हर गर्भवती महिला को कई तरह के टेस्ट नियमित रूप से करवाने पड़ते हैं; कुछ क्षेत्रों में डॉक्टर उन्हें जरूरी मानते हैं। तो कुछ क्षेत्रों में नहीं, कुछ टेस्ट ऐसे हैं, जो सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही किए जाते हैं। पहली मुलाकात में आमतौर पर निम्नलिखित टेस्ट होंगे‒
- रक्त के प्रकार व Rh स्तर की जांच,एचसीजी स्तर व एनीमिया की जांच के लिए ब्लड टेस्ट
- ग्लूकोज़, प्रोटीन, सफेद रक्त कोशिकाओं,रक्त व बैक्टीरिया की जांच के लिए यूरीनलेसिस
- एंटीबॉडी स्तर व रूवेला जैसी बीमारियों के लिए इम्यूनिटी की जांच के लिए ब्लड स्क्रीन
- सिफलिस, गोनोरिया, हेपेटाइटिस बी,क्लमाइडिया या एचआइवी जैसे संक्रमण की जांच

- असमान्य सर्वाईकल कोशिकाओं की जांच के लिए पैप स्मीयर आपकी निश्चित अवस्था के हिसाब से निम्नलिखित टेस्ट भी कराने पड़ सकते हैं।
- सिस्टिक फाइब्रोसिस, सिक्ल सैलएनीमिया व दूसरे जेनेटिक रोगों के लिए जेनेटिक टेस्ट
- मधुमेह, उच्च रक्तचाप, यदि पहले काफी अधिक वजन वाले शिशु का जन्म हुआ हो, जन्मजात विकृति हो, पहली गर्भावस्था में वजन काफी बढ़ गया हो तो ब्लडशुगर स्तर की जांच (सभी महिलाओं के गैस्टेशनल मधुमेह की जांच के लिए ग्लूकोज स्क्रीनिंग टेस्ट किया जाता है,यह करीब 28वें सप्ताह में होता है)।
चर्चा का अवसर :- इस समय आपके पास अपनी कई जिज्ञासाओं व प्रश्नों का उत्तर पाने का उचित अवसर है।
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