Partner Support in Pregnancy
Emotional support reduces stress and anxiety

Summary: गर्भावस्था में नींद ना आने के कारण

गर्भावस्था में हार्मोनल बदलाव, असहजता और चिंता नींद में रुकावट डालते हैं। सही मुद्रा, दिनचर्या और मानसिक शांति से सुकूनभरी नींद पाना संभव है।

Pregnancy sleep problems: किसी भी महिला के लिए गर्भावस्था का समय उसके जीवन का सबसे खूबसूरत पल होता है, लेकिन इस खूबसूरत पल के साथ आती है कुछ चुनौतियां जैसे, शारीरिक बदलाव, मानसिक बदलाव और भावनात्मक बदलाव। गर्भवती महिला के इन सभी बदलावों का असर पड़ता है महिला के आराम और नींद पर। आइए आज इस लेख में जानते हैं क्यों गर्भावस्था के दौरान एक महिला की नींद में इतनी बाधा पड़ती हैं। क्यों गर्भवती महिला की रात करवटें बदलते कट जाती है और साथ ही जानेंगे गर्भवती महिला अपने दिनचर्या में किन बदलावों को अपनाकर इस परेशानी को कम कर सकती है।

हार्मोनल बदलाव: गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में बढ़ा हुआ प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर महिला में चिंता, तनाव, बेचैनी और मूड स्विंग को बढ़ाता है। जिस वजह से महिला को नींद आने में परेशानी होती है।

बढ़ता पेट का आकार: जैसे-जैसे गर्भावस्था का समय बढ़ता है महिला के पेट का आकार भी बढ़ता है। जिस वजह से महिला को करवट लेने या सहज स्थिति में सोने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

रात में भ्रूण की हलचल का बढ़ना: कई बार गर्भवती महिलाओं का कहना है कि रात में सोते समय उन्हें शिशु की हलचल अधिक महसूस होती है। इसका कारण शांत और आराम की स्थिति में शिशु के मूवमेंट पर अधिक ध्यान जाना हो सकता है।

Pregnancy sleep problems
Pregnancy sleep problems

एसिडिटी और हार्टबर्न: गर्भावस्था के समय पाचन तंत्र धीमा हो जाता है। इसका एक कारण पाचन तंत्र का संकुचन और गर्भाशय द्वारा डाला गया दबाव होता है। जिस वजह से महिला को अपच की समस्या रहती है।

कमर और पीठ दर्द: गर्भावस्था में बढ़ते वजन के कारण महिला के कमर और पेट दर्द होना आम समस्या है। लगातार शारीरिक दर्द के कारण महिला आरामदायक स्थिति में नहीं सो पाती है।

बार-बार पेशाब जाना: मूत्राशय पर गर्भावस्था का बढ़ते दबाव के कारण महिला को बार-बार पेशाब जाने की जरूरत समझ में आती है जिस वजह से भी महिला के नींद में बाधा पहुंचती है।

गर्भावस्था के दौरान बहुत सी महिलाएं आने वाले भविष्य जैसे डिलीवरी, बच्चे की देखभाल अपने करियर इत्यादि के बारे में इतना अधिक सोचती हैं कि उनके शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। जिस वजह से वह तनाव की स्थिति में आ जाती हैं और उनके नींद में बाधा पहुंचती है।

सही पोजीशन अपनाएं : गर्भवती महिलाएं सोने के लिए बाईं करवट का इस्तेमाल करें इससे बच्चे तक सही मात्रा में ब्लड फ्लो और ऑक्सीजन पहुंचता है।

सोते समय अपने पैरों के बीच और पेट के नीचे तकिया रखें इससे कमर पर कम दबाव पड़ता है और आप आरामदायक स्थिति में सो पाती हैं। इसके अलावा प्रेगनेंसी पिलो का इस्तेमाल कर सकते हैं।

सोने से पहले वॉक: सोने से पहले वॉक करें इससे आपको अपच की समस्या से राहत मिलता हैं।

हल्का भोजन: रात में हल्का भोजन करें। तलाभूना और भारी खाना ना लें, इससे आपको अपच की समस्या से राहत मिलेगा और आप बेहतर नींद ले सकते हैं।

रात में चाय कॉफी या किसी भी कैफीन पदार्थ का सेवन ना करें।

सोने से एक घंटा पहले फोन, टीवी या किसी भी प्रकार के स्क्रीन से दूरी बनाएं।

कमरे का माहौल शांतकरने के लिए मध्यम रोशनी और हल्के संगीत का प्रयोग करें यह आपके मन को शांत करने और नींद लाने में मददगार होगा।

यह कुछ छोटे-छोटे टिप्स है जिन्हें अपना कर आप प्रेगनेंसी के समय में एक आरामदायक नींद ले सकती हैं।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...