baby gender prediction by belly shape during pregnancy
baby gender prediction by belly shape during pregnancy

Summary: क्या पेट देखकर बच्चे का लिंग बताया जा सकता है? मिथकों से रहें सावधान

गर्भवती महिला के पेट के आकार से शिशु का लिंग जानने की धारणा केवल एक मिथक है। मेडिकल साइंस के अनुसार पेट का आकार महिला की शारीरिक बनावट और बच्चे की स्थिति पर निर्भर करता है, न कि लिंग पर।

Pregnancy Belly Myths: गर्भावस्था एक ऐसा समय है जिस दौरान महिलाएं मानसिक तथा शारीरिक बदलाव से तो गुजरती है, साथ ही बहुत सारी नई जानकारी और अनुभवों का भी उन्हें पता चलता है। इसमें से कुछ जानकारी का आधार वैज्ञानिक होता है तो कुछ जानकारियां परंपरागत तौर पर चली आ रही बातों पर टिकी होती है। इनमें बहुत से लोगों का पूरा विश्वास होता है तथा वह इस इस तरह के मिथक को जरूरी समझते हैं। प्रेगनेंसी से जुड़ा ऐसा ही एक मिथक पेट के आकार को लेकर है। आइए इस लेख में जानते हैं प्रेगनेंसी में पेट के आकार को लेकर क्या कहते हैं मिथक और क्या है वैज्ञानिक तर्क।

समाज में कुछ मिथक परंपरा की तरह ही सदियों से चले आ रहे हैं, जिसे आज भी हमारे बड़े मान रहे हैं। इसी मिथक में से एक है गर्भवती महिला के पेट के आकार को देखकर गर्भ में बेटी या बेटा होने की धारणा को बनाना। इस धारणा में कितनी सच्चाई है इसका कोई भी वैज्ञानिक कारण नहीं है, लेकिन आज भी गर्भवती महिला के पेट को देखकर महिलाएं अंदाजा लगाते हुए मिल जाती हैं कि होने वाला शिशु बेटा होगा या बेटी।

Pregnancy Belly Myths-baby gender prediction by belly shape during pregnancy
baby gender prediction by belly shape during pregnancy

विज्ञान इस तरह के मिथक को पूरी तरह से खारिज करता है। मेडिकल साइंस का मानना है कि गर्भवती महिला के पेट का आकर उसके शारीरिक बनावट, पेट में बच्चे की स्थिति के कारण है। महिला के पेट को देखकर बच्चे की स्थिति का तो पता लगाया जा सकता है, लेकिन बच्चे के लिंग के बारे में नहीं जाना जा सकता है।

मिथक की धारणा है: नुकीली पेट होने पर गर्भ में बेटा है तथा चौड़ा पेट होने पर गर्भ में बेटी ह
अगर गर्भवती महिला का पेट ऊपर की तरफ है तो पेट में लड़की है, अगर पेट नीचे की तरफ है तो गर्भ में लड़का है।

क्या है वैज्ञानिक दृष्टि: पेट का नुकीला या चौड़ा होना महिला के शारीरिक बनावट, पेट की मांसपेशियों के लचीलेपन तथा कितनी बार गर्भधारण हुआ है इस बात पर निर्भर करता है।

पेट का ऊपर या नीचे की तरफ अधिक दिखना गर्भ में बच्चे की स्थिति के बारे में बताता है, इसका शिशु के लिंग से कोई संबंध नहीं है।

भारत में कानूनी तौर पर गर्भ में पल रहे शिशु की लिंग जांच करवाना गैर कानूनी है। इसका पता लगने पर परिवार तथा डॉक्टर दोनों को भारतीय दंडसंहिता के अनुसार दंड का प्रावधान है।

भारत में बढ़ते भ्रूण हत्या के केस तथा घटती लड़कियों के जन्म के दर को देखते हुए भारत में भ्रूण के लिंग जांच पर प्रतिबंध लगाया गया है।

लिंग जांच का वैज्ञानिक तरीका: मेडिकल साइंस की मदद से गर्भ में पल रहे शिशु के लिंग का पता लगाया जा सकता है। 18 से 20 हफ्ते के गर्भ का सोनोग्राफी द्वारा लिंग पहचान किया जा सकता है, लेकिन भारत में यह दंडनीय अपराध है।

अगर आपके परिवार में विशेष लिंग के बच्चे की चाह है तो यह मिथक आपकी मानसिक तनाव का कारण बनते हैं।

कई बार यह मिथक बिना कारण भी आप पर मानसिक दबाव डाल सकता है, जैसे कि आप मिथक पर ध्यान देकर यह सोचने में खुद को परेशान करते हैं कि आपके गर्भ में क्या है लड़का या लड़की।

गर्भावस्था के दौरान भावनात्मक सहयोग जरूरी है ना कि मिथकों के अनुसार बेकार की भविष्यवाणी।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...