tea Bags Side Effects
Tea Bags Side Effects

Overview:

हाल ही में हुई एक स्टडी में सामने आया है कि रोजमर्रा की जिंदगी में लोग माइक्रोप्लास्टिक का सेवन कर रहे हैं। यह माइक्रोप्लास्टिक टी बैग्स के साथ ही प्लास्टिक कंटेनर, थैलियों और सॉस पैन के जरिए हमारे फूड में शामिल होते हैं।

Tea Bags Side Effects: सेहतमंद रहने के लिए अगर आप भी ग्रीन टी पीते हैं, लेकिन उसे टी बैग्स की मदद से बनाते हैं तो सावधान हो जाएं। क्योंकि टी बैग्स आपको जानलेवा बीमारियों का शिकार बना सकते हैं। हाल ही में हुई एक स्टडी में सामने आया है कि रोजमर्रा की जिंदगी में लोग माइक्रोप्लास्टिक का सेवन कर रहे हैं। यह माइक्रोप्लास्टिक टी बैग्स के साथ ही प्लास्टिक कंटेनर, थैलियों और सॉस पैन के जरिए हमारे फूड में शामिल होते हैं। हालांकि टी बैग्स सबसे प्रमुख जरिया बनकर उभरा है, क्योंकि लोगों को इससे जुड़ी जानकारी नहीं है। क्या है इन माइक्रोप्लास्टिक के नुकसान, आइए जानते हैं।

चौका देगा आपको यह अध्ययन

Tea Bags Side Effects-एक अध्ययन के अनुसार टी बैग्स के जरिए माइक्रोप्लास्टिक शरीर के अंदर प्रवेश करते हैं।
According to a study, microplastics enter the body through tea bags.

हाल ही में हुए एक अध्ययन के अनुसार टी बैग्स के जरिए माइक्रोप्लास्टिक शरीर के अंदर प्रवेश करते हैं। जिससे फर्टिलिटी से संबंधित बीमारियों के साथ ही कैंसर तक के जोखिम बढ़ जाते हैं। जब टी बैग्स को गर्म पानी में डुबोया जाता है तो उनमें से सूक्ष्म विषाक्त कण निकलते हैं, जो चाय के जरिए आपके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। अध्ययन में ब्रेस्ट मिल्क के साथ खून, लार और मल में भी माइक्रोप्लास्टिक मिला है। यह अध्ययन हाल ही में सैन फ्रांसिस्को की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की ओर से किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक के ये सूक्ष्म कण कोलन कैंसर का बड़ा कारण बन सकते हैं। ये आंतों के कैंसर का जोखिम भी बढ़ा देते हैं। इस अध्ययन में 3000 अध्ययनों के डेटा की समीक्षा की गई है। वहीं बार्सिलोना ऑटोनोमा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि एक टी बैग आपके शरीर में अरबों खतरनाक माइक्रोप्लास्टिक छोड़ सकता है।

फर्टिलिटी पर होता है गहरा असर

लाइफ साइंसेज जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार माइक्रोप्लास्टिक अनियंत्रित कोशिकाओं को ट्रिगर करता है और ऊतकों को तेजी से बढ़ाता है, जिससे फेफड़े, रक्त, स्तन, प्रोस्टेट और अंडाशय को प्रभावित करने वाले विभिन्न कैंसर होने का जोखिम बढ़ता है। माइक्रोप्लास्टिक प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करते हैं। यह पुरुषों के शुक्राणुओं को कई प्रकार से प्रभावित करते हैं। अध्ययन में शुक्राणुओं में भी प्लास्टिक कण मिले हैं। इनसे स्पर्म कम गतिशील होते हैं। साथ ही यह एग्ज की क्वालिटी को भी प्रभावित करते हैं। चीन में हुए एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि माइक्रोप्लास्टिक ग्लोबल लेवल पर फर्टिलिटी को प्रभावित कर रहे हैं। जाने अनजाने में यह इनफर्टिलिटी का बड़ा कारण बन रहे हैं।

ऐसे किया गया शोध

शोधकर्ताओं ने तीन प्रकार के टी बैग्स पर अध्ययन किया, जिसमें नायलॉन, पॉलीप्रोपलीन और सुपरमार्केट में उपलब्ध सामान्य टी बैग्स शामिल किए गए। इन टी बैग्स को 95° सेल्सियस तक गर्म पानी में डाला गया। इसमें पॉलीप्रोपलीन टी बैग्स सबसे अधिक खतरनाक पाया गया। गर्म पानी में डालने पर इसने प्रति मिलीलीटर 1.2 बिलियन माइक्रोप्लास्टिक्स छोड़े, ​जिनका औसत आकार 136.7 नैनोमीटर था। वहीं नायलॉन टी बैग्स ने प्रति मिलीलीटर 8.18 मिलियन माइक्रोप्लास्टिक्स छोड़े। ऐसे में बेहतर है कि आप टी बैग्स की जगह चाय पत्ती का सीधा इस्तेमाल करें। चाय हमेशा स्टील के बर्तन में बनाएं।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...