‘‘मुझे ज्यादा वजन नहीं बढ़ाना लेकिन मीठा बेहद पसंद है। क्या मैं चीनी के विकल्प प्रयोग में ला सकती हूं?”

सुनने में चाहे ही भला लगे लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए चीनी के विकल्पों का मिला-जुला असर ही होता है वैसे तो ये सुरक्षित हैं लेकिन अभी इस विषय में शोध नहीं हो पाया है।

सुक्रालोज़ (स्पलेंडा) :- यह चीनी से बनती है लेकिन इसे रासायनिक रूप से इस तरह बदल दिया जाता है कि शरीर इसे अवशोषित नहीं कर पाता। जो गर्भवती महिलाएं कैलोरी नहीं बढ़ाना चाहतीं, उन्हें इसे लेना चाहिए। आप इसे चाय, कॉफी या फिर कुछ पकाते या बेक करते समय मिला सकती हैं या फिर ऐसे उत्पाद ही लें जिनमें सुक्रालोज़ मिली हो (ड्रिंक,योगर्ट, कैंडी व आईसक्रीम)। याद रखें कि सीमित मात्रा ही ज्यादा बेहतर रहेगी। हालांकि उत्पाद नया है इसलिए इसके बारे में अधिक आंकड़े भी उपलब्ध नहीं है।

एस्पार्टम (इक्वल, न्यट्रास्वीट) :- इसे ड्रिंक,योगर्ट व फ्रोजन फूड में मिला सकते हैं लेकिन पका नहीं सकते या बेक नहीं कर सकते क्योंकि ज्यादा पकाने से इसकी मिठास चली जाती है। अधिकतर डॉक्टर इसे सुरक्षित मानते हुए यही राय देते हैं कि इसका थोड़ा-बहुत प्रयोग किया जा सकता है। कुछ डॉक्टर कहते हैं कि गर्भवती महिलाओं को कृत्रिम मिठास का चुनाव करते समय सावधानी रखनी चाहिए।आप अपने डॉक्टर से राय लेने के बाद ही आगे बढ़ें।

सैक्रीन :- मनुष्यों में सैक्रीन के इस्तेमाल पर ज्यादा शोध नहीं हुए लेकिन जानवरों पर हुए इसके शोधों से पता चला है कि इसकी अधिक मात्रा लेने वाली मादाओं में कैंसर की संभावना बढ़ गई यह स्पष्ट नहीं है कि क्या गर्भवती महिला को भी यह खतरा हो सकता है? अधिकतर डॉक्टर इसके कम से कम प्रयोग की ही राय देते हैं। हालांकि जो सैक्रीन आप पहले ले चुकी हैं, इसके बारे में सोच कर परेशान न हों।

एसुलफेम-के (सुनैट) :- चीनी से भी दो सौगुना मीठा यह स्वीटनर बेक्ड पदार्थों, जिलेटिनडेवर्ट, गर्म व साफ्ट ड्रिंक में डाला जाता है।एफडीए के अनुसार गर्भावस्था में इसकासीमित मात्रा में प्रयोग किया जा सकता है पर आप अपने डॉक्टर से पूछें कि वे इस बारे में क्या कहते हैं।

सॉरबीटॉल :- यह चीनी (मिठास) कुदरतन कई फलों व बैरी में पाई जाती है। चीनी की आधी मिठास वाली सॉरबीटॉल को खाने-पीने की वस्तुओं में मिलाया जाता है। गर्भावस्था में सीमित मात्रा में सेवन तो ठीक रहेगा, अधिक मात्रा लेने से गैस का दर्द या डायरिया वगैरह हो सकता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मैनीटॉल :- यह चीनी से कम मिठास वाली होती है। यह चीनी से बहुत कम कैलोरी देती है। सॉरबीटॉल की तरह, सीमित मात्रा में इसका प्रयोग कर सकते हैं लेकिन ज्यादा लेने सेगैस्ट्रोइंटेस्टाइनल गड़बड़ी हो सकती है।

ज़ाइलिटॉल :- यह कुदरतन कई फलों व सब्जियों में पाई जाने वाली मिठास है। शरीर भी सामान्य में मेटाबॉलिज्म की क्रिया में इसे बनाता है। यह च्यूइंगम, टूथपेस्ट कैंडी व कुछ खाद्य पदार्थों में होती है। यह दांतों की सड़न रोकती है। इसमें चीनी से 40 प्रतिशत कम कैलोरी होती है। गर्भावस्था में इसका सीमित प्रयोग करें। जाइलिटॉल युक्त एक च्यूइंगम फायदा करेगी लेकिन आप इसके पांच पैकेट चबाना पसंद नहीं करेंगे।?

स्टेविया :- दक्षिणी अमरीकी जड़ी-बूटी से बनी स्टेविया एक ऐसा स्वीटनर है, जिसके बारे में अभी तक ऐसे शोध नहीं हुए हैं। इसे इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से पूछना न भूलें।

लैक्टोज :- इस मिल्क शुगर में चीनी की 1/16 हिस्सा मिठास होती है। यह खाद्य पदार्थों में हल्की मिठास पैदा करती है। लैक्टोज़ इन्टॉलरेंट के लक्षण हों, तो इसका इस्तेमाल न करें।शहद :-एंटीऑक्सीडेंट तत्त्वों की वजह से आजकल शहद (हनी) काफी चलन में है।हालांकि यह चीनी का अच्छा विकल्प है लेकिन इसमें कैलोरी की मात्रा कम नहीं होती।इसमें एक बड़ा चम्मच चीनी की कैलोरी के मुकाबले 19 कैलोरी अधिक होती है।

फ्रूट जूस कांसन्ट्रेट :- अंगूर व सेब जैसे जूस कांसन्ट्रेट गर्भावस्था में काफी सुरक्षित रहते हैं आप कई व्यंजनों में चीनी की जगह उनका इस्तेमाल कर सकती हैं। वे सुपर मार्केट सेफ्रोजन अवस्था में मिलते हैं। जैम, जेली, साबुत अनाज की कुकीज़,मफिन, सेरेल, ग्रेनोला बार और पॉप अप टोस्टर पेस्ट्रीज़ में भी इन्हें डाला जाता है। फ्रूट जूस की मिठास वाले उत्पाद, साबुत अनाज, सेहतमंद वसा जैसे पौष्टिक खाद्यपदार्थों से बनते हैं। ये सचमुच बहुत लाजवाब होते हैं।

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