TB in Pregnancy: मातृत्व का सुख ऐसा होता है जो हर विवाहित महिला प्राप्त करना चाहती है। खुद का बच्चा देखना अधिकतर महिलाओं के लिए काफी सुख और सुकून प्रदान करता है। कोई महिला नहीं चाहेगी कि उसके मां बन पाने में किसी तरह की बाधा देखने को मिले। लेकिन अगर आप टीबी से जूझ रही हैं तो यह आपके मातृत्व के सुख में एक बाधा बन सकती है। आमतौर पर जेनिटल टीबी भी इनफर्टिलिटी का कारण बन सकती है। इसलिए टीबी के लक्षणों को जल्द से जल्द पहचान लेना चाहिए ताकि इलाज शुरू करने में थोड़ी सी भी देर न हो सके।
टीबी व्यक्ति के पल्मोनरी सिस्टम को प्रभावित करती है लेकिन अगर इसे बिना इलाज करवाए छोड़ दिया जाता है तो यह शरीर के अन्य हिस्सों तक भी पहुंच सकती है जैसे पेल्विक एरिया, यूटरस , फैलोपियन ट्यूब आदि। यह इंफेक्शन जेनिटल ट्रैक्ट तक पहुंच सकता है। तो आइए जानते हैं कैसे टीबी मातृत्व में एक बाधा बन सकती है।
टीबी प्रेग्नेंसी को किस तरह प्रभावित करती है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक टीबी अब्दोमेन के द्वारा यूटरस तक पहुंच सकती है जिससे फैलोपियन ट्यूब और एंडो मेट्रियम लाइनिंग पतली हो सकती है। इस पतली लाइनिंग के कारण बच्चा युटरस में चिपक नहीं पाता है और इस कारण ही टीबी इनफर्टिलिटी का कारण बनती है। जो महिलाएं कंसीव करने की ट्राई कर रही हैं उनके लिए जेनिटल टीबी सबसे बड़ी समस्या है। अर्ली स्टेज में इसके लक्षण भी न के बराबर देखने को मिलते हैं।
जेनिटल टीबी के लक्षण

जेनिटल टीबी से जूझ रही महिलाओं को लक्षण के रूप में मासिक धर्म में अनियमितता, मेंस्ट्रुअल फ्लो का ज्यादा या काफी कम होना, इस दौरान काफी दर्द होना, असमान्य वेजिनल डिस्चार्ज मिलना, पेल्विक एरिया में दर्द होना जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। जो महिलाएं मेनोपॉज से हो चुकी हैं उन्हें इसके बाद भी ब्लीडिंग होना, वेजिनल डिस्चार्ज जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं।
किस उम्र की महिलाओं को है सबसे ज्यादा खतरा?
वैसे तो यह टीबी किसी भी उम्र में महिलाओं को परेशान कर सकती है लेकिन इसके ज्यादातर केस तब ही देखने को मिलते हैं जब महिलाओं का रिप्रोडक्टिव पीरियड होता है जैसे 15 से 45 उम्र के बीच की महिलाओं को यह बीमारी ज्यादा प्रभावित करती है। इसी कारण महिलाओं में इनफर्टिलिटी के केस भी देखने को मिलते हैं।
केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी प्रभावित
एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह इंफेक्शन केवल महिलाओं की ही फर्टिलिटी को नहीं बल्कि पुरुषों की फर्टिलिटी को भी प्रभावित करता है। यह एक ऐसी बीमारी है जो शुरू में महिलाओं में देखने को मिलती है और उनके जेनिटल को प्रभावित करती है। पुरुषों में यह बीमारी उनके प्रॉस्टेट ग्लैंड, एपिडिडिमेस और टेस्टीस को प्रभावित कर सकती है। रेनल और पल्मोनरी टीबी से जूझ रहे अधेड़ उम्र के पुरुषों को यह बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है।
यह बीमारी ब्लड, लिंफ और डायरेक्ट स्प्रेड के द्वारा फैलती है। सेक्स के द्वारा इसके फैलने के चांस काफी कम होते हैं। इसके शरीर में फैलने के बाद बाकी अंगों में फैलने के चांस काफी तेज होते हैं। जो लोग किसी अन्य बीमारी जैसे डायबिटीज़, एचआईवी आदि से जूझ रहे हैं या फिर जिनका इम्यून सिस्टम काफी कमजोर है उनको यह बीमारी होने के चांस ज्यादा हो सकते हैं इसलिए खुद का ज्यादा ख्याल रखे और इलाज जल्द ही शुरू करवा दें।
अगर किसी महिला को हर चीज ट्राई करने के बाद भी कंसीव करने में दिक्कत आ रही है तो उसे टीबी का डायग्नोस करवाना चाहिए और इसका इलाज भी जल्द ही शुरू करवा देना चाहिए ताकि जल्द ही मातृत्व का सुख भी प्राप्त कर सकें।
