अगर आप पहली बार मां बनी हैं तो ब्रेस्ट फीडिंग का अनुभव आपके लिए नया और थोड़ा अजीब हो सकता है और इसे कंफर्टेबल बनाने के लिए हो सकता है आप इंटरनेट की मदद ले रही हों और कुछ टिप्स को ढूंढ रही हों। इंटरनेट ऐसी जगह है जहां सच्चाई से अधिक झूठ तेजी से फैलते हैं। इसी बीच आप ने भी कुछ ऐसी बातों को सच माना होगा जो आपके और आपके बच्चे दोनों के लिए ही ब्रेस्ट फीडिंग का अनुभव और अधिक असहज बना रही होंगी। तो आज हम कुछ ऐसी ही अफवाहों से जुड़े फैक्ट्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिनको जानने के बाद आपके लिए यह अनुभव थोड़ा अधिक अच्छा बन जायेगा। आइए जानते हैं कुछ अफवाहें और उनसे जुड़े फैक्ट्स ब्रेस्टफीडिंग के बारे में।

बच्चों को प्राकृतिक रूप से दूध पीना आता है: आपका बेबी दो रिफ्लेक्स के साथ जन्मा होता है और वह हैं सक और रूटिंग रिफ्लेक्स। सक रिफ्लेक्स में वह हर उस चीज को चूसने की कोशिश करता है जो उसके मुंह की छत पर टच होती है और रूटिंग रेलफेक्स के दौरान बच्चा अपने सिर को उस ओर घुमाता है जब उसे अपने चेहरे पर कुछ टच होना महसूस होता है। हालांकि लेबर के दौरान ली जाने वाली दवाइयां बच्चों की इन क्षमताओं को प्रभावित कर सकती हैं इसलिए मां को बच्चे को दूध पीने में मदद करनी चाहिए और पूरी तरह से इस बात पर यकीन नहीं कर लेना चाहिए कि उसे यह पहले से ही आता है।

अगर आपके निपल्स की शेप अलग अलग हो: हर महिला के निपल्स का साइज और शेप अलग अलग होता है और इसी कारण कोई भी साइज या शेप परफेक्ट नहीं माना जाता है। हर बच्चा भी अलग होता है और उनकी जीभ और मुंह का साइज अलग अलग हो सकता है और बच्चा दूध पीने में खुद ही एडजस्ट हो जाता है इसलिए आपको यह अनुमान लगा कर कि आपका साइज परफेक्ट नहीं है, बच्चे को अपने दूध से वंचित नहीं रखना चाहिए।

आपको दूध उत्पादित करने के लिए दूध पीना होता है: हालांकि मां के दूध पीने से उसके ब्रेस्ट मिल्क सप्लाई का कोई नाता नहीं जुड़ा होता है और अगर मां दूध नहीं भी पीती है तो भी उसकी ब्रेस्ट मिल्क सप्लाई होती है लेकिन बहुत से पोषण पाने के लिए और खुद को हाइड्रेट रखने के लिए मां द्वारा दूध का सेवन करना आवश्यक होता है क्योंकि अगर मां को ही पर्याप्त पोषण नहीं मिलेगा तो बच्चा भी इस प्रकार के पोषण से वंचित रह जायेगा।

ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान आपको हमेशा दर्द होता है: ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान दर्द नहीं होता है और डिलीवरी के बाद हार्मोन्स में आने वाले बदलाव के कारण और बच्चे के साथ अधिक कॉन्टैक्ट होने के कारण इस दौरान आपके निप्पल अधिक सेंसिटिव हो जाते हैं लेकिन उनमें आपको पीड़ा देने वाला दर्द नहीं होता है। अगर आप को ब्रेस्ट फीड कराते समय निप्पल में दर्द होता है तो किसी डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए।

आपको सोते हुए बच्चे को दूध पिलाने के लिए नहीं उठाना चाहिए: अगर आपका बच्चा तीन महीने से कम उम्र का है केवल तो यह बात पूरी तरह से झूठ है क्योंकि बच्चे जन्म लेने के बाद अधिक सोते हैं और अगर आप उन्हें दूध पिलाती हैं तो वह और अधिक नींद में आ जाते हैं और लंबे समय तक सोते रहते हैं। इस दौरान आपको अपने बच्चे को बीच बीच में उठा कर दूध पिलाते रहना चाहिए ताकि उन्हें पर्याप्त पोषण और डाइट मिलती रहे।

तो इस प्रकार और भी बहुत सारी अफवाहें आपको इंटरनेट पर मिल जायेंगी लेकिन आपको किसी भी बात पर तब तक भरोसा नहीं करना चाहिए तब तक वह अच्छे से वेरिफाई न हो गई हो। इससे आपके लिए और आपके बच्चे के लिए केवल मुसीबतें ही बढ़ेंगी और कुछ नहीं होगा।

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