Sushant Singh Rajput: A shining star
Sushant Singh Rajput: A shining star

Overview: सिर्फ फिल्में नहीं, यादें छोड़ गए सुशांत

सुशांत सिंह राजपूत एक असाधारण अभिनेता थे जिन्होंने 'धोनी', 'लखना' और 'अन्नी' जैसे किरदारों को अमर बना दिया। छोटे पर्दे से बॉलीवुड तक का उनका सफर मेहनत और जुनून की मिसाल है। अभिनय के साथ-साथ विज्ञान और सितारों से उनका गहरा लगाव उन्हें सबसे अलग बनाता था। वे आज भी अपने किरदारों के जरिए करोड़ों दिलों में एक एहसास बनकर जिंदा हैं।

Sushant Singh Rajput Birth Anniversary: सुशांत सिंह राजपूत की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे पर्दे पर अभिनय नहीं करते थे, बल्कि उस किरदार को ‘जीते’ थे। एक बैकग्राउंड डांसर से लेकर बॉलीवुड के टॉप स्टार बनने तक का उनका सफर मेहनत और जुनून की मिसाल है। उन्होंने बहुत कम समय में ऐसी फिल्में दीं, जो सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर बन गईं।

सुशांत सिंह राजपूत सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, वे एक प्रेरणा, एक सपना और करोड़ों दिलों की धड़कन थे। आज भले ही वे हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके निभाए गए किरदार आज भी हमें उनकी मौजूदगी का एहसास कराते हैं। उनकी प्रतिभा का विस्तार छोटे पर्दे से लेकर बड़े पर्दे तक ऐसा रहा कि उन्होंने हर भूमिका में खुद को पूरी तरह झोंक दिया। सुशांत सिंह राजपूत के उन यादगार किरदारों और उनके सफर की जानकारीl

द अनटोल्ड स्टोरी

यह सुशांत के करियर का सबसे प्रतिष्ठित किरदार था। इस फिल्म के लिए उन्होंने खुद को इतना बदला कि पर्दे पर असली धोनी और सुशांत के बीच फर्क करना मुश्किल हो गया था। उन्होंने महीनों तक धोनी के ‘हेलीकॉप्टर शॉट’ की प्रैक्टिस की और उनके चलने-बोलने के अंदाज को हूबहू पकड़ा। इस फिल्म ने सुशांत को सुपरस्टार बनाया और आज भी जब लोग धोनी को याद करते हैं, तो सुशांत का चेहरा सामने आ जाता है।

सोनचिरैया

चंबल के बीहड़ों की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में सुशांत ने ‘लखना’ नाम के डकैत का किरदार निभाया था। यह उनके करियर का सबसे अंडररेटेड लेकिन सबसे शक्तिशाली प्रदर्शन माना जाता है।धूल से सने चेहरे और बुंदेली भाषा के साथ सुशांत ने एक ऐसे बागी का किरदार निभाया जो अपने अंदर के पश्चाताप से लड़ रहा था। इस फिल्म ने साबित किया कि सुशांत सिर्फ चॉकलेटी बॉय नहीं, बल्कि एक बेहद गंभीर अभिनेता थे।

छिछोरे

सुशांत की आखिरी थिएटर रिलीज फिल्म ‘छिछोरे’ ने समाज को ‘सफलता और विफलता’ के बीच का असली संदेश दिया। उन्होंने एक कॉलेज स्टूडेंट और एक अधेड़ उम्र के पिता, दोनों ही किरदारों को बेहतरीन तरीके से निभाया। फिल्म का संवाद—”हार-जीत तय नहीं करती कि आप लूजर हैं या नहीं, आपकी कोशिश तय करती है”—आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।

केदारनाथ

2013 की त्रासदी पर आधारित इस फिल्म में सुशांत ने ‘मंसूर’ नाम के एक ‘पिठ्ठू’ (श्रद्धालुओं को पीठ पर ढोने वाला) का किरदार निभाया। उनकी सादगी और निस्वार्थ प्रेम ने दर्शकों की आंखों में आंसू ला दिए थे। सारा अली खान के साथ उनकी केमिस्ट्री और फिल्म का अंत आज भी रोंगटे खड़े कर देता है।

Sushant Singh Rajput: A shining star
Sushant Singh Rajput: A shining star

पवित्र रिश्ता

सुशांत के सफर की शुरुआत टीवी के छोटे पर्दे से हुई थी। ‘मानव’ के किरदार ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। एक साधारण मैकेनिक के रोल में उनकी सादगी ने उन्हें ‘नेशनल क्रश’ बना दिया था।

विज्ञान और सितारों से उनका लगाव

सुशांत केवल अभिनय तक सीमित नहीं थे। वे खगोल विज्ञान (Astronomy), क्वांटम फिजिक्स और कोडिंग के शौकीन थे। उनके पास अपनी खुद की टेलीस्कोप थी जिससे वे घंटों सितारों को निहारा करते थे। वे अक्सर कहते थे कि हम सब ‘स्टारडस्ट’ (सितारों की धूल) से बने हैं।

वह चमकता सितारा जो कहीं खो गया

सुशांत सिंह राजपूत ने अपनी फिल्मों के जरिए हमें सिखाया कि सपने देखना और उन्हें पूरा करना मुमकिन है। चाहे ‘काय पो छे’ का ईशान हो या ‘डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी’, उन्होंने हर बार दर्शकों को कुछ नया दिया। वे एक ऐसे कलाकार थे जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता।

मैं रिचा मिश्रा तिवारी पिछले 12 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हूं। विभिन्न न्यूज चैनल के साथ काम करने के अलावा मैंने पीआर और सेलिब्रिटी मैनेजमेंट का काम भी किया है। इतने सालों में मैंने डायमंड पब्लिकेशंस/गृह लक्ष्मी, फर्स्ट...